कर्नाटक की राजनीति में कल (1 फरवरी 2026) को उस समय हलचल तेज़ हो गई, जब मैसूरु में सिंथेटिक ड्रग्स से जुड़े बड़े खुलासे ने राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था और नशा विरोधी नीति को फिर से बहस के केंद्र में ला दिया। पुलिस द्वारा एक किराए के मकान से सिंथेटिक ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध कच्चे माल की बरामदगी के बाद यह मामला केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे तौर पर राज्य की राजनीतिक जिम्मेदारी और प्रशासनिक सख्ती पर सवाल खड़े करने लगा
मैसूरु पुलिस को मिली गुप्त सूचना के आधार पर यंदहली इलाके में की गई इस कार्रवाई में ऐसे रसायन और उपकरण जब्त किए गए, जिनका इस्तेमाल नशीले पदार्थों के निर्माण में किया जा सकता है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि यह मकान एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी के बेटे के नाम पर था, जिससे विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मुद्दा मिल गया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि नशे के नेटवर्क को राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक ढिलाई के कारण बढ़ावा मिल रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मैसूरु के सांसद यदुवीर वाडियार ने राज्य सरकार और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि केंद्रीय नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) समय पर सक्रिय नहीं होता, तो यह ड्रग्स नेटवर्क और गहराई तक फैल सकता था। सांसद ने मुख्यमंत्री से मांग की कि नशे के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स गठित की जाए और दोषियों के खिलाफ बिना किसी राजनीतिक दबाव के कार्रवाई हो ।
वहीं, सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। सरकार के प्रवक्ताओं ने कहा कि राज्य में ड्रग्स के खिलाफ “ज़ीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई गई है और हालिया कार्रवाई इसी नीति का प्रमाण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुँचना गलत होगा और कानून अपना काम करेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में कर्नाटक विधानसभा के भीतर और बाहर जोरदार तरीके से उठेगा। विपक्ष इसे सरकार की विफलता के रूप में पेश करने की कोशिश करेगा, जबकि सरकार इस कार्रवाई को अपनी सख्ती का उदाहरण बताएगी। खासकर शहरी युवाओं में बढ़ते नशे की समस्या को लेकर जनभावना पहले से ही संवेदनशील है, ऐसे में यह मामला राजनीतिक रूप से और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
कुल मिलाकर, कल की यह घटना कर्नाटक की राज्य राजनीति में कानून-व्यवस्था, नशा नियंत्रण और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को फिर से केंद्र में ले आई है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और सरकार की आगे की कार्रवाई तय करेगी कि यह मामला केवल एक पुलिस कार्रवाई बनकर रह जाता है या राज्य की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित होता है।
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