पोस्ट में बताया जा रहा है कि लिंक पर क्लिक करते ही “सब कुछ अपने आप देख लीजिए” — जैसे कोई बड़ा खुलासा देखने को मिलेगा। लेकिन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के लिंक पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बिना प्रमाणित स्रोत के साझा किए गए लिंक अक्सर भ्रम फैलाने, डाटा चोरी या गलत जानकारी फैलाने के लिए बनाए जाते हैं। “Epstein” जैसे नामों का इस्तेमाल सनसनी पैदा करने के लिए किया जाता है, जो लोगों की जिज्ञासा को भड़काता है और उन्हें बिना सोचे-समझे क्लिक करने के लिए प्रेरित करता है।
साइबर सिक्योरिटी कंसल्टेंट कहते हैं कि जब तक लिंक और उसके कंटेंट की सत्यता विश्वसनीय मीडिया या आधिकारिक एजेंसियों द्वारा पुष्टि नहीं होती, तब तक उस पर क्लिक करना सुरक्षित नहीं माना जाता। खासकर ऐसे लिंक जो किसी भी तरह का “विशेष” दस्तावेज़ दिखाने का दावा करते हैं।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से आम लोगों से दो बातें स्पष्ट की जा रही हैं:
इससे पहले भी कई मामलों में देखा गया है कि ऐसे लिंक फैलाई गई अफ़वाहों, गलत वीडियो, या फर्जी दस्तावेज़ों के पीछे निकलते हैं, जिनका मकसद सिर्फ़ ट्रैफ़िक या क्लिक लेकर लोगों का डेटा खींचना होता है।
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