मध्य प्रदेश: गणतंत्र दिवस पर छात्रों को कागज़ पर खाना परोसा गया वायरल वीडियो से राज्य में बड़े विवाद की शुरुआत

 

भोपाल/मइथर (मध्य प्रदेश) — 27 जनवरी 2026 की दोपहर एक सोशल मीडिया वीडियो ने देश भर में तहलका मचा दिया, जिसमें मइथर जिले के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) समारोह के दौरान छात्रों को खाना कंप्यूटर प्रिंटेड कागज़ पर परोसा गया दिखाया गया है। इस वीडियो ने इंटरनेट पर तेजी से वायरल होते ही राजनीति, शिक्षा प्रशासन और जनहित की बहस को जन्म दिया है।

क्या हुआ वायरल?

सोशल मीडिया पर साझा हुए वीडियो क्लिप में दिखाया गया है कि
छात्र परंपरागत प्लेटों या पारंपरिक पत्तों की जगह फेंके गए, फटे हुए कागज़ों पर खाने की सर्विंग प्राप्त कर रहे हैं, जिसमें पूरियाँ, सब्जी और खीर जैसी डिशों को चित्रित किया जा रहा है। केवल यह दृश्य देख कर लोगों को हैरानी हुई, बल्कि कई यूजर्स ने इसे छात्रों के साथ अपमानजनक व्यवहार बताया।

कुछ वायरल पोस्ट्स में यह भी दावा किया गया कि छात्र सम्मान समारोह के तौर पर दिए जाने वाले रसोई केविशेष आयोजन वाले भोजनको कागज़ पर परोसने को मज़ाक या उपेक्षा का प्रतीक बताया गया है। यह क्लिप तेजी से सोशल मीडिया ट्रेंड में छा गयी और कई पत्रकारों ने इसे रिपोस्ट किया, जिसके बाद चर्चा राष्ट्रीय स्तर तक फैल गई।

सरकारी प्रतिक्रिया और उच्चस्तरीय जांच

मध्य प्रदेश सरकार ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच आयोग (High-Level Inquiry) गठित करने का आदेश दिया है। सरकार के बयान में कहा गया कि जो भी प्रशासनिक या योजनागत दोष पाए जाएंगे, उसके खिलाफकठोर कार्रवाईकी जाएगी। शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि मिड-डे मील (Mid-Day Meal) योजना के तहत उचित प्लेटें, स्वच्छता और बच्चों की गरिमा का पालन अनिवार्य है

मईहर जिला प्रशासन ने घटना के लिए स्थानीय अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जिला प्रशासन ने कहा कि यहविद्यार्थियों के हित और शिक्षा कल्याण प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है”, और जो भी जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख़्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा नेतृत्व और क्षोभ

स्थानीय शिक्षक संघों और अभिभावकों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। एक अभिभावक ने कहा, “हम अपने बच्चों के भविष्य के लिए पढ़ाई और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश करते हैं, लेकिन यह दृश्य बच्चों की गरिमा के साथ खिलवाड़ जैसा है।शिक्षा विशेषज्ञों ने भी कहा कि ऐसे मामलों से ग्रामीण शिक्षा प्रणालियों पर जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है।

वहीं विपक्षी दलों ने इसे सरकार की प्राथमिकताओं में गड़बड़ी और शिक्षा योजनाओं की निगरानी की कमजोर कड़ी के रूप में पेश किया। उन्होंने मांग की है कि सीबीआई/विशेष जांच एजेंसी को भी मामले में साझेदारी दी जाए, ताकि जांचपारदर्शी और निष्पक्षरहे।

समाज में प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग दो समूहों में बँट गये हैं:

  • एक पक्ष कह रहा है कि यहसरकार की उपेक्षा का प्रतीक हैऔरबाल अधिकारों के उल्लंघनजैसा है।
  • दूसरा वर्ग कह रहा है कि वीडियो को कंटेक्स्ट के बिना फैलाया गया है और शिक्षकों/स्टाफ परतुरंत निष्कर्ष ना निकालेजाना चाहिए।

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