उत्तर-पूर्व में शांति का नया सवेरा: मेघालय-असम सीमा विवाद पर राज्यपाल का 'पीस रोडमैप'; सहयोग और संवाद पर जोर

 

शिलॉन्ग | उत्तर-पूर्व संवाददाता | 27 जनवरी 2026

उत्तर-पूर्व भारत के दो महत्वपूर्ण राज्यों, मेघालय और असम के बीच दशकों से चले रहे सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में आज एक बड़ी उम्मीद जगी है। मेघालय के राज्यपाल ने गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों के बाद एक विशेष संबोधन में घोषणा की कि दोनों राज्य सरकारें अब "झड़प नहीं, बल्कि सहयोग" (Cooperation over Conflict) के सिद्धांत पर काम करेंगी। राज्यपाल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीमावर्ती क्षेत्रों में हाल के महीनों में छिटपुट तनाव की खबरें आई थीं।

1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 50 साल पुराना विवाद

मेघालय और असम के बीच विवाद की जड़ें 1972 में छिपी हैं, जब मेघालय को असम से अलग कर एक पूर्ण राज्य बनाया गया था।

  • विवादित क्षेत्र: दोनों राज्यों के बीच कुल 884.9 किलोमीटर लंबी सीमा है। बंटवारे के समय से ही 12 मुख्य क्षेत्रों (जैसे ताराबारी, गिज़ांग, हाहिम, लोंग्पीह, मुकरोह आदि) को लेकर विवाद बना हुआ है।
  • दावे और प्रतिदावे: मेघालय इन क्षेत्रों को ऐतिहासिक और जातीय आधार पर अपना मानता है, जबकि असम 1972 के प्रशासनिक मानचित्र (Maps) का हवाला देता है।

2. राज्यपाल का संबोधन: "संवाद ही एकमात्र समाधान"

राज्यपाल ने शिलॉन्ग में प्रशासनिक अधिकारियों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि बल प्रयोग से केवल दूरियां बढ़ती हैं।

  • सकारात्मक संकेत: राज्यपाल ने मुख्यमंत्री स्तर की वार्ता के दूसरे चरण (Phase-2) की प्रगति पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि "हमारा लक्ष्य केवल जमीन का बंटवारा नहीं, बल्कि वहां रहने वाले लोगों के दिलों को जोड़ना है।"
  • विकास पर ध्यान: उन्होंने सुझाव दिया कि विवादित क्षेत्रों को 'नो-मैन्स लैंड' मानने के बजाय वहां 'संयुक्त विकास क्षेत्र' (Joint Development Zones) बनाया जाना चाहिए, जहाँ दोनों राज्य मिलकर सड़क, स्कूल और अस्पताल बनवाएं।

3. 'मुकरोह कांड' से लिया सबक

राज्यपाल के इस शांति संदेश के पीछे नवंबर 2022 में हुई मुकरोह (Mukroh) हिंसा जैसी घटनाओं का प्रभाव साफ दिखाई देता है, जिसमें गोलीबारी के दौरान 6 लोगों की जान चली गई थी।

  • सीख: उस घटना के बाद से ही दोनों राज्यों ने महसूस किया कि सीमा पर पुलिस की तैनाती बढ़ाने से ज्यादा जरूरी 'विश्वास बहाली' (Confidence Building) है।
  • बदलाव: अब सीमावर्ती थानों के बीच 'हॉटलाइन' स्थापित की गई है ताकि किसी भी छोटी घटना को बड़े विवाद में बदलने से रोका जा सके।

4. दूसरे चरण (Phase-2) की चुनौतियां और तथ्य

मार्च 2022 में हस्ताक्षरित ऐतिहासिक समझौते (Phase-1) में 12 में से 6 विवादित क्षेत्रों को सुलझा लिया गया था। अब बाकी बचे 6 क्षेत्रों पर चर्चा जारी है, जो अधिक जटिल हैं:

  1. लोंग्पीह (Lampi): यह सबसे संवेदनशील क्षेत्र है, जहाँ अक्सर स्थानीय लोगों के बीच टकराव होता है।
  2. क्षेत्रीय समितियां: दोनों राज्यों ने मंत्रियों के नेतृत्व में क्षेत्रीय समितियां बनाई हैं, जो गांव-गांव जाकर लोगों की राय (Public Opinion) ले रही हैं।
  3. संवैधानिक मर्यादा: विवाद को सुलझाने के लिए सर्वे ऑफ इंडिया (Survey of India) की तकनीकी मदद ली जा रही है।

5. स्थानीय संगठनों और नागरिक समाज की भूमिका

राज्यपाल ने विशेष रूप से नागरिक संगठनों (जैसे KSU और असम के छात्र संगठन) से शांति बनाए रखने की अपील की है।

  • राजनीतिक प्रभाव: सीमा विवाद मेघालय की राजनीति में एक भावनात्मक मुद्दा है। राज्यपाल ने स्थानीय नेताओं को आगाह किया कि वे इसे राजनीतिक लाभ के लिए 'हथियार' बनाएं।
  • रोजगार की उम्मीद: सीमा पर शांति होने से पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। मेघालय से असम होकर गुजरने वाले ट्रकों और पर्यटकों के लिए सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है, जिसे सुलझाने का संकल्प लिया गया है।

6. विशेषज्ञों का विश्लेषण: राष्ट्रीय सुरक्षा और 'एक्ट ईस्ट' नीति

रक्षा और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर-पूर्व में राज्यों के बीच आंतरिक शांति, भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' (Act East Policy) के लिए अनिवार्य है।

  • सुरक्षा: यदि असम और मेघालय के बीच तनाव बना रहता है, तो इसका फायदा उग्रवादी गुट (जैसे ULFA या GNLA के अवशेष) उठा सकते हैं।
  • स्थिरता: राज्यपाल का यह आश्वासन केंद्र सरकार के उस लक्ष्य के अनुरूप है, जिसमें 2026 तक उत्तर-पूर्व के सभी राज्यों के बीच सीमा विवादों को पूरी तरह समाप्त करने की योजना है।

असम-मेघालय सीमा वार्ता: वर्तमान स्थिति (2026)

क्षेत्र की श्रेणी

स्थिति

मुख्य मुद्दा

प्रथम चरण (6 क्षेत्र)

सुलझ गए (2022)

ताराबारी, गिज़ांग, हाहिम आदि।

द्वितीय चरण (6 क्षेत्र)

वार्ता जारी (2025-26)

लोंग्पीह, मुकरोह, ब्लॉक-1 और 2

समाधान का आधार

ऐतिहासिक साक्ष्य और जनमत

स्थानीय लोगों की इच्छा को प्राथमिकता।

भविष्य का लक्ष्य

दिसंबर 2026

पूर्ण सीमा सीमांकन (Demarcation)


7. निष्कर्ष: भविष्य की राह

राज्यपाल का बयान केवल एक औपचारिक घोषणा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक दिशा-निर्देश है। मेघालय और असम के बीच 'सहयोग' का अर्थ है पूरे उत्तर-पूर्व के लिए विकास के द्वार खोलना। हालांकि, जमीनी हकीकत अब भी जटिल है, लेकिन दोनों राज्यों की 'सॉफ्ट बॉर्डर' नीति और विकासोन्मुखी सोच एक स्थायी समाधान की ओर इशारा कर रही है।

ब्रेकिंग अपडेट: अगले सप्ताह दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच गुवाहाटी में 'फेज-2' की निर्णायक बैठक होने की संभावना है, जिसमें कुछ और गांवों के हस्तांतरण पर अंतिम मुहर लग सकती है। 

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