मुंबई–वसई/विरार में ₹200 करोड़ का साइबर फ्रॉड रैकेट बेनकाब, 7 आरोपी गिरफ्तार, सरगना दुबई से कर रहा था ऑपरेट

 

मुंबई / वसई-विरार
देश में साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच महाराष्ट्र पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मुंबई, वसई-विरार और कर्नाटक के कई इलाकों में फैले ₹200 करोड़ से अधिक के साइबर धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश किया गया है। इस मामले में पुलिस ने 7 प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह का मुख्य सरगना अब भी दुबई में छिपा हुआ बताया जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह संगठित साइबर अपराध गिरोह देश और विदेश के लोगों को निशाना बनाता था। आरोपी डेटिंग और मैट्रिमोनियल वेबसाइट, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और फर्जी निवेश योजनाओं के ज़रिए लोगों से संपर्क करते थे। विश्वास जीतने के बाद पीड़ितों को अलग-अलग बहानों से बड़ी रकम निवेश करने के लिए उकसाया जाता था।

जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य खुद को कभी सफल बिजनेसमैन, कभी एनआरआई, तो कभी स्टॉक मार्केट एक्सपर्ट बताकर लोगों को जाल में फंसाते थे। शुरुआती निवेश पर मुनाफा दिखाकर भरोसा जमाया जाता था और फिर एक ही बार में बड़ी रकम ठग ली जाती थी। कई मामलों में पीड़ितों से लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक की ठगी की गई।

पुलिस ने मुंबई, वसई-विरार और कर्नाटक में एक साथ छापेमारी कर इस रैकेट का भंडाफोड़ किया। छापेमारी के दौरान कई लैपटॉप, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक दस्तावेज और डिजिटल डेटा बरामद किया गया है। पुलिस का कहना है कि इन इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर ठगी से जुड़े कई और मामलों का खुलासा हो सकता है।

जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि गिरोह का संचालन विदेश से किया जा रहा था। गिरोह का मुख्य सरगना दुबई में बैठकर पूरे नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा था। ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों और क्रिप्टो चैनलों के माध्यम से इधर-उधर भेजा जाता था, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरगना की गिरफ्तारी के लिए संबंधित एजेंसियों से संपर्क किया गया है और कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे ऑनलाइन निवेश, डेटिंग साइट या सोशल मीडिया पर मिलने वाले अज्ञात लोगों पर आंख बंद कर भरोसा न करें। किसी भी स्कीम में पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी जांच करें और संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

यह कार्रवाई देश में बढ़ते साइबर अपराधों के खिलाफ एक अहम कदम मानी जा रही है और इससे ऐसे गिरोहों को कड़ा संदेश गया है कि कानून की पकड़ से कोई भी बच नहीं सकता।

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