सरकार
द्वारा सेना, नौसेना और वायुसेना के
आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान
दिया जा रहा है।
इसके साथ ही डिफेंस टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी और स्पेस डिफेंस जैसे नए क्षेत्रों का
तेजी से विस्तार हो
रहा है। इन क्षेत्रों में
प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता भविष्य
में कई गुना बढ़ने
वाली है। यही कारण है कि रक्षा
शिक्षा संस्थानों की भूमिका पहले
से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
भविष्य
की रक्षा शिक्षा केवल शारीरिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं
रहेगी, बल्कि इसमें तकनीकी
ज्ञान,
रिसर्च,
डेटा
एनालिसिस
और मैनेजमेंट स्किल्स की भी बड़ी
भूमिका होगी। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA) और अन्य रक्षा
प्रशिक्षण संस्थानों के साथ-साथ
अब निजी और तकनीकी संस्थान
भी डिफेंस स्टडीज़, साइबर वॉरफेयर और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग
जैसे कोर्स शुरू कर रहे हैं।
इससे छात्रों को रक्षा क्षेत्र
में प्रवेश के नए रास्ते
मिलेंगे।
रक्षा
नौकरियों की मांग केवल
वर्दीधारी सेवाओं तक सीमित नहीं
रहेगी। आने वाले समय में डिफेंस
मैन्युफैक्चरिंग,
रिसर्च
एंड
डेवलपमेंट
(R&D), रक्षा
उपकरण
निर्माण,
लॉजिस्टिक्स,
मेंटेनेंस
और स्टार्टअप सेक्टर में भी लाखों रोजगार
के अवसर पैदा होने की संभावना है।
‘मेक इन इंडिया’ और
‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत भारत
स्वदेशी हथियार और रक्षा उपकरण
विकसित कर रहा है,
जिससे इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों
की मांग तेजी से बढ़ेगी।
सरकार
द्वारा युवाओं को रक्षा क्षेत्र
से जोड़ने के लिए नई
नीतियां और योजनाएं भी
लाई जा रही हैं।
अग्निपथ
योजना
जैसी पहलों ने युवाओं के
बीच रक्षा सेवाओं के प्रति रुचि
को बढ़ाया है। इसके साथ ही रक्षा क्षेत्र
में स्किल डेवलपमेंट और इंडस्ट्री-अकैडमी
सहयोग को भी बढ़ावा
दिया जा रहा है,
ताकि छात्रों को पढ़ाई के
साथ व्यावहारिक अनुभव मिल सके।
विशेषज्ञों
का कहना है कि भविष्य
में रक्षा शिक्षा और नौकरियों की
मांग केवल संख्या के आधार पर
नहीं, बल्कि कौशल
और गुणवत्ता के आधार पर
तय होगी। ऐसे में युवाओं को अभी से
विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग, गणित (STEM), साइबर सुरक्षा और रणनीतिक अध्ययन
जैसे विषयों पर ध्यान देना
होगा।
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