काराकस/न्यूयॉर्क
दक्षिण अमेरिकी राष्ट्र वेनेजुएला इस समय एक अभूतपूर्व संकट की चपेट में है। अमेरिका द्वारा एक संप्रभु राष्ट्र के निर्वाचित राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के कथित "अपहरण" और गिरफ्तारी ने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है। जानकारों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और अमेरिका की "साम्राज्यवादी मानसिकता" का उदाहरण बताया है।
सैन्य हस्तक्षेप या अपहरण?
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी विशेष बलों ने एक विवादास्पद सैन्य अभियान चलाकर राष्ट्रपति मादुरो को हिरासत में लिया। वेनेजुएला सरकार और कई वैश्विक विशेषज्ञों ने इस कार्रवाई को "अवैध" करार दिया है। उनका तर्क है कि किसी दूसरे देश के प्रमुख को इस तरह हिरासत में लेना वैश्विक कूटनीति के बुनियादी सिद्धांतों और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का सीधा अपमान है।
अमेरिका
की वैश्विक
आलोचना
इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय
स्तर पर अमेरिका की कड़ी निंदा हो रही है:
- रूस
और चीन: दोनों देशों ने इसे
"अक्षम्य" बताते हुए कहा है कि अमेरिका विश्व के पुलिसकर्मी की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, जो वैश्विक शांति के लिए खतरा है।
- संप्रभुता
पर हमला: लैटिन अमेरिकी देशों के एक बड़े समूह ने इसे क्षेत्रीय
स्थिरता के लिए खतरा बताया है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई वेनेजुएला के आंतरिक मामलों में सीधा और हिंसक हस्तक्षेप है।
यह लोकतंत्र की रक्षा नहीं, बल्कि एक संप्रभु राष्ट्र की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। अमेरिका
ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों को केवल अपनी सुविधा
के अनुसार
मानता है। — वेनेजुएला सरकार का आधिकारिक बयान
देशभर में आक्रोश, गृहयुद्ध
का खतरा
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा है। लाखों लोग अमेरिका के इस कदम के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। राजधानी काराकस में माहौल बेहद तनावपूर्ण है और प्रदर्शनकारी इसे अमेरिका द्वारा रचित "सत्ता परिवर्तन की साजिश" मान रहे हैं। कई जगहों पर इंटरनेट और बिजली सेवाएं बाधित होने से आम जनता में भारी रोष है।
आर्थिक
और वैश्विक
असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की इस आक्रामक कार्रवाई से न केवल वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में भी भारी अस्थिरता आएगी। अमेरिका द्वारा थोपी गई इस अनिश्चितता ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है।
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