एमएसपी में बढ़ोतरी का तोहफा और रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान

 

नई दिल्ली।

केंद्र सरकार ने देश के किसानों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने और खेती की लागत में हुई वृद्धि की भरपाई करने के उद्देश्य से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की है। यह वृद्धि खरीफ और रबी दोनों मौसम की फसलों के लिए की गई है, जिससे किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित हो सके। इस कदम से किसानों की आय में सुधार की उम्मीद है, वहीं सरकार का मानना है कि खुदरा कीमतें (Retail Prices) नियंत्रण में बनी रहेंगी।

रबी और खरीफ फसलों के एमएसपी में वृद्धि

केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र (Marketing Season) 2026-27 के लिए प्रमुख फसलों के एमएसपी में अच्छी बढ़ोतरी की है। उदाहरण के लिए, गेहूं के एमएसपी में ₹160 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, जिससे इसका नया समर्थन मूल्य ₹2585 प्रति क्विंटल हो गया है। इसी तरह, दलहन और तिलहन फसलों जैसे मसूर (₹300 की वृद्धि) और सरसों (₹250 की वृद्धि) के एमएसपी में भी वृद्धि की गई है।

मुख्य वृद्धि के कारण:

1.      उत्पादन लागत का 50% से अधिक लाभ: सरकार का लक्ष्य केंद्रीय बजट 2018-19 की प्रतिबद्धता के अनुरूप, किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर कम से कम 50% अधिक लाभ सुनिश्चित करना है।

2.      फसल विविधीकरण (Crop Diversification): दलहन और तिलहन के एमएसपी में अधिक वृद्धि करके सरकार किसानों को इन फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जिसका उद्देश्य आयात पर देश की निर्भरता को कम करना है।

खुदरा कीमतों पर सीमित प्रभाव

एमएसपी में वृद्धि से अक्सर खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) बढ़ने की आशंका जताई जाती है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों और वित्तीय संस्थानों की रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार खुदरा कीमतों पर सीमित प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

आई.सी.आई.सी.आई. बैंक ग्लोबल मार्केट्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एमएसपी संशोधन का खुदरा खाद्य कीमतों पर वास्तविक प्रभाव बफर स्टॉक के स्तर, मौसम के पैटर्न और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता सहित कई कारकों पर निर्भर करता है। वर्तमान में, खाद्यान्न का पर्याप्त बफर स्टॉक और उच्च जलाशय स्तरों के कारण, खुदरा कीमतें शेष वर्ष के लिए स्थिर बनी रहने की संभावना है।

खाद्यान्न उत्पादन का रिकॉर्ड अनुमान

एमएसपी में इस प्रोत्साहनकारी वृद्धि के बीच, भारतीय कृषि क्षेत्र की मजबूती एक बार फिर स्पष्ट दिखाई दे रही है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, देश का खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने की उम्मीद है।

·         कुल खाद्यान्न उत्पादन: नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, कुल खाद्यान्न उत्पादन में पिछले वर्षों की तुलना में लगभग 8% की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है।

·         चावल और गेहूं: चावल और गेहूं दोनों का उत्पादन भी रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँच गया है। (उदाहरण के लिए, चावल उत्पादन 1501.84 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने का अनुमान है)

यह रिकॉर्ड उत्पादन केवल देश की बढ़ती आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि निर्यात बाजार में भारत की स्थिति को भी मजबूत करता है। यह उपलब्धि किसानों के अथक प्रयासों, सरकारी नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन और उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने का प्रमाण है।

 

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