गांधीनगर, 6 जनवरी 2026:
गुजरात के गांधीनगर में टाइफायड के मामलों में अचानक वृद्धि देखी जा रही है, जिससे नागरिकों में चिंता का माहौल है और स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। शहर के कई हिस्सों में पानी में संदिग्ध संदूषण की वजह से यह बीमारी फैलने का अंदेशा जताया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में 88 से अधिक लोग टाइफायड के लक्षणों के साथ नागरिक अस्पताल और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज के लिए लाए गए हैं। उपचाराधीन मरीजों में अधिकांश बच्चे और किशोर हैं, हालांकि किसी के गंभीर हालत में होने की खबर नहीं मिली है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए गांधीनगर नगर निगम (GMC) ने निगरानी बढ़ा दी है और जिले के स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि की गई है। निगम के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने आसपास के क्षेत्रों के पानी की आपूर्ति की जांच की है और 31 पाइपलाइन लीक को भी तुरंत ठीक कराया गया है। सभी 531 नमूनों में क्लोरिनेशन परीक्षण के दौरान पानी पीने योग्य पाया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि स्थिति नियंत्रण में है।
हालाँकि महामारी जैसी स्थिति नहीं है, अधिकारियों का कहना है कि पानी की पाइपलाइन लीक जैसी समस्याओं के कारण पानी में बैक्टीरिया शामिल हो सकते हैं, जिससे टाइफायड जैसी बिमारियाँ फैल सकती हैं। GMC ने सार्वजनिक चेतावनी भी जारी की है कि नागरिक जब तक पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक बोतलबंद पानी या उबालकर पानी पीने को प्राथमिकता दें।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
टाइफायड बुखार एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो साफ़ पानी और स्वच्छता की कमी के कारण फैलता है। यह बीमारी बुखार, पेट दर्द, सिरदर्द और भूख कम होने जैसे लक्षणों के साथ होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संक्रमण आमतौर पर दूषित पानी या खाद्य पदार्थ खाने से फैलता है, और समय पर उपचार के बिना गंभीर समस्या का कारण बन सकता है।
प्राथमिक स्वास्थ्य सलाह में कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, दस्त या कमजोरी जैसे लक्षण दिखें, तो उन्हें तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पर जांच करानी चाहिए। साथ ही, पानी को उबालकर या फिल्टर करके पीना चाहिए ताकि संक्रमण का खतरा कम हो।
देश के दूसरे स्वास्थ्य मुद्दे भी जारी
गांधीनगर की यह स्थिति ऐसे समय पर सामने आई है जब देश ने पिछले कुछ सालों में कई स्वास्थ्य चुनौतियाँ देखी हैं। उदाहरण के तौर पर, भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवा का उपचार गैप 80–85% तक बताया गया है, जो गंभीर चिंता का विषय है और विशेषज्ञ लगातार इस पर ध्यान देने का आग्रह कर रहे हैं।
साथ ही, दुनिया भर की तरह भारत में रुबेला और खसरा निरीक्षण कार्यक्रम जारी हैं, और देश 2026 तक खसरा-रुबेला को मात देने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।
विशेषज्ञ सुझाव
- स्वच्छ पानी का उपयोग: स्थानीय प्रशासन द्वारा निरीक्षित स्रोतों से ही पानी पीया जाना चाहिए।
- व्यक्तिगत स्वच्छता: हाथ धोने की आदत, उबला पानी और साफ़-सुथरी सब्ज़ियाँ खाना।
- लक्षणों पर ध्यान: लगातार बुखार, कमजोरी या पेट दर्द होने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
- सामुदायिक जागरूकता: लोगों को यह जानकारी देना आवश्यक है कि टाइफायड जैसे रोगों से बचाव में स्वच्छता और निगरानी अहम भूमिका निभाती है।
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