2026 की शुरुआत में नौकरी बाज़ार की बदली तस्वीर, कुछ सेक्टर में बढ़ी भर्ती तो कुछ नौकरियाँ खतरे में

देश में 2026 की शुरुआत रोजगार के लिहाज़ से मिली-जुली तस्वीर के साथ हुई है। जनवरी माह के आँकड़ों से पता चला है कि व्हाइट-कॉलर नौकरियों में लगभग 3% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो खास तौर पर नॉन-आईटी सेक्टर जैसे बीपीओ/आईटीईएस, हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल और हेल्थकेयर में भर्ती बढ़ने की वजह से संभव हुआ। फ्रेशर्स की भर्ती में भी पिछली साल की तुलना में ठोस बढ़त देखी गई है, खासकर छोटे शहरों और नॉन-मेट्रो मार्केट्स में। पुणे, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों ने भर्ती वृद्धि में मुख्य भूमिका निभाई। यह संकेत देता है कि रोज़गार मंदी के बावजूद कुछ सेक्टर अभी भी सकारात्मक क्षमता दिखा रहे हैं।

सरकारी नौकरी की तरफ़ भी बंपर भर्तियों का सिलसिला जारी है। रेलवे के ग्रुप-D में लगभग 22,195 पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी हो चुका है, जिसमें 10वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। इसी तरह आईएएफ अग्निवीरवायु, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एसबीआई सर्कल बेस्ड ऑफिसर, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के विदेशी विनिमय अधिकारियों और एनसीईआरटी में लाइब्रेरियन/शिक्षण संबन्धित पदों जैसे कई सरकारी अवसर वर्तमान में खुला हैं।

थोड़ा टेक-स्पेसिफिक नजर से देखें तो पीएंडबी अपरेन्टाइस रिक्रूटमेंट 2026 के तहत करीब 5,138 अप्रेंटिस पदों की भर्ती क़रीब है, जो ग्रेजुएट्स और तकनीकी प्रतिभाओं को प्रशिक्षण-आधारित रोजगार का मौका देगा। इसी तरह सी-डीएसी (C-DAC) ने 805 तकनीकी और प्रोजेक्ट इंजीनियर से जुड़ी वैकेंसीज़ निकाली हैं, जो साइबर-सिक्योरिटी, सॉफ़्टवेयर और तकनीकी सहायता क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने में मदद करेंगी।

राज्य-स्तर पर भी रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। प्राइम मेघालय (PRIME Meghalaya) पहल के तहत लगभग 7,000 नई नौकरियाँ सृजित की गई हैं, जो स्टार्ट-अप और मार्केट-ड्रिवन उद्यमों को समर्थन देने के साथ स्थानीय उद्यमिता को भी बढ़ावा दे रही हैं। ऐसी पहल उस युवा वर्ग को आत्म-निर्भर बनाने में मदद कर सकती है जो पारंपरिक नौकरियों के अलावा स्वरोज़गार और स्टार्टअप स्किनरियर भी तलाश रहा है।

लेकिन रोजगार परिदृश्य सिर्फ़ सकारात्मक ही नहीं है। कुछ रिपोर्टें यह संकेत देती हैं कि कई पारंपरिक नौकरियाँ आने वाले वर्षों में खतरे में हैं। उदाहरण के लिए एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 21 तरह की नौकरियाँ — जैसे डेटा एंट्री क्लर्क, बैंक टेलर, रिटेल कैशियर, एडमिन असिस्टेंट और बेसिक आईटी सपोर्ट रोल — ऑटोमेशन और एआई-उन्मुख बदलावों के कारण खत्म हो सकती हैं। हालांकि इससे नई तकनीकी नौकरियों की भी मांग बढ़ेगी, लेकिन यह बदलाव उन लोगों के लिए चौंकाने वाला हो सकता है जो पुराने काम के रोल में हैं।

वैश्विक स्तर पर भी रोजगार के संकेत महत्वपूर्ण हैं। अमेरिका में नई बेरोज़गारी दावा संख्या (weekly jobless claims) अपेक्षा से ज़्यादा बढ़ी है, और नियोक्ताओं ने जनवरी में भारी कटौती की, जो 2009 के बाद किसी जनवरी में सबसे ज़्यादा है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और भर्ती धीमी होने के संकेत देता है।

भारत के लिए यह याद रखना ज़रूरी है कि सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में अवसर हैं, मगर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और कुछ पारंपरिक श्रेणियों में बदलाव भी हो रहा है। सरकारी भर्तियाँ, अप्रेंटिसशिप स्कीम, तकनीकी रोल्स और स्टेट-सिस्टम इंटर्नशिप जैसे विकल्प युवाओं के लिए अच्छा अवसर दे रहे हैं, जबकि स्किल-बिल्डिंग, डिजिटल दक्षता और तकनीकी योग्यता की मांग लगातार बढ़ रही है।

कुल मिलाकर, 2026 के रोजगार बाजार में मिश्रित परिदृश्य है: कुछ सेक्टरों में नौकरियों में वृद्धि हो रही है, वहीं तकनीकी बदलाव पुरानी नौकरियों को चुनौती दे रहे हैं। नौकरी चाहने वालों के लिए अब ज़रूरी है कि वे स्किल-अप, सरकारी और निजी अवसरों पर नजर रखें और प्रतिस्पर्धा-अनुकूल योग्यता हासिल करें ताकि वे मौजूदा और भविष्य के रोजगार बाज़ार में टिक सकें।

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