नई दिल्ली।
भारत ने पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए वायु प्रदूषण माप उपकरणों के परीक्षण और कैलिब्रेशन के लिए एक अत्याधुनिक राष्ट्रीय प्रयोगशाला का उद्घाटन किया है। यह प्रयोगशाला CSIR–राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL) में स्थापित की गई है, जिसे दुनिया की केवल दूसरी ऐसी मानक प्रयोगशाला बताया जा रहा है। इस पहल से भारत को प्रदूषण माप तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, अब तक देश में उपयोग किए जा रहे कई वायु गुणवत्ता माप उपकरणों की जांच और मानकीकरण के लिए विदेशी प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहना पड़ता था। नई प्रयोगशाला के शुरू होने से यह निर्भरता काफी हद तक समाप्त हो जाएगी और देश में ही उपकरणों की सटीकता की जांच संभव हो सकेगी। इससे समय और लागत दोनों की बचत होगी।
यह प्रयोगशाला खासतौर पर PM2.5, PM10, गैसीय प्रदूषक और अन्य वायु गुणवत्ता मापने वाले सेंसरों की जांच और कैलिब्रेशन के लिए अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण से जुड़े आंकड़ों की विश्वसनीयता तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब माप उपकरण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कैलिब्रेटेड हों। इस नई सुविधा से देश में एक समान और भरोसेमंद डेटा उपलब्ध होगा, जो नीति निर्माण में मददगार साबित होगा।
पर्यावरण मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि भारत जैसे विशाल और तेजी से शहरीकरण वाले देश में वायु प्रदूषण एक गंभीर चुनौती बन चुका है। सटीक डेटा के बिना न तो प्रभावी नीति बनाई जा सकती है और न ही प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों का सही आकलन किया जा सकता है। इस प्रयोगशाला के माध्यम से राज्यों और नगर निकायों को अधिक विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सोच को भी मजबूत करता है। अब देश में निर्मित वायु गुणवत्ता उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों पर परखा जा सकेगा, जिससे भारतीय तकनीक को वैश्विक पहचान मिलने की संभावना बढ़ेगी।
इसके साथ ही यह प्रयोगशाला शोध और प्रशिक्षण का भी केंद्र बनेगी। यहां वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और छात्रों को आधुनिक प्रदूषण मापन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे भविष्य में कुशल मानव संसाधन तैयार होंगे, जो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा सकेंगे।
कुल मिलाकर, वायु प्रदूषण माप उपकरणों के लिए इस राष्ट्रीय प्रयोगशाला का उद्घाटन भारत के पर्यावरण प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे न केवल प्रदूषण से निपटने में मदद मिलेगी, बल्कि स्वच्छ और स्वस्थ भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी नई गति मिलेगी।
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