भारत और दुनिया में कृषि क्षेत्र: ताज़ा स्थिति, चुनौतियाँ और अवसर

 

कृषि आज केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है बल्कि तकनीक, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक बाजारों से भी सीधे जुड़ी हुई है। हाल ही में सामने आए कृषि समाचार यह दिखाते हैं कि किसान, नीतिनिर्माता, टेक्नोलॉजी कंपनियाँ और अनुसंधान संस्थान सभी मिलकर इस क्षेत्र को बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

1) टेक्नोलॉजी और AI से कृषि में बड़ा बदलाव

उद्यम और टेक कंपनियाँ अब कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग बढ़ा रही हैं।

Cropin का नया AI प्लेटफ़ॉर्म:
कृषि टेक कंपनी Cropin ने एक AI आधारित प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया है जिसका लक्ष्य वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं में जोखिम कम करना, डेटा‑आधारित निर्णय लेना और खरीद‑प्रक्रिया को स्मार्ट बनाना है। इस पहल में Google, BCG, Wipro जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जिससे तकनीक को असली फील्ड में उतारने की क्षमता बढ़ेगी।

AI सलाह — Krishi Mitra:
इसी तरह, AI‑powered voice assistant Krishi Mitra किसानों को क्षेत्रीय भाषा में विशेषज्ञ सलाह, फसल सलाह, रोग पहचान और बाजार पोर्टल तक पहुँच जैसे लाभ दे रहा है। यह पहले से 20 लाख से अधिक किसानों को लाभ पहुंचा चुका है, जिससे छोटे व सीमांत किसान भी बेहतर निर्णय ले पा रहे हैं।

ये टेक्नोलॉजीपहले किसान को खेत से सीधे जोड़ती हैं जिससे उत्पादन में सुधार, लागत में कटौती और जोखिम प्रबंधन आसान हो रहा है।

2) जलवायु परिवर्तन का बड़ा प्रभाव

कृषि क्षेत्र जलवायु से सीधे प्रभावित होता है और एक ताज़ा अध्ययन के अनुसार, भारत में जलवायु परिवर्तन के कारण फसल उपज में 25% तक गिरावट सकती है। इसका कारण अनियमित वर्षा, उच्च तापमान और सूखे की प्रवृत्ति है, जो कृषि उत्पादन क्षमता को कमजोर कर सकते हैं।

कारण और प्रभाव

·         वर्षा का असामयिक होना और तापमान में वृद्धि फसल विकास चक्र को प्रभावित करती है।

·         विशेष रूप से अनाज, दाल, और तिलहन फसलों में उत्पादन में असामान्य उतारचढ़ाव दर्ज हुआ है।

·         इस बदलाव से किसानों का आर्थिक तनाव बढ़ रहा है और उन्हें जोखिम से निपटने के लिए नई तकनीकों को अपनाना जरूरी हो रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इसके जवाब में जलवायुसहिष्णु कृषि (climate resilient agriculture) और नई तकनीकी अनुकूल फसल किस्में अपनाना जरूरी है ताकि भविष्य में जोखिमों को कम किया जा सके।

3) अनुमानित खाद्य उत्पादन में वृद्धि

सरकार के हालिया डेटा के अनुसार भारत में खाद्यधान्य (foodgrain) उत्पादन 2025 में नई ऊँचाइयों पर पहुंचने की संभावना है। श्रम, बीज प्रबंधन और बेहतर सिंचाई उपायों की वजह से कुल उत्पादन में 3.5‑4% की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।

मुख्य तथ्य:

·         सामान्य बरसात और बेहतर ग्रामीण मांग के कारण उत्पादन बेहतर हुआ।

·         रबी और खरीफ फसलों की बुवाई में निरंतरता बनी हुई है।

·         ताजा तकनीक और ड्रोन AI टूल्स के उपयोग से उत्पादन क्षमता में सुधार देखा गया है।

हालांकि, स्थानीय बाढ़, सूखे और अन्य मौसम संबंधी बाधाओं ने कुछ क्षेत्रों में चुनौतियाँ पैदा कीं, जिससे नीतिनिर्माताओं को हाइब्रिड समाधान खोजने की आवश्यकता है।

4) मौसम के चलते फसल नुकसानमहाराष्ट्र का उदाहरण

महाराष्ट्र के पुरंदर इलाके में लंबे समय तक ठंडे मौसम के कारण अंजीर (fig) फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। ठंडे तापमान ने विकास के महत्वपूर्ण चरणों को बाधित किया, जिससे फल का आकार और गुणवत्ता दोनों गिर गये और गिरावट दर में वृद्धि हुई।

खेती और आर्थिक प्रभाव

·         उच्च लागत वाली फसल में गिरावट ने किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है।

·         कुछ किसानों ने पारंपरिक उपाय अपनाए लेकिन सीमित प्रभाव मिला।

यह स्थिति यह दिखाती है कि क्लाइमेट परिवर्तन केवल व्यापक स्तर पर बल्कि स्थानीय कृषि पारिस्थितिकी को भी कितना प्रभावित कर सकता है।

5) सरकारी सहायता और किसान सेवाएँ

उत्पादन के साथसाथ सरकार की सहायता प्रणालियाँ भी कृषि क्षेत्र को मजबूत कर रही हैं:

नया हेल्पलाइन सेवा (आगरा यूपी):
उत्तर प्रदेश में कृषि हेल्पलाइन नंबर शुरू किया गया है जहाँ किसान एक ही कॉल से सभी कृषि योजनाओं, सब्सिडी, बीज, उर्वरक, डिजिटल सर्वे और किसान रजिस्ट्रेशन जैसी जानकारी पा सकते हैं। यह सेवा सोमवार से शुक्रवार 10:00 AM से 6:00 PM तक उपलब्ध है, जिससे प्रशासनिक बाधा कम होगी और किसान ज्यादा जानकार निर्णय ले पाएँगे।

हेल्पलाइन से किसानों को नकद सहायता, मशीनरी, अनुसंधान संपर्क और कृषि इनपुट तक सीधी पहुँच मिलने की उम्मीद है।

6) कृषि अनुसंधान और राष्ट्रीय गौरव

डॉ. अशोक कुमार सिंह को पद्मश्री सम्मान:
भारत में बासमती धान अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह को इस वर्ष पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।

यह उपलब्धि राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान में नवाचार और खाद्यान्न सुरक्षा को बढ़ावा देने वाले वैज्ञानिकों की भूमिका को रेखांकित करता है।

7) वैश्विक कृषि कारोबार और आयातनिर्यात रुझान

भारत अपने कृषि निर्यात संतुलन को बनाए रखते हुए 2024‑25 में लगभग $51.9 बिलियन का निर्यात दर्ज कर चुका है, जबकि आयात $38.5 बिलियन रहा। इससे कृषि वाणिज्यिक व्यापार में सकल $13.4 बिलियन का surplus बना हुआ है।

निर्यातआयात ट्रेंड्स

·         फल जैसे बादाम, पिस्ता, अखरोट, सेब, अनार सहित ताज़े फलों के आयात बढ़ रहे हैं।

·         दाल और तिलहन जैसे वस्तुओं के आयात में 2023‑24 के एल नीनो सूखे के बाद बढ़ोतरी हुई, हालांकि हाल के रिकॉर्ड उत्पादन ने इसे कम किया है।

यह संकेत करता है कि भारत को उच्च मूल्यवाले कृषि वस्तुओं में अपनी प्रतिस्पर्धा बेहतर बनाने की आवश्यकता है ताकि निर्यात और घरेलू मांग दोनों को संतुलित किया जा सके।

8) नीतिस्तर और दीर्घकालिक दिशा

भारत में कृषि क्षेत्र को सतत और टिकाऊ बनाने के लिए सुझाव और रणनीतिक दिशाएँ सामने रही हैं:

Regenerative farming (पुनर्जीवन कृषि): यह अवधारणा मिट्टी की सेहत सुधरने, जल की बचत तथा भूउपज और जीवविविधता को बढ़ावा देने पर जोर देती है; इसे बड़े पैमाने पर अपनाना आवश्यक है ताकि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो सके।

R&D और नवाचार की आवश्यकता: विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को कृषि अनुसंधान में निवेश बढ़ाना चाहिए ताकि नई किस्मों, कीटनियंत्रण तकनीकों और संवृद्ध उत्पादन मॉडल को विकसित किया जा सके।

संसाधनआधारित समाधान: भूमिस्वामी स्पष्टता, सिंचाई, ग्रामीण सड़कों, भंडारण और कोल्डचेन जैसी बुनियादी बातों पर निवेश करना आवश्यक है ताकि किसानों का जोखिम कम हो और कृषि लाभप्रद रहे।

निष्कर्षकृषि का भविष्य

आज की कृषि रिपोर्ट दिखाती है कि भारत और दुनिया की खेती, कृषि नीति, तकनीक और बाजार के बीच गहरा सम्बंध है।

मुख्य रुझान:
AI और डिजिटल कृषि किसान निर्णय और उत्पादकता को सुधार रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन कृषि जोखिमों को बढ़ा रहा है, जिससे सहनीय कृषि तरीकों की आवश्यकता बढ़ी है।
सरकारी पहलें जैसे हेल्पलाइन और अनुसंधान व्यक्तियों को सीधे लाभ दे रही हैं।
राष्ट्रीय मान्यता अनुसंधान को मजबूती दे रही है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को प्रेरित कर रही है।
निर्यातआयात संतुलन से कृषि वाणिज्य की स्थिति मजबूत बनी है।

भारतीय कृषि का लक्ष्य अब अधिक उत्पादक, तकनीकीसक्षम, क्लाइमेटप्रूफ और बाजारउन्मुख बनना हैताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो और किसान की आय स्थायी रूप से बढ़े। 

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