मक्का तक पहुंचा हूती-सऊदी संघर्ष: ड्रोन इंटरसेप्ट होने के बाद बढ़ा तनाव, जानिए 2016 से 2026 तक की पूरी कहानी

 

रियाद/सना, 17 सितंबर 2026:
यमन में एक दशक से अधिक समय से चल रहा संघर्ष एक बार फिर बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। सऊदी अरब ने कहा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने 15 सितंबर 2026 की शाम मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को मार गिराया, जिसे सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन यमन के हूती आंदोलन द्वारा लॉन्च किया गया ड्रोन बता रहा है। सऊदी अधिकारियों के अनुसार ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही नष्ट कर दिया गया।

लेकिन कहानी का दूसरा पक्ष भी है। हूती आंदोलन ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि उसने मक्का या किसी अन्य इस्लामी पवित्र स्थल को निशाना नहीं बनाया। इस कारण फिलहाल सबसे सटीक तरीके से यही कहा जा सकता है कि सऊदी अरब ने हूतियों पर मक्का की दिशा में ड्रोन भेजने का आरोप लगाया है, जबकि हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया है।

15 सितंबर 2026 की शाम आखिर हुआ क्या?

सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के अनुसार 15 सितंबर की शाम लगभग 6:50 बजे रॉयल सऊदी एयर डिफेंस फोर्सेज ने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। सऊदी पक्ष का कहना है कि ड्रोन पवित्र शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही रोक लिया गया।

इस घटनाक्रम के दौरान मक्का सहित कई इलाकों में सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए। मक्का में खतरे का अलर्ट कुछ समय बाद हटा लिया गया। जेद्दा और ताइफ जैसे शहरों में भी सुरक्षा चेतावनियां जारी हुई थीं।

सऊदी सैन्य गठबंधन ने घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि मक्का और मदीना स्थित इस्लाम के पवित्र स्थलों तथा वहां आने वाले जायरीन की सुरक्षा उसके लिए “रेड लाइन” है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा कि राज्य अपने नागरिकों, निवासियों, पवित्र स्थलों और तीर्थयात्रियों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार रखता है।

हूतियों ने कहा—मक्का हमारा निशाना नहीं

हूती पक्ष ने सऊदी आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। हूती सैन्य सूत्रों और प्रवक्ताओं ने कहा कि यमन की ओर से मक्का या अन्य इस्लामी पवित्र स्थलों को कोई खतरा नहीं है।

हूती प्रवक्ता याह्या सारी ने भी मक्का को निशाना बनाने के आरोप से इनकार किया। हूतियों का दावा है कि मौजूदा हमले सऊदी सैन्य और रणनीतिक ठिकानों के खिलाफ किए जा रहे हैं और वे सऊदी कार्रवाई के जवाब का हिस्सा हैं।

यही अंतर इस पूरे मामले को समझने में महत्वपूर्ण है। ड्रोन को मक्का के दक्षिण में मार गिराए जाने की सूचना सऊदी पक्ष से आई है, लेकिन ड्रोन का अंतिम लक्ष्य मक्का ही था—इस दावे को हूती पक्ष चुनौती दे रहा है।

कहानी 2026 से नहीं, 2016 से शुरू होती है

मक्का से जुड़े ऐसे आरोप पहली बार सामने नहीं आए हैं।

27 अक्टूबर 2016 को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा था कि यमन के सादा प्रांत से एक बैलिस्टिक मिसाइल मक्का क्षेत्र की दिशा में लॉन्च की गई। सऊदी एयर डिफेंस ने मिसाइल को मक्का से लगभग 65 किलोमीटर दूर नष्ट करने का दावा किया था। उस घटना में किसी के घायल होने या जमीन पर नुकसान की सूचना नहीं दी गई थी।

लेकिन उस समय भी हूतियों ने कहा था कि मक्का उनका निशाना नहीं था। हूती पक्ष के अनुसार उसने बुरकान-1 बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी, लेकिन उसका लक्ष्य जेद्दा स्थित किंग अब्दुलअजीज इंटरनेशनल एयरपोर्ट था।

इसलिए 2016 की घटना में भी वही विवाद दिखाई दिया जो 2026 में फिर सामने आया है—सऊदी पक्ष ने मक्का की दिशा में हमले की बात कही, जबकि हूतियों ने पवित्र शहर को लक्ष्य बनाने से इनकार किया।

मामला इतना गंभीर था कि संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन यमन विशेष दूत इस्माइल औल्द शेख अहमद ने 31 अक्टूबर 2016 को सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए मक्का क्षेत्र को निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट को एक खतरनाक घटनाक्रम बताया था।

2017 में फिर उठा मक्का का नाम

इसके बाद 27 जुलाई 2017 की एक बैलिस्टिक मिसाइल घटना को भी सऊदी अरब मक्का को निशाना बनाने की कोशिश के रूप में देखता है। 2026 की ताजा घटना के बाद सऊदी सैन्य प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने इसी 2017 की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा ड्रोन घटना मक्का की ओर हूतियों की दूसरी कोशिश है।

हालांकि हूती आंदोलन लंबे समय से कहता रहा है कि उसके निशाने पर इस्लामी पवित्र स्थल नहीं बल्कि सऊदी सैन्य, हवाई अड्डे और रणनीतिक प्रतिष्ठान रहे हैं।

2019 में फिर मक्का प्रांत में मिसाइल अलर्ट

मई 2019 में एक बार फिर तनाव बढ़ा। सऊदी अरब ने कहा कि उसकी सेना ने मक्का प्रांत में हूतियों द्वारा दागी गई दो मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। सऊदी मीडिया की कुछ रिपोर्टों में इनमें से एक मिसाइल को मक्का की दिशा में बताया गया।

हूतियों ने फिर इनकार किया कि उनका उद्देश्य इस्लाम के सबसे पवित्र शहर को निशाना बनाना था। उस समय सऊदी गठबंधन ने जेद्दा और ताइफ के प्रतिबंधित क्षेत्रों में हवाई लक्ष्यों का पता लगाने और उनसे निपटने की बात कही थी।

इस तरह 2016, 2017 और 2019 में मक्का या उसके आसपास के क्षेत्र को लेकर आरोप सामने आए, लेकिन हूतियों ने बार-बार कहा कि वे मक्का को लक्ष्य नहीं बना रहे थे।

सितंबर 2026 में अचानक इतना बड़ा टकराव क्यों?

ताजा घटना को केवल एक ड्रोन हमले के रूप में देखना अधूरा होगा। इसके पीछे सऊदी अरब और हूतियों के बीच दोबारा तेजी से बढ़ता सैन्य संघर्ष है।

यमन का युद्ध 2014 के बाद तेजी से बढ़ा था, जब हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को वहां से हटना पड़ा। मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व में एक सैन्य गठबंधन यमन युद्ध में उतरा।

इसके बाद वर्षों तक यमन में भारी लड़ाई, हवाई हमले, मिसाइल हमले और मानवीय संकट चलता रहा।

अप्रैल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए संघर्ष-विराम के बाद सऊदी अरब और हूतियों के बीच सीमा पार हमलों में बड़ी कमी आई। लेकिन 2026 में हालात फिर तेजी से बिगड़ गए।

8 सितंबर 2026: संघर्ष ने लिया नया रूप

8 सितंबर 2026 को हूतियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्सों में बड़े हमले किए। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अधिकारियों ने बताया कि अब्हा, खामिस मुशैत, जाज़ान और नजरान में हमलों के बाद कुल 73 लोग घायल हुए। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए गए।

ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर भी असर पड़ा और कुछ स्थानों पर आग लगी। इस घटना ने संकेत दिया कि वर्षों तक अपेक्षाकृत शांत रही सऊदी-हूती सीमा एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर जा रही है।

इसके बाद हूतियों ने सऊदी ठिकानों पर और मिसाइल तथा ड्रोन हमलों के दावे किए। उन्होंने यानबू के महत्वपूर्ण रेड सी ऑयल पोर्ट और खामिस मुशैत स्थित एयरबेस पर हमले करने की बात भी कही।

हूतियों ने एक सऊदी F-15 लड़ाकू विमान गिराने का दावा भी किया, लेकिन रॉयटर्स के अनुसार उस दावे के समर्थन में तत्काल स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया था।

सऊदी अरब के यमन पर हवाई हमले

दूसरी तरफ यमन में हूती ठिकानों पर भी भारी हवाई कार्रवाई हुई। हूती प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया कि एक सप्ताह में यमन पर करीब 450 हवाई हमले किए गए।

सऊदी समर्थित यमन सरकार से जुड़े अधिकारियों ने स्वीकार किया कि उनकी और सऊदी अरब की सेनाएं हूती ठिकानों के खिलाफ हवाई कार्रवाई कर रही थीं, हालांकि रॉयटर्स के अनुसार रियाद ने उस समय स्वयं सभी हमलों की विस्तृत पुष्टि नहीं की थी।

यानी यह एकतरफा हमला नहीं बल्कि तेजी से फैलता सैन्य टकराव है, जिसमें दोनों ओर से मिसाइल, ड्रोन और हवाई शक्ति का इस्तेमाल हो रहा है।

बाब अल-मंदेब और तेल मार्ग क्यों महत्वपूर्ण हैं?

इस संघर्ष का असर सिर्फ सऊदी अरब और यमन तक सीमित नहीं है।

हूती लड़ाकों ने यमन के रेड सी तट और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास अपनी स्थिति मजबूत की है। बाब अल-मंदेब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।

इसके दूसरी ओर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पहले से दबाव में है। सितंबर 2026 में सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन भी प्रभावित हुई, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी। रॉयटर्स के अनुसार लंबे समय तक पाइपलाइन बंद रहने की स्थिति में वैश्विक तेल आपूर्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा प्रभावित हो सकता है।

यही कारण है कि मक्का के पास ड्रोन की घटना केवल धार्मिक या सऊदी घरेलू सुरक्षा का विषय नहीं है; यह व्यापक मध्य-पूर्व संघर्ष, लाल सागर की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजार से भी जुड़ गई है।

मुस्लिम देशों की प्रतिक्रिया

मक्का की धार्मिक संवेदनशीलता के कारण घटना की अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी तेज रही।

Organization of Islamic Cooperation (OIC) ने मक्का से जुड़ी घटना और सऊदी अरब पर अन्य हमलों की निंदा की। संगठन ने पवित्र स्थलों की सुरक्षा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और सऊदी अरब के साथ एकजुटता व्यक्त की।

पाकिस्तान, कुवैत और यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार सहित कई पक्षों ने भी घटना की निंदा की।

भारत ने भी मक्का के निकट ड्रोन की घटना पर चिंता व्यक्त की और पवित्र स्थलों की सुरक्षा तथा क्षेत्रीय शांति के महत्व पर जोर दिया।

17 सितंबर तक ताजा स्थिति

17 सितंबर 2026 तक सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। गुरुवार को सऊदी अधिकारियों ने बताया कि ताइफ प्रांत में इंटरसेप्ट किए गए एक हूती ड्रोन का मलबा गिरने से एक व्यक्ति की मौत और दो लोग घायल हुए। मृतक को यमनी नागरिक बताया गया, जबकि घायलों में एक सऊदी और एक पाकिस्तानी नागरिक शामिल बताए गए। इमारतों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा।

इस बीच यमन में सैन्य कार्रवाई जारी है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर संघर्ष बढ़ाने का आरोप लगा रहे हैं।

निष्कर्ष: मक्का की घटना ने क्यों बढ़ाई दुनिया की चिंता?

15 सितंबर की घटना इसलिए असाधारण रूप से संवेदनशील है क्योंकि मक्का किसी सामान्य शहर की तरह नहीं है। यहां काबा और मस्जिद अल-हरम स्थित हैं और दुनिया भर के मुसलमान नमाज के दौरान काबा की दिशा में रुख करते हैं। हर वर्ष लाखों लोग हज और उमरा के लिए यहां पहुंचते हैं।

इसलिए मक्का के आसपास किसी भी मिसाइल या ड्रोन का पहुंचना—चाहे उसके वास्तविक लक्ष्य को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग क्यों न हों—बहुत गंभीर सुरक्षा और धार्मिक चिंता पैदा करता है।

2016 में बैलिस्टिक मिसाइल से शुरू हुआ विवाद, 2017 की घटना, 2019 में मक्का प्रांत के ऊपर मिसाइल अलर्ट और अब सितंबर 2026 का ड्रोन इंटरसेप्शन दिखाता है कि यमन युद्ध का प्रभाव कई बार सऊदी अरब के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंच चुका है।

फिलहाल स्थापित तथ्य यह है कि सऊदी वायु रक्षा ने 15 सितंबर को मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को नष्ट करने की सूचना दी है और उसे हूती ड्रोन बताया है। सऊदी अरब का आरोप है कि ड्रोन मक्का की ओर था; हूतियों का कहना है कि उन्होंने मक्का या किसी इस्लामी पवित्र स्थल को निशाना नहीं बनाया।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों पक्ष इस घटना के बाद पीछे हटते हैं, या मक्का के निकट हुई यह घटना सऊदी अरब और हूतियों के बीच एक और बड़े सैन्य टकराव की शुरुआत बनती है।

 

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