रोज़गार और शिक्षा: कौशल
संकट और AI युग में करियर की नई राहें
[CityNews24 डेस्क]
भारत
में शिक्षा और रोज़गार का
परिदृश्य एक बड़े बदलाव
के दौर से गुज़र रहा
है। जहाँ एक ओर रिकॉर्ड
संख्या में युवा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं,
वहीं दूसरी ओर 'बेरोज़गार शिक्षित युवा' की संख्या भी
चिंताजनक रूप से बढ़ी है।
2026 की शुरुआत में, बाज़ार का यह विरोधाभास
स्पष्ट रूप से दिखाई दे
रहा है: डिग्री
अब रोज़गार की गारंटी नहीं है, बल्कि विशिष्ट और परिवर्तनशील कौशल (transferable skills)
नए युग की मुद्रा बन गए हैं।
कौशल
और रोज़गार के बीच की
खाई
हालिया
रिपोर्टों के अनुसार, भारत
की बेरोज़गार आबादी में 83% तक युवा
शामिल हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि
माध्यमिक या उच्च शिक्षा
प्राप्त बेरोज़गारों की हिस्सेदारी पिछले
दो दशकों में लगभग दोगुनी हो गई है।
यह स्पष्ट संकेत देता है कि हमारी
पारंपरिक शिक्षा प्रणाली वर्तमान रोज़गार बाज़ार की ज़रूरतों के
अनुरूप नहीं है।
उच्च
शिक्षा प्राप्त पेशेवर भी अब आर्थिक
उथल-पुथल से अछूते नहीं
हैं। कई स्नातक, खासकर
मार्केटिंग, कम्युनिकेशन और डिज़ाइन जैसे
क्षेत्रों से, एंट्री-लेवल व्हाइट-कॉलर नौकरियों को खोजने में
संघर्ष कर रहे हैं।
इसकी मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेज़ी से
विकास है, जो अब जूनियर
कर्मचारियों के कई कार्यों
को संभालने में सक्षम हो गया है।
नई
शिक्षा नीति (NEP 2020) और व्यावसायिक एकीकरण
सरकार
ने इस खाई को
पाटने के लिए राष्ट्रीय
शिक्षा नीति (NEP) 2020 के माध्यम से
बड़े सुधारों पर ज़ोर दिया
है।
·
व्यावसायिक
शिक्षा पर ज़ोर: NEP का लक्ष्य है
कि 2025-26 तक कम से
कम 50% हाई स्कूल के छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा
(Vocational Education) से
परिचित कराया जाए। इसका उद्देश्य शिक्षा को केवल रटने
पर आधारित ज्ञान से हटाकर व्यावहारिक
और अनुभवात्मक समझ की ओर ले
जाना है।
·
समावेशी
डिजिटल शिक्षा: NEP डिजिटल लर्निंग, ऑनलाइन कोर्सेज़ और टू-वे ऑडियो-वीडियो इंटरफेस के विकास पर
भी ध्यान केंद्रित कर रही है,
ताकि शिक्षा और कौशल विकास
तक सभी की पहुँच सुनिश्चित
हो सके।
2026 के
उभरते हुए करियर और आवश्यक कौशल
भविष्य
के जॉब मार्केट में सफल होने के लिए युवाओं
को तेज़ी से बदलते रुझानों
को समझना होगा। विशेषज्ञ 2026 में निम्नलिखित क्षेत्रों में नौकरियों में भारी उछाल आने का अनुमान लगा
रहे हैं:
1.
टेक्नोलॉजी-संचालित भूमिकाएँ: डेटा साइंस, AI और मशीन लर्निंग,
क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा।
2.
ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर: सोलर पैनल टेक्नीशियन, ई-व्हीकल चार्जिंग
स्टेशन मेंटेनेंस स्टाफ (PM सूर्य घर योजना जैसी
पहलों के कारण)।
3.
क्विक कॉमर्स और प्रिसिशन मैन्युफैक्चरिंग।
डिग्री
से ज़्यादा अब कौशल
(Skills) मायने रखते हैं। 2026 के लिए सबसे
ज़रूरी कौशल हैं:
·
AI साक्षरता
(AI Literacy): AI टूल्स
(जैसे GPT-6,
Midjourney) के साथ काम करने की समझ।
·
डेटा
एनालिटिक्स:
डेटा का विश्लेषण करके
निर्णय लेने की क्षमता।
·
लोचशीलता
और अनुकूलनशीलता (Flexibility
and Adaptability): बदलते
हालात के अनुसार खुद
को ढालने की क्षमता।
·
रणनीतिक
सोच
(Strategic Thinking): क्योंकि
AI तकनीकी कार्यों को संभाल रहा
है, इंसान का मूल्य अब
उसके 'Human Touch' और 'Strategic Mindset' से तय होता
है।
निष्कर्ष:
'डिग्री' से 'दक्षता' तक का सफर
शिक्षित
युवाओं के बीच बढ़ती
बेरोज़गारी एक गंभीर समस्या
है, जिसके कारण हताशा और विदेशों में
प्रतिभा
पलायन
(Brain Drain) की समस्या बढ़ रही है। वैश्विक टैलेंट कंपनियों के सीईओ भी
अब छात्रों को केवल अपने
जुनून का पीछा करने
के बजाय एक ऐसा शिल्प
या कौशल सीखने की सलाह दे
रहे हैं जिससे वे अच्छा जीवनयापन
कर सकें।
भारत के लिए यह निर्णायक समय है। शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच मज़बूत साझेदारी स्थापित करके, और सिर्फ डिग्री के बजाय रोज़गार परिणामों पर ध्यान केंद्रित करके ही, भारत अपनी विशाल युवा शक्ति को विकसित भारत के निर्माण में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार कर सकता है।
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