स्थान: ढाका/सिलहट
दिनांक: 23 जनवरी, 2026
बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने के डेढ़ साल बाद, देश में 13वें आम चुनाव के लिए आधिकारिक तौर पर बिगुल फूँक दिया गया है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की देखरेख में चुनाव आयोग ने चुनाव चिह्नों का आवंटन कर दिया है, जिसके साथ ही पूरे देश में चुनावी रैलियों और जनसभाओं का दौर शुरू हो गया है।
1. मुख्य
तारीखें और चुनाव का
ढांचा
·
मतदान
की तारीख: 12 फरवरी, 2026।
·
प्रचार
की अवधि: 22 जनवरी से 10 फरवरी (सुबह 7:30 बजे) तक।
·
कुल
सीटें:
300 संसदीय सीटों पर लगभग 2,000 उम्मीदवार
मैदान में हैं।
· रेफरेंडम (जनमत संग्रह): चुनाव के साथ-साथ 'जुलाई चार्टर' पर जनमत संग्रह भी होगा, जिसमें प्रधानमंत्री के कार्यकाल को 10 साल तक सीमित करने जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक सुधार शामिल हैं।
2. प्रमुख
राजनीतिक खिलाड़ी और उनकी रणनीतियाँ
इस
बार के चुनाव में
समीकरण पूरी तरह बदले हुए हैं क्योंकि अवामी
लीग
(Sheikh Hasina's party) इस
दौड़ से बाहर है।
·
BNP (बांग्लादेश
नेशनलिस्ट पार्टी): पार्टी के अध्यक्ष तारिक
रहमान ने सिलहट से
अपने प्रचार अभियान की शुरुआत की
है। 17 साल के निर्वासन के
बाद लौटे रहमान ने इसे "निरंकुश
शासन से मुक्ति" का
चुनाव बताया है।
·
जमात-ए-इस्लामी: अमीर शफीक-उर-रहमान के
नेतृत्व में जमात ने भी ढाका
में शक्ति प्रदर्शन किया है। वे भ्रष्टाचार मुक्त
शासन और समानता का
वादा कर रहे हैं।
· नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP): यह 2024 के छात्र आंदोलन के नेताओं द्वारा बनाई गई नई पार्टी है। वे जमात के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रहे हैं और युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं।
3. चुनाव
की अनोखी विशेषताएं
1.
'नो वोट' (No Vote) की वापसी: चुनाव आयोग ने 'उपरोक्त में से कोई नहीं'
(NOTA) जैसा विकल्प फिर से पेश किया
है।
2.
प्रवासियों का मतदान: बांग्लादेश के इतिहास में
पहली बार विदेश में रहने वाले नागरिक (Expatriates) भी अपने मताधिकार
का प्रयोग कर सकेंगे।
3. सुरक्षा का कड़ा पहरा: 8 लाख से अधिक मतदान अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है और हिंसा की आशंका को देखते हुए सेना को अलर्ट पर रखा गया है।
4. चुनौतियाँ
और अंतरराष्ट्रीय नज़र
अंतरराष्ट्रीय
पर्यवेक्षक, विशेषकर यूरोपीय संघ और पड़ोसी देश
भारत, इस चुनाव पर
करीब से नज़र रखे
हुए हैं। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने राष्ट्र के
नाम अपने संबोधन में कहा है कि, "चाहे
कोई कुछ भी कहे, चुनाव 12 फरवरी को ही होंगे। यह एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और उत्सवपूर्ण माहौल में संपन्न होंगे।"
हालांकि, अवामी लीग की अनुपस्थिति और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर विपक्षी हलकों में अभी भी चिंताएं बनी हुई हैं।
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