नई दिल्ली | एजुकेशन डेस्क 3 जनवरी, 2026
आज के दौर में भारतीय युवाओं के बीच एक नारा गूंज रहा है— 'चलो विदेश!' पिछले कुछ सालों में पढ़ाई (Study) और नौकरी (Jobs) के लिए विदेश जाने का ट्रेंड बिजली की रफ्तार से बढ़ा है। बेहतर एजुकेशन सिस्टम, इंटरनेशनल एक्सपोजर और मोटी सैलरी की उम्मीद में हर साल लाखों नौजवान घर छोड़ रहे हैं। कनाडा, अमेरिका, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश आज भी भारतीय छात्रों की पहली पसंद बने हुए हैं।
पढ़ाई का नया ठिकाना: आखिर क्यों बढ़ रहा है क्रेज?
भारत में बढ़ते कॉम्पिटिशन और लिमिटेड सीटों की वजह से अब छात्र विदेशों का रुख कर रहे हैं। वहां की यूनिवर्सिटीज में प्रैक्टिकल लर्निंग और मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर छात्रों को अपनी ओर खींचता है। इसके अलावा, ग्लोबल डिग्री की वैल्यू जॉब मार्केट में इतनी ज्यादा है कि पेरेंट्स भी अपनी जमा-पूंजी बच्चों के भविष्य पर लगाने को तैयार हैं।
कमाई और पढ़ाई: एक साथ दो निशाने
विदेश जाने का सबसे बड़ा आकर्षण वहां मिलने वाली 'पार्ट-टाइम जॉब' की सुविधा है। इससे छात्र न केवल अपना खर्चा निकालते हैं, बल्कि काम करने का अनुभव (Work experience) भी हासिल करते हैं। कोर्स खत्म होने के बाद मिलने वाला 'पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा' उन्हें वहीं सेटल होने का मौका देता है, जो कई युवाओं के लिए सबसे बड़ा सपना है।
स्किल्ड वर्कर्स की भारी डिमांड
सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि आईटी, हेल्थकेयर, नर्सिंग और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टर्स के प्रोफेशनल्स के लिए भी विदेशों में मौकों की भरमार है। भारतीय युवाओं की मेहनत और उनकी स्किल्स का आज पूरी दुनिया लोहा मान रही है। कई देशों की सरकारें अब स्किल्ड इमिग्रेशन को बढ़ावा देने के लिए अपनी नीतियां बदल रही हैं।
वीजा के बदलते नियम और नई मुश्किलें
लेकिन इस सुनहरी तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है। हाल के दिनों में कई देशों ने वीजा नियमों को काफी सख्त (Strict) कर दिया है। बिना सही प्लानिंग के विदेश जाने वाले छात्र अक्सर मुश्किलों में फंस जाते हैं। एक्सपर्ट्स बार-बार चेतावनी दे रहे हैं कि फर्जी एजेंटों के झांसे में न आएं और सारे डॉक्यूमेंट्स की सही जांच-परख करें।
बढ़ता खर्च और कर्ज का बोझ
विदेश में रहना और पढ़ना अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है। ट्यूशन फीस से लेकर रहने-खाने तक के खर्चे कई परिवारों के लिए भारी बोझ बन जाते हैं। ज्यादातर छात्र एजुकेशन लोन लेकर बाहर जाते हैं, और अगर कोर्स के बाद सही जॉब न मिले, तो यह लोन एक बहुत बड़ा मानसिक और आर्थिक दबाव (Financial pressure) बन जाता है।
ब्रेन ड्रेन या ग्लोबल पहचान?
भारत में इस बात पर हमेशा बहस होती है कि देश का टैलेंट बाहर जा रहा है, जिसे 'ब्रेन ड्रेन' कहा जाता है। लेकिन जानकारों का मानना है कि अगर ये युवा वहां से नया हुनर सीखकर वापस भारत लौटें, तो यह देश के विकास के लिए एक बड़ी ताकत बन सकता है।
निष्कर्ष: जोश के साथ होश भी जरूरी
विदेश में पढ़ाई और नौकरी का सपना देखना गलत नहीं है, लेकिन इसके लिए सही जानकारी और पक्की प्लानिंग का होना बहुत जरूरी है। यह सिर्फ एक करियर का फैसला नहीं, बल्कि जिंदगी का एक बड़ा रिस्क है। इसलिए जोश के साथ-साथ जागरूकता (Awareness) और समझदारी ही आपके भविष्य को सुरक्षित बना सकती है।
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