दिशा सालियान केस में फिर बड़ा मोड़: FIR को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट के तीखे सवाल, पिता ने लगाए नए गंभीर आरोप

 

मुंबई, 27 अगस्त 2026 | विशेष रिपोर्ट: करीब छह साल पहले हुई सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। बॉम्बे हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई और दिशा के पिता सतीश सालियान की ओर से लगाए गए नए आरोपों ने इस पुराने मामले को दोबारा राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब यह बन गया है कि जब दिशा के पिता उनकी मौत को लेकर हत्या की आशंका जता रहे हैं, तो उनकी शिकायत के आधार पर FIR दर्ज करके जांच क्यों नहीं की गई?

बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी मुंबई पुलिस से इसी मुद्दे पर सवाल किया है। अदालत ने पूछा कि यदि मृतका के पिता परिस्थितियों पर संदेह जताते हुए हत्या की आशंका जाहिर कर रहे हैं तो पुलिस को FIR दर्ज कर जांच करने से किस बात ने रोका। पुलिस का पक्ष है कि मामले में की गई जांचों में दिशा की मौत को आत्महत्या माना गया था।

8 जून 2020 की रात क्या हुआ था?

दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक बहुमंजिला इमारत से गिरने के बाद हुई थी। दिशा मनोरंजन जगत में सेलिब्रिटी मैनेजर के तौर पर काम कर चुकी थीं। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत 14 जून 2020 को हुई थी, यानी दिशा की मौत के केवल छह दिन बाद।

दोनों घटनाओं के बेहद करीब होने के कारण सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में दिशा और सुशांत की मौत को लेकर कई तरह के दावे सामने आए। हालांकि दोनों घटनाओं के बीच आपराधिक संबंध साबित होने का दावा आधिकारिक जांच से स्थापित नहीं हुआ है।

दिशा की मौत के बाद मुंबई पुलिस ने Accidental Death Report (ADR) दर्ज की थी। पुलिस जांच में इसे आत्महत्या का मामला बताया गया। बाद में इस मामले की दोबारा जांच/पूछताछ भी हुई और राज्य की ओर से हाई कोर्ट में कहा गया कि उपलब्ध साक्ष्यों तथा गवाहों के बयानों के आधार पर निष्कर्ष आत्महत्या का ही रहा।

पिता ने खटखटाया बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा

मामले ने तब नया मोड़ लिया जब दिशा के पिता सतीश सालियान ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपनी बेटी की मौत की नए सिरे से जांच की मांग की। उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया कि उनकी बेटी की मौत आत्महत्या नहीं थी।

सतीश सालियान की ओर से अदालत में पेश वकील ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इनमें गैंगरेप और हत्या जैसे आरोप भी शामिल हैं। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये याचिकाकर्ता पक्ष के आरोप हैं और अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं हैं।

याचिका में मामले की CBI जांच और FIR दर्ज किए जाने की मांग की गई है।

हाई कोर्ट ने पूछा—FIR दर्ज करने से किसने रोका?

3 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट की जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजुषा देशपांडे की पीठ ने सुनवाई के दौरान मुंबई पुलिस के सामने महत्वपूर्ण सवाल रखा।

अदालत का मूल सवाल था कि यदि पीड़िता के पिता स्वयं मौत की परिस्थितियों पर संदेह व्यक्त कर रहे हैं और हत्या की आशंका जता रहे हैं, तो पुलिस ने FIR दर्ज करके उन आरोपों की जांच क्यों नहीं की?

यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक मामले को मुख्य रूप से ADR के माध्यम से जांचा गया है।

राज्य की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में जांच की गई थी और दो बार की गई जांच में आत्महत्या का ही निष्कर्ष सामने आया। अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि गवाहों के बयान इस निष्कर्ष का समर्थन करते हैं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी उठे सवाल

सुनवाई के दौरान दिशा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और शरीर पर चोटों को लेकर भी बहस हुई। हाई कोर्ट ने सवाल किया कि इतनी ऊंचाई से गिरने की स्थिति में शरीर पर चोटें क्यों नहीं दिखाई गईं या उनका विवरण किस प्रकार दर्ज किया गया।

राज्य की ओर से कहा गया कि तस्वीरों में सिर पर चोट दिखाई देती है। दूसरी ओर याचिकाकर्ता पक्ष ने तस्वीरों और मेडिकल रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए।

इन परस्पर विरोधी दावों की सत्यता का अंतिम निर्धारण अदालत और किसी सक्षम जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।

परिवार को दस्तावेज नहीं देने पर भी सवाल

मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू जांच से जुड़े दस्तावेज हैं। हाई कोर्ट ने यह भी पूछा कि यदि पुलिस के अनुसार कोई FIR नहीं है और ADR की जांच पूरी हो चुकी है, तो दिशा के पिता को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने में क्या बाधा थी।

याचिकाकर्ता पक्ष का दावा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने में भी कई वर्ष लग गए। अदालत ने ADR और दूसरे संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के मुद्दे पर पुलिस से जवाब मांगा।

24 अगस्त की सुनवाई में नए आरोप

24 अगस्त 2026 को हुई आगे की सुनवाई में सतीश सालियान की ओर से उनके वकील ने पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को लेकर भी गंभीर आरोप अदालत के सामने रखे। याचिकाकर्ता पक्ष ने दावा किया कि शुरुआती जांच और पोस्टमार्टम से जुड़े रिकॉर्ड में कथित रूप से गड़बड़ी की गई थी।

इस दौरान कुछ राजनीतिक और फिल्मी हस्तियों को लेकर भी आरोप लगाए गए। लेकिन यहां यह दोहराना बेहद जरूरी है कि अदालत में किसी पक्ष द्वारा आरोप लगाया जाना और आरोप का न्यायिक रूप से साबित होना दो अलग बातें हैं। इन आरोपों को फिलहाल सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

आदित्य ठाकरे का नाम क्यों चर्चा में?

सतीश सालियान ने अपनी याचिका में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ FIR दर्ज करने और जांच की मांग भी की है। याचिकाकर्ता पक्ष ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

हालांकि किसी व्यक्ति के खिलाफ जांच या FIR की मांग अपने आप में अपराध साबित नहीं करती। संबंधित आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच एजेंसी और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकती है।

यही कारण है कि इस मामले की रिपोर्टिंग में आरोप और स्थापित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है।

क्या अब FIR दर्ज हो गई है?

27 अगस्त 2026 तक उपलब्ध प्रमुख विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि दिशा सालियान की मौत के मामले में पिता द्वारा लगाए गए हत्या और गैंगरेप के आरोपों पर नई FIR दर्ज हो चुकी है

वर्तमान बड़ा घटनाक्रम यह है कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने FIR दर्ज करने पर मुंबई पुलिस से सवाल किया है और पिता FIR तथा नए सिरे से जांच की मांग कर रहे हैं।

इस अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि सोशल मीडिया पर हाई कोर्ट के सवाल को कई बार “FIR दर्जयामर्डर केस दर्जहोने के रूप में पेश किया जा सकता है।

छह साल बाद फिर क्यों चर्चा में आया मामला?

दिशा सालियान की मौत जून 2020 में हुई थी, लेकिन मामले को लेकर सवाल लगातार उठते रहे। अब पिता द्वारा स्वयं अदालत में जाकर पुरानी जांच पर सवाल उठाने और बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा पुलिस से स्पष्टीकरण मांगने के कारण मामला फिर चर्चा के केंद्र में है।

आने वाली सुनवाई इस मामले के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। अदालत के सामने एक तरफ मुंबई पुलिस की पुरानी जांच और आत्महत्या का निष्कर्ष है, जबकि दूसरी तरफ दिशा के पिता की ओर से हत्या की आशंका और जांच में कथित अनियमितताओं के आरोप हैं।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि बॉम्बे हाई कोर्ट FIR दर्ज करने या किसी नई जांच के संबंध में क्या निर्देश देता है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि छह साल पुराना दिशा सालियान मामला एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक बहस के केंद्र में पहुंच गया है। लेकिन अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले अदालत की आगामी कार्यवाही और आधिकारिक जांच के नतीजों का इंतजार करना जरूरी होगा।

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