शिक्षा और रोज़गार समाचार: पंजाब में 61,000 सरकारी नौकरियाँ, कर्नाटक CET तिथि घोषित, और कौशल आधारित रोज़गार में उछाल
नई दिल्ली | एजुकेशन & जॉब्स डेस्क
देश भर में शिक्षा और रोज़गार के परिदृश्य में तेज़ी से बदलाव आ रहे हैं। एक ओर जहां राज्य सरकारें बड़ी संख्या में सरकारी नियुक्तियाँ कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर तकनीकी कौशल पर आधारित रोज़गार के अवसर भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं। इन घटनाक्रमों से स्पष्ट होता है कि युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार हो रहा है, लेकिन शिक्षा और रोज़गार की ज़रूरतों के बीच तालमेल बिठाना अब भी एक चुनौती है।
पंजाब में रोज़गार रिकॉर्ड: 61,000 सरकारी नौकरियाँ वितरित
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य के युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों के दौरान उनके प्रशासन ने 61,281 सरकारी नौकरियाँ प्रदान की हैं। इन नियुक्तियों में सबसे बड़ा हिस्सा शिक्षा विभाग का रहा है, जिससे राज्य के शैक्षिक ढांचे को मजबूती मिली है।
हाल ही में एक समारोह में, 385 विशेष शिक्षकों, 157 प्राथमिक शिक्षकों, आठ प्रिंसिपल और 56 अन्य कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। मुख्यमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि ये सभी नियुक्तियाँ मेरिट, पारदर्शिता और निष्पक्ष चयन के आधार पर की गई हैं, जो सरकारी भर्ती प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने का प्रयास है।
कर्नाटक CET 2026 परीक्षा की तिथि घोषित
कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) ने राज्य के छात्रों के लिए एक बड़ी राहत दी है। CET 2026 (कॉमन एंट्रेंस टेस्ट) की आधिकारिक तिथियाँ घोषित कर दी गई हैं।
- परीक्षा तिथि: यह महत्वपूर्ण परीक्षा 23 और 24 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी।
- आवेदन प्रक्रिया: इस परीक्षा के लिए आवेदन की प्रक्रिया 17 जनवरी से शुरू होगी।
उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे बिना देर किए जल्द से जल्द आवेदन कर लें और परीक्षा में सफल होने के लिए आवश्यक योग्यता और दस्तावेज़ तैयार रखें।
2026 रोज़गार रिपोर्ट: कौशल आधारित रोज़गार में वृद्धि
हाल ही में जारी India Skills Report 2026 ने देश के रोज़गार परिदृश्य की एक सकारात्मक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में युवाओं की रोज़गारयोग्यता (Employability) बढ़कर 56.35% तक पहुँच गई है। यह पिछले वर्षों की तुलना में एक महत्वपूर्ण उछाल है, जो भारतीय श्रम बाज़ार की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
इस रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष यह है कि रोज़गार-निर्माण मुख्य रूप से कौशल आधारित और तकनीकी क्षेत्रों में हो रहा है। AI, डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में प्रतिभा की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। यह रुझान इस बात का संकेत है कि भारत तकनीकी प्रतिभा के एक मज़बूत वैश्विक पूल के रूप में उभर रहा है।
शिक्षा-रोज़गार के बीच तालमेल की चुनौती
इन सकारात्मक रुझानों के बावजूद, कुछ चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं। शोध और विशेषज्ञों के विश्लेषण बताते हैं कि कई स्नातक और पोस्टग्रेजुएट उम्मीदवार अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरी नहीं पा रहे हैं, जिसे शिक्षा-ओक्यूपेशन मिसमैच (Education-Occupation Mismatch) कहा जाता है। इसका अर्थ है कि शैक्षणिक डिग्री और बाज़ार की वास्तविक ज़रूरतों के बीच एक अंतर है।
वैश्विक संदर्भ में, संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य 8 (Goal 8) भी सभी के लिए समावेशी और टिकाऊ आर्थिक विकास तथा 'Decent Work' को बढ़ावा देने के महत्व पर ज़ोर देता है, जो भारत जैसे देश के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष:
शिक्षा और रोज़गार के क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दोहरी गति देखने को मिल रही है: सरकारी क्षेत्र में पारदर्शिता के साथ अवसर बढ़ रहे हैं, और निजी/तकनीकी क्षेत्र में विशिष्ट कौशल की मांग तेज़ हो रही है। युवाओं को अब केवल डिग्री पर नहीं, बल्कि बाज़ार की मांग के अनुरूप तकनीकी कौशल विकसित करने पर ध्यान देना होगा।
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