देवास में शराब तस्करी रोकने गए थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत: अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई में गई पुलिस अधिकारी की जान, मुख्य आरोपी गिरफ्तार

 

देवास (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के देवास जिले से सामने आई एक घटना ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, अवैध शराब तस्करी और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अवैध शराब की तस्करी रोकने के लिए रात में कार्रवाई करने पहुंचे खातेगांव थाना प्रभारी निरीक्षक दिलीप कुमार पुरी की एक आयशर ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, ट्रक में बड़ी मात्रा में अवैध शराब ले जाई जा रही थी। वाहन को रोकने और चालक से पूछताछ करने की कोशिश के दौरान चालक ने कथित तौर पर ट्रक आगे बढ़ा दिया, जिसका पिछला पहिया दिलीप पुरी के ऊपर से गुजर गया। गंभीर रूप से घायल अधिकारी को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

इस घटना ने पूरे पुलिस विभाग को झकझोर दिया है। एक तरफ जहां पुलिसकर्मी अवैध कारोबार और अपराधियों के खिलाफ अपनी जान जोखिम में डालकर कार्रवाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस ने पुलिस प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

आधी रात को मिली थी अवैध शराब की सूचना

प्राप्त समाचार रिपोर्टों के अनुसार, 1 और 2 नवंबर 2026 की दरमियानी रात पुलिस को सूचना मिली थी कि देवास जिले के रास्ते अवैध शराब की एक बड़ी खेप गुजरात की ओर ले जाई जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए देवास पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के निर्देश पर पुलिस की कई टीमें सक्रिय की गईं।

खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी भी अपनी टीम के साथ इस कार्रवाई में शामिल थे। पुलिस ने इंदौर-बैतूल हाईवे पर संदिग्ध वाहनों की निगरानी शुरू की। इसी दौरान संदलपुर फाटा के पास एक संदिग्ध आयशर वाहन दिखाई दिया। पुलिस टीम ने वाहन को रोककर उसकी जांच करने का प्रयास किया।

बताया गया कि वाहन चालक से बाहर आने और पूछताछ करने के लिए कहा गया, लेकिन उसने पुलिस की कार्रवाई में सहयोग करने के बजाय वाहन आगे बढ़ा दिया। इसी दौरान दिलीप पुरी ट्रक की चपेट में आ गए और वाहन का पिछला पहिया उनके ऊपर से गुजर गया।

करीब दो घंटे तक चला उपचार, नहीं बच सकी जान

हादसे के बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने घायल थाना प्रभारी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के लिए सीपीआर सहित अन्य आपातकालीन उपचार किए। करीब दो घंटे तक प्रयास किए जाने के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

एक पुलिस अधिकारी की इस तरह ड्यूटी के दौरान मौत से पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी सक्रिय हुए और मामले की जांच तथा आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गईं।

ट्रक में मिली 1,800 लीटर से अधिक अवैध शराब

पुलिस की जांच में सामने आया कि जिस आयशर वाहन को रोकने की कोशिश की जा रही थी, उसमें 1,800 लीटर से अधिक शराब रखी हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, शराब को वाहन में बनाए गए विशेष गुप्त हिस्सों में छिपाकर ले जाया जा रहा था।

प्रारंभिक जांच में शराब की खेप को हरदा से गुजरात तक पहुंचाने की तस्करी की कड़ी सामने आई। इस मामले ने केवल एक ट्रक चालक की भूमिका ही नहीं, बल्कि शराब की आपूर्ति, परिवहन और वितरण से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच को महत्वपूर्ण बना दिया।

मुख्य आरोपी गजेंद्र उर्फ अक्कू रावत गिरफ्तार

घटना के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया था। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए अलग-अलग जिलों में टीमें भेजीं। मुख्य आरोपी की पहचान गजेंद्र उर्फ अक्कू रावत के रूप में हुई।

4 नवंबर 2026 को प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने उसे आलीराजपुर जिले से हिरासत में लिया। देवास लाते समय आरोपी ने कथित तौर पर पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस की कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी और उसे उपचार के लिए देवास जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

देवास के पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने आरोपी के पकड़े जाने और उसके घायल होने की जानकारी दी। पुलिस इस मामले में अन्य आरोपियों और शराब तस्करी के पूरे नेटवर्क की भूमिका की भी जांच कर रही है।

तस्करी के नेटवर्क पर भी पुलिस की कार्रवाई

इस मामले में जांच केवल वाहन चालक तक सीमित नहीं रखी गई है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने कथित तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया है। इनमें राहुल जायसवाल, विजय राव और वाहन उपलब्ध कराने के आरोपी कैरम सिंह चांगोद के नाम सामने आए हैं।

पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क की भूमिका शराब की आपूर्ति से लेकर उसे दूसरे राज्यों तक पहुंचाने में जांच के दायरे में है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शराब कहां से खरीदी गई, किन लोगों ने उसकी व्यवस्था की और किन रास्तों से उसे गुजरात भेजा जाना था।

प्रशासनिक व्यवस्था पर भी उठे सवाल

घटना के बाद अवैध शराब के कारोबार पर नियंत्रण रखने वाली प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ समाचार रिपोर्टों में हरदा की तीन शराब दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए जाने और आबकारी विभाग के अधिकारियों तथा कर्मचारियों पर कार्रवाई की जानकारी दी गई है।

यह सवाल महत्वपूर्ण है कि यदि अवैध शराब का कारोबार इतने बड़े स्तर पर संचालित हो रहा था, तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली? क्या नियमित निगरानी और जांच की व्यवस्था पर्याप्त थी? क्या तस्करी के इस नेटवर्क को पहले भी संरक्षण या किसी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही का लाभ मिलता रहा था?

इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा। किसी भी अधिकारी या राजनीतिक व्यक्ति को बिना प्रमाण दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होना भी उतना ही आवश्यक है।

क्या पुलिसकर्मी अपने ही कर्तव्य के दौरान सुरक्षित नहीं?

दिलीप पुरी की मौत केवल एक परिवार की व्यक्तिगत क्षति नहीं है, बल्कि यह पुलिसकर्मियों की कार्यस्थल सुरक्षा और अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

जब कोई पुलिस अधिकारी अवैध कारोबार रोकने के लिए सड़क पर उतरता है, तो उसे पर्याप्त सुरक्षा संसाधन, सहयोग और प्रभावी रणनीति मिलना आवश्यक है। विशेषकर शराब तस्करी, संगठित अपराध और अंतरराज्यीय नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

देवास की यह घटना याद दिलाती है कि कानून लागू करने वाले अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी सरकार और प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

तस्वीरों में दिखा पुलिस विभाग का दर्द

सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीरों में देवास के पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा को दिवंगत निरीक्षक दिलीप पुरी के पार्थिव शरीर को कंधा देते हुए और भावुक होते हुए दिखाया जा रहा है। इन तस्वीरों ने पुलिस विभाग के भीतर इस घटना से पैदा हुए दुख और संवेदना को सामने रखा है।

हालांकि तस्वीरों के संदर्भ और समय की स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक है, लेकिन इस घटना से पुलिस विभाग में शोक और आक्रोश का माहौल स्पष्ट रूप से सामने आया है।

अब सबसे बड़ा सवाल: दिलीप पुरी को कब मिलेगा न्याय?

दिलीप पुरी की मौत के मामले में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन न्याय की प्रक्रिया केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं होनी चाहिए। पूरे तस्करी नेटवर्क की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ मजबूत कानूनी कार्रवाई और प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है।

यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मामले में किसी प्रभावशाली व्यक्ति या संगठित गिरोह की भूमिका सामने आने पर उसे बचाने का प्रयास न हो। कानून सभी के लिए समान होना चाहिए, चाहे आरोपी कोई सामान्य व्यक्ति हो या किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा प्रभावशाली चेहरा।

एक पुलिस अधिकारी ने अवैध शराब की तस्करी रोकने के लिए अपनी ड्यूटी निभाते हुए जान गंवाई। अब जिम्मेदारी सरकार और पुलिस प्रशासन की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो, पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए और दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिले।

दिलीप पुरी को सच्ची श्रद्धांजलि केवल शोक व्यक्त करने से नहीं, बल्कि अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने और उनके परिवार को न्याय दिलाने से मिलेगी।

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