आज
के
समय
में
सेक्स
से
जुड़ी
समस्याएँ केवल
व्यक्तिगत विषय
नहीं
रह
गई
हैं,
बल्कि
यह
एक
गंभीर
सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा बनती
जा
रही
हैं।
हाल
की
रिपोर्ट्स और
डॉक्टरों की
राय
के
अनुसार,
पुरुषों और
महिलाओं दोनों
में
सेक्सुअल हेल्थ
से
जुड़ी
दिक्कतें तेजी
से
बढ़
रही
हैं,
जिनका
सीधा
असर
मानसिक
स्वास्थ्य, वैवाहिक जीवन
और
प्रजनन
क्षमता
पर
पड़
रहा
है।
पुरुषों में सेक्स समस्याएँ बढ़ीं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के
अनुसार,
आजकल
पुरुषों में
इरेक्टाइल डिसफंक्शन (तनाव के कारण कमजोरी), समय से
पहले
स्खलन
और
यौन
इच्छा
में
कमी
जैसी
समस्याएँ कम
उम्र
में
ही
देखने
को
मिल
रही
हैं।
इसकी
बड़ी
वजहें
मानी
जा
रही
हैं—
- अत्यधिक मोबाइल और पोर्न कंटेंट का सेवन
- तनाव भरी जीवनशैली
- नींद की कमी
- शराब और तंबाकू का अधिक इस्तेमाल
डॉक्टरों का
कहना
है
कि
जरूरत
से
ज्यादा
पोर्न
देखने
से
दिमाग
की
प्राकृतिक प्रतिक्रिया प्रभावित होती
है,
जिससे
वास्तविक रिश्तों में
संतुष्टि कम
हो
जाती
है।
महिलाओं से जुड़ी यौन और हार्मोनल समस्याएँ
महिलाओं में
भी
सेक्स
से
जुड़ी
कई
समस्याएँ सामने
आ
रही
हैं।
हाल
के
मेडिकल
सर्वे
के
अनुसार,
बड़ी
संख्या
में
महिलाएँ यौन इच्छा की कमी, दर्द के साथ संबंध, हार्मोन असंतुलन और पीरियड से जुड़ी दिक्कतों से
जूझ
रही
हैं।
इसके
पीछे
कारण
हैं—
- हार्मोनल
बदलाव
- तनाव और डिप्रेशन
- सही जानकारी की कमी
- झिझक के कारण डॉक्टर से सलाह न लेना
अच्छी
खबर
यह
है
कि
अब
बिना
दवाओं
के
महिलाओं की
पीरियड
और
हार्मोन संबंधी
समस्याओं के
लिए
नई
मेडिकल
टेक्नोलॉजी और
वियरेबल डिवाइस
विकसित
की
जा
रही
हैं।
सुरक्षित सेक्स को लेकर चिंता
स्वास्थ्य विभाग
की
रिपोर्ट्स बताती
हैं
कि
युवाओं में सुरक्षित सेक्स को लेकर लापरवाही बढ़ी है, जिससे
यौन
संक्रमण (STI) और अनचाही
गर्भावस्था के
मामले
सामने
आ
रहे
हैं।
कंडोम
का
सही
इस्तेमाल न
करना
और
सही
सेक्स
एजुकेशन की
कमी
इसकी
मुख्य
वजह
है।
विशेषज्ञों का
कहना
है
कि
स्कूल
और
कॉलेज
स्तर
पर
सेक्स एजुकेशन को मजबूत करना बेहद ज़रूरी हो
गया
है,
ताकि
युवा
सही
जानकारी के
साथ
सुरक्षित फैसले
ले
सकें।
प्रजनन स्वास्थ्य और सिस्टम की कमियाँ
कुछ
हालिया
मामलों
में
यह
भी
सामने
आया
है
कि
नसबंदी
या
परिवार
नियोजन
से
जुड़े
ऑपरेशन
के
बावजूद
गर्भ
ठहरने
के
केस
सामने
आए
हैं।
इससे
स्वास्थ्य सेवाओं
की
गुणवत्ता और
निगरानी पर
सवाल
खड़े
हुए
हैं।
विशेषज्ञ मानते
हैं
कि
प्रजनन
स्वास्थ्य सेवाओं
में
पारदर्शिता और
फॉलो-अप बेहद ज़रूरी
है।
निष्कर्ष
सेक्स
से
जुड़ी
समस्याएँ आज
केवल
शर्म
या
निजी
मामला
नहीं
रहीं।
यह
शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य से
जुड़ा
बड़ा
विषय
बन
चुका
है।
सही
जानकारी, समय
पर
डॉक्टर
की
सलाह
और
जागरूकता ही
इन
समस्याओं से
बचने
का
सबसे
प्रभावी तरीका
है।
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