मुंबई | 29 जनवरी 2026
महाराष्ट्र की
राजनीति में
'दादा'
के
नाम
से
मशहूर
अजीत
पवार
केवल
एक
राजनेता नहीं,
बल्कि
एक
कुशल
प्रशासक थे।
उनके
निधन
के
बाद
आज
पूरा
राज्य
उनके
उन
कार्यों को
याद
कर
रहा
है,
जिन्होंने महाराष्ट्र की
तस्वीर
बदल
दी।
वित्त
मंत्री
और
उपमुख्यमंत्री के
रूप
में
उनके
द्वारा
शुरू
की
गई
योजनाएं आज
भी
करोड़ों लोगों
के
जीवन
का
आधार
हैं।
1.
महिला सशक्तिकरण: 'माझी लाड़की बहिन' योजना का मील का पत्थर
अजीत
पवार
के
अंतिम
बजट
(2025-26) की
सबसे
बड़ी
उपलब्धि 'मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना' रही।
- लक्ष्य: राज्य की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को प्रति माह वित्तीय सहायता देना।
- बजट: उन्होंने इसके लिए ₹36,000 करोड़ का भारी-भरकम प्रावधान किया, जो उनके विजन को दर्शाता है कि राज्य की प्रगति महिलाओं की आर्थिक आजादी में छिपी है।
2.
कृषि क्रांति: नार-पार-गिरना और सिंचाई परियोजनाओं का जाल
किसानों के
मसीहा
कहे
जाने
वाले
अजीत
पवार
ने
जल
संसाधन
मंत्रालय संभालते समय
'जल स्वराज्य' का सपना
देखा
था।
- उत्तर
महाराष्ट्र का उद्धार:
₹7,500 करोड़ की नार-पार-गिरना (NPG)
परियोजना के जरिए उन्होंने सूखे क्षेत्रों तक पानी पहुँचाने का बीड़ा उठाया।
- तकनीकी
खेती: उन्होंने
महाराष्ट्र में कृषि के साथ Artificial Intelligence (AI) को जोड़ने की वकालत की, ताकि किसान मौसम और फसल की सटीक जानकारी पा सकें।
3.
इंफ्रास्ट्रक्चर का 'बारामती मॉडल'
अजीत
पवार
का
नाम
आते
ही
बारामती की
सड़कें
और
वहां
की
चकाचौंध याद
आती
है।
उन्होंने बारामती को
एक
'स्मार्ट और ग्रीन सिटी' के रूप
में
विकसित
किया।
- पुणे
मेट्रो विस्तार: पुणे मेट्रो के दूसरे चरण के लिए
₹9,897 करोड़ की मंजूरी दिलाकर उन्होंने शहरी परिवहन की दिशा बदल दी।
- रिंग
रोड और हाईवे: पुणे-शिरूर एलिवेटेड
हाईवे और राज्य के अन्य प्रमुख रिंग रोड प्रोजेक्ट्स उनके 'फास्ट-ट्रैक' निर्णयों के गवाह हैं।
4.
शिक्षा और भविष्य की पीढ़ी
बारामती का
विद्या प्रतिष्ठान संस्थान उनके
शैक्षणिक विजन
का
सबसे
बड़ा
उदाहरण
है।
उन्होंने न
केवल
स्कूलों की
इमारतों पर
ध्यान
दिया,
बल्कि
राजर्षि शाहू महाराज छात्रवृत्ति के
जरिए
हजारों
गरीब
छात्रों के
लिए
उच्च
शिक्षा
के
रास्ते
खोले।
प्रशासनिक शैली: 'नो पेंडेंसी' कल्चर
मंत्रालय के
गलियारों में
यह
चर्चा
आम
थी
कि
अगर
फाइल
'दादा'
के
केबिन
में
गई
है,
तो
उस
पर
निर्णय
तुरंत
होगा।
सुबह
6 बजे
काम
शुरू
करने
वाले
अजीत
पवार
ने
राज्य
प्रशासन में
एक
नई
कार्य
संस्कृति (Work Culture) विकसित की
थी।
"अजीत पवार का बजट भाषण केवल आंकड़ों
का खेल नहीं, बल्कि विकास का रोडमैप होता था। उनकी पकड़ अर्थशास्त्र और जमीन की जरूरतों, दोनों पर समान थी।" — वरिष्ठ
राजनीतिक विश्लेषक
निष्कर्ष
अजीत पवार भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा शुरू की गई ये योजनाएं आने वाले कई दशकों तक महाराष्ट्र की जनता की सेवा करती रहेंगी। बारामती की सड़कों से लेकर मंत्रालय के गलियारों तक, उनकी 'विकास की स्याही' हर जगह मौजूद रहेगी।
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