राष्ट्रव्यापी कृषि हलचल: बुवाई में प्रगति, मंडियों में उतार-चढ़ाव और आत्मनिर्भरता की ओर कदम

 

नई दिल्ली।

पूरे भारत में कृषि क्षेत्र में सक्रियता बनी हुई है। देश के प्रमुख कृषि प्रधान राज्योंपंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहारसे फसल बुवाई की प्रगति, मंडी भावों की स्थिति और मौसम संबंधी तैयारियों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें रही हैं। सरकार की नीतियों और किसानों के अथक प्रयास के बल पर भारतीय कृषि केवल देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है, बल्कि वैश्विक निर्यात में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

फसल बुवाई की प्रगति: राज्यों का हाल

1. पंजाब और हरियाणा (उत्तर-पश्चिम भारत):

उत्तर भारत के ये दोनों राज्य गेहूं और धान उत्पादन के लिए देश की रीढ़ हैं। वर्तमान में, रबी की बुवाई (गेहूं, सरसों, चना) लगभग पूरी हो चुकी है, और किसान सिंचाई और शुरुआती उर्वरक अनुप्रयोग पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में भूजल स्तर में गिरावट अभी भी एक चिंता का विषय बनी हुई है, जिसके कारण किसान आधुनिक सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने की ओर अग्रसर हो रहे हैं। दोनों राज्यों के किसान अपनी उच्च प्रति हेक्टेयर उपज दर (High Yield Rate) को बनाए रखने के लिए उन्नत बीजों का उपयोग कर रहे हैं।

2. उत्तर प्रदेश (मध्य-पूर्वी भारत):

यूपी में गेहूं, गन्ना और दलहन (दालों) की खेती बड़े पैमाने पर होती है। रबी की फसलों की बुवाई व्यापक रूप से हुई है। राज्य सरकार किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरक सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है। दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिसका उद्देश्य किसानों को फसल विविधीकरण (Crop Diversification) के लिए प्रेरित करना है।

3. राजस्थान (पश्चिमी भारत):

राजस्थान, जो देश में सबसे बड़ा कृषि जोत आकार (Average landholding size) रखता है, मुख्य रूप से बाजरा, सरसों और दलहन का उत्पादन करता है। यहाँ की कृषि वर्षा-आधारित होने के कारण, किसान कम पानी की खपत वाली फसलों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। सरसों और चने की बुवाई अपने अंतिम चरण में है, और किसान मौसम के अनुकूल होने की उम्मीद कर रहे हैं ताकि फसल को पर्याप्त नमी मिल सके।

4. बिहार (पूर्वी भारत):

बिहार में धान (चावल) और मक्का प्रमुख फसलें हैं। हालाँकि, राज्य दलहन उत्पादन में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। यहाँ की उपजाऊ मिट्टी और पर्याप्त जल संसाधन कृषि उत्पादकता के लिए अनुकूल हैं। किसान इस समय अपनी नई रबी फसलों की निगरानी कर रहे हैं, जबकि सरकार द्वारा नवीनतम कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुँचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

मंडियों में भाव की स्थिति और -नाम का विस्तार

देशभर की कृषि उपज मंडियों (APMCs) में भावों में फसल की आवक और बाजार की मांग के अनुसार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। प्रमुख जिंसों (जैसे दालें, तिलहन) के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ऊपर या उसके आसपास बने हुए हैं, जिससे किसानों को उनके उत्पादन का उचित मूल्य मिल रहा है।

सरकार ने -नाम (e-NAM) प्लेटफॉर्म के विस्तार पर जोर दिया है, जिसके तहत 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की 1,410 मंडियों को एकीकृत किया गया है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों को पारदर्शी व्यापार और बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद कर रहा है।

आत्मनिर्भरता और निर्यात में वृद्धि

इन राज्य-स्तरीय गतिविधियों का समग्र परिणाम भारतीय कृषि की मजबूत नींव को दर्शाता है। उच्च उत्पादन स्तर के कारण भारत दूध और दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और गेहूं तथा चावल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बना हुआ है। सरकार की प्रोत्साहन नीतियों के कारण कृषि निर्यात में भी लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे भारतीय कृषि उत्पाद वैश्विक बाजारों में अपनी जगह बना रहे हैं।

यह राष्ट्रीय परिदृश्य दर्शाता है कि देश के कोने-कोने में किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाकर और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर कृषि को केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश के आर्थिक विकास का इंजन बना रहे हैं।

 


Post a Comment

0 Comments