दक्षिण भारत का राजनीतिक घटनाक्रम: केरल में नया गठबंधन और कर्नाटक विधानसभा में टकराव

 

दिनांक: 23 जनवरी, 2026

स्थान: तिरुवनंतपुरम/बेंगलुरु

दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्यों, केरल और कर्नाटक में पिछले 24 घंटों में हुई घटनाओं ने देश का राजनीतिक पारा बढ़ा दिया है। एक ओर केरल में 'ट्वेंटी20' (Twenty20) पार्टी ने एनडीए (NDA) के साथ हाथ मिलाकर चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है, वहीं कर्नाटक में राज्यपाल और सत्ताधारी कांग्रेस के बीच के टकराव ने संवैधानिक संकट जैसी स्थिति पैदा कर दी है।

1. केरल: ट्वेंटी20 और एनडीए का मेल — 'तीसरे विकल्प' की आहट

केरल की राजनीति, जो दशकों से एलडीएफ (LDF) और यूडीएफ (UDF) के बीच घूमती रही है, अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर है। किटैक्स ग्रुप (Kitex Group) समर्थित राजनीतिक दल 'ट्वेंटी20' ने आधिकारिक तौर पर भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने का निर्णय लिया है।

चुनावी समीकरणों पर प्रभाव

·         वोट शेयर में सेंध: ट्वेंटी20 का प्रभाव विशेष रूप से एर्नाकुलम जिले और मध्य केरल में है। हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी ने लगभग 12% वोट शेयर हासिल किया है। एनडीए के साथ आने से यह गठबंधन कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला पैदा करेगा, जिससे पारंपरिक गठबंधन (LDF-UDF) के लिए जीत का अंतर कम हो सकता है।

·         कॉर्पोरेट राजनीति बनाम गठबंधन: साबू एम. जैकब ने गठबंधन की घोषणा करते हुए कहा कि राज्य की 'दुष्ट राजनीति' और विकास विरोधी नीतियों के खिलाफ यह गठबंधन जरूरी था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के विकास मॉडल की प्रशंसा की है।

·         सीटों का गणित: केरल की 140 विधानसभा सीटों में से लगभग 30-40 सीटों पर ट्वेंटी20 और भाजपा का संयुक्त वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभा सकता है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां जीत का अंतर बहुत कम रहता है, वहां यह गठबंधन 'किंगमेकर' की भूमिका में सकता है।

2. कर्नाटक: विधानसभा में भारी हंगामा और राज्यपाल का बहिर्गमन

पड़ोसी राज्य कर्नाटक में स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है। विधानसभा के संयुक्त सत्र के दौरान राज्यपाल थावरचंद गहलोत और कांग्रेस सरकार के बीच सीधा टकराव देखने को मिला।

विवाद की मुख्य वजह

राज्यपाल ने राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए अभिभाषण को पूरा पढ़ने से इनकार कर दिया। उन्होंने केवल पहली और अंतिम दो पंक्तियाँ पढ़ीं और सदन से बाहर निकल गए। राज्यपाल का तर्क था कि अभिभाषण के 11 पैराग्राफों में केंद्र सरकार की नीतियों (विशेषकर MGNREGA को लेकर) की तीखी आलोचना की गई थी, जिसे वे पढ़ने के लिए तैयार नहीं थे।

सदन में हंगामा और कांग्रेस नेता के साथ अड़चन

·         नारेबाजी और 'Shame-Shame': जैसे ही राज्यपाल सदन से बाहर निकले, कांग्रेस विधायकों ने "Shame Shame" के नारे लगाए। सदन में अराजकता का माहौल बन गया और कांग्रेस नेताओं ने इसे संविधान का अपमान बताया।

·         बीके हरिप्रसाद के साथ अड़चन: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ने विधानसभा के गेट पर राज्यपाल को रोकने की कोशिश की और उनसे अपना संवैधानिक कर्तव्य पूरा करने (पूरा भाषण पढ़ने) का आग्रह किया। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों और विधायकों के बीच धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी बनी।

·         विपक्ष (BJP) का रुख: विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कांग्रेस विधायकों के आचरण को 'काला दिन' करार दिया और आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राज्यपाल पर हमला करने की कोशिश की।

3. राजनीतिक निहितार्थ और निष्कर्ष

इन दोनों राज्यों की घटनाएं 2026 के आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा तय कर रही हैं:

1.      केरल में ध्रुवीकरण: ट्वेंटी20 के एनडीए में शामिल होने से 'सेकुलर' बनाम 'विकासवादी' राजनीति की नई बहस शुरू हो गई है। सीपीआई(एम) ने साबू जैकब को 'भाजपा का एजेंट' करार दिया है, जो दर्शाता है कि सत्ताधारी दल इस नए गठबंधन को खतरे के रूप में देख रहा है।

2.      कर्नाटक में संवैधानिक युद्ध: राज्यपाल बनाम सरकार की यह लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकती है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने संकेत दिए हैं कि वे राज्यपाल के 'असंवैधानिक' रवैये के खिलाफ कानूनी सलाह ले रहे हैं।

निष्कर्ष: दक्षिण भारत, जिसे अक्सर भाजपा के लिए एक कठिन किला माना जाता रहा है, वहां अब गठबंधन और टकराव की नई रणनीतियां बन रही हैं। केरल में छोटे दलों का एनडीए की ओर झुकाव और कर्नाटक में केंद्र-राज्य संबंधों का तनाव आने वाले महीनों में भारतीय राजनीति के मुख्य केंद्र बिंदु होंगे।

 

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