नई दिल्ली:
भारत की
आपराधिक न्याय
व्यवस्था में
1 जुलाई
2024 से
एक
बड़ा
बदलाव
हुआ,
जब
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) लागू
हुई।
इसने
ब्रिटिश शासन
के
समय
बनाए
गए
Indian Penal Code, 1860 (IPC) की जगह
ली।
यानी
हत्या,
चोरी,
धोखाधड़ी, मारपीट,
दुष्कर्म और
कई
अन्य
अपराधों को
परिभाषित करने
तथा
उनके
लिए
सजा
तय
करने
वाला
मुख्य
आपराधिक कानून
अब
IPC के
बजाय
BNS है।
India Code के
अनुसार
BNS को
25 दिसंबर
2023 को
अधिनियमित किया
गया
और
इसका
प्रवर्तन 1 जुलाई
2024 से
हुआ।
पहले क्या था IPC?
भारत
में
लगभग
164 वर्षों
तक
Indian Penal Code (IPC), 1860 प्रमुख आपराधिक कानून
रहा।
इसे
ब्रिटिश शासन
के
दौरान
बनाया
गया
था।
IPC यह
निर्धारित करता
था
कि
कौन-सा कार्य अपराध
माना
जाएगा
और
उस
अपराध
के
लिए
क्या
सजा
हो
सकती
है।
उदाहरण
के
लिए,
IPC में
हत्या
के
लिए
धारा
302, धोखाधड़ी के
मामलों
में
धारा
420, चोरी
के
लिए
धारा
379 और
आपराधिक विश्वासघात जैसे
अपराधों के
लिए
अलग-अलग धाराएं थीं।
समय
के
साथ
IPC में
अनेक
संशोधन
हुए,
लेकिन
इसकी
मूल
संरचना
19वीं
सदी
में
तैयार
की
गई
थी।
केंद्र
सरकार
ने
पुराने
आपराधिक कानूनों को
बदलते
हुए
नई
व्यवस्था लागू
की,
जिसमें
IPC की
जगह
BNS, CrPC की
जगह
BNSS और
Indian Evidence Act की
जगह
Bharatiya Sakshya Adhiniyam (BSA) लाया गया।
गृह
मंत्रालय भी
BNS को
IPC और
BNSS को
पुराने
CrPC से
संबंधित नई
विधायी
व्यवस्था के
रूप
में
सूचीबद्ध करता
है।
क्या BNS केवल IPC का नाम बदलकर बनाया गया है?
नहीं।
यह
कहना
सही
नहीं
होगा
कि
IPC का
केवल
नाम
बदलकर
BNS कर
दिया
गया
है।
IPC के बहुत
से
मूल
अपराध
और
कानूनी
सिद्धांत नई
संहिता
में
भी
मौजूद
हैं,
लेकिन
धाराओं
की
numbering और
व्यवस्था बदली
गई
है।
कुछ
अपराधों में
बदलाव
किए
गए,
कुछ
नए
अपराध
स्पष्ट
रूप
से
जोड़े
गए
और
कुछ
पुराने
प्रावधान BNS का
हिस्सा
नहीं
बनाए
गए।
BNS में कुल
358 धाराएं हैं,
जबकि
IPC में
511 धाराएं थीं।
इसलिए
किसी
पुराने
IPC section number को
देखकर
यह
नहीं
मानना
चाहिए
कि
वही
संख्या
BNS में
उसी
अपराध
के
लिए
इस्तेमाल होगी।
BNS
की 'धारा' आखिर होती क्या है?
इसे
आसान
उदाहरण
से
समझें।
किसी
कानून
को
एक
बड़ी
किताब
मान
लीजिए
और
उसकी
अलग-अलग धाराओं को
उसके
नियम।
हर
धारा
किसी
अपराध,
परिभाषा, अपवाद,
दायित्व या
सजा
के
बारे
में
बताती
है।
मसलन
BNS की
धारा 103 हत्या की सजा
से
संबंधित है।
इसी
तरह
अलग-अलग अपराधों के
लिए
अलग
धाराएं
निर्धारित की
गई
हैं।
जब
पुलिस
किसी
मामले
में
FIR दर्ज
करती
है,
तो
घटना
के
तथ्यों
के
आधार
पर
लागू
आपराधिक कानून
की
संबंधित धाराएं
लगाई
जाती
हैं।
हालांकि पुलिस
द्वारा
धारा
लग
जाने
भर
से
व्यक्ति अपराधी
साबित
नहीं
हो
जाता।
दोष
सिद्ध
करने
का
अंतिम
निर्णय
अदालत
में
सबूत
और
कानूनी
प्रक्रिया के
आधार
पर
होता
है।
IPC
की प्रसिद्ध धारा 302 का क्या हुआ?
यह
बदलाव
समझने
के
लिए
हत्या
सबसे
अच्छा
उदाहरण
है।
IPC में Section 302 हत्या की
सजा
से
संबंधित सबसे
प्रसिद्ध धाराओं
में
से
एक
थी।
BNS आने
के
बाद
हत्या
की
सजा
Section 103 में
है।
इसलिए
1 जुलाई
2024 के
बाद
की
घटनाओं
के
संदर्भ
में
आपको
समाचारों में
“BNS की
धारा
103” सुनाई
दे
सकती
है।
इसी
तरह
अनेक
पुराने
IPC section numbers अब
बदल
चुके
हैं।
अपराध
का
मूल
स्वरूप
कई
मामलों
में
मिलता-जुलता हो सकता
है,
लेकिन
धारा
संख्या
अलग
हो
सकती
है।
BNS
में कौन-कौन से महत्वपूर्ण नए अपराध शामिल किए गए?
BNS में बदलते
अपराधों को
ध्यान
में
रखते
हुए
कुछ
विषयों
को
विशेष
रूप
से
शामिल
किया
गया
है।
आधिकारिक BPR&D सामग्री के
अनुसार
Organised Crime को Section 111,
Petty Organised Crime को Section 112,
Terrorist Act को Section 113
और
Snatching को Section 304
के
तहत
रखा
गया
है।
इसके
अतिरिक्त deceitful means आदि के
जरिए
sexual intercourse से
संबंधित नया
अपराध
Section 69 में
शामिल
है।
यह
बदलाव
महत्वपूर्ण है
क्योंकि संगठित
अपराध
जैसी
गतिविधियों के
लिए
पहले
IPC में
इसी
रूप
में
अलग
और
व्यापक
केंद्रीय धारा
नहीं
थी
तथा
कई
मामलों
में
अन्य
विशेष
कानूनों का
सहारा
लेना
पड़ता
था।
Community
Service भी बनी सजा
BNS का एक
उल्लेखनीय बदलाव
community service यानी सामुदायिक सेवा को
punishment के
एक
रूप
के
तौर
पर
शामिल
करना
है।
कुछ
अपेक्षाकृत छोटे
अपराधों में
अदालत
परिस्थितियों के
अनुसार
community service की
सजा
दे
सकती
है।
BPR&D की
आधिकारिक जानकारी के
अनुसार
छह
petty offences में
community service का
प्रावधान किया
गया
है।
इसका
उद्देश्य हर
छोटे
अपराध
में
केवल
जेल
या
जुर्माने को
ही
विकल्प
मानने
के
बजाय
कुछ
मामलों
में
सुधारात्मक सजा
का
रास्ता
उपलब्ध
कराना
भी
है।
महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों को विशेष स्थान
नई
संहिता
में
महिलाओं और
बच्चों
के
विरुद्ध अपराधों को
एक
साथ
एक
अध्याय
में
रखा
गया
है।
सरकार
के
अनुसार
IPC में
अलग-अलग स्थानों पर
मौजूद
ऐसे
प्रावधानों को
BNS में
अधिक
व्यवस्थित तरीके
से
रखा
गया
है।
सरकारी
जानकारी के
अनुसार
18 वर्ष
से
कम
उम्र
की
महिला
के
साथ
gang rape के
अपराध
में
दोष
सिद्ध
होने
पर
प्राकृतिक जीवन
की
शेष
अवधि
तक
आजीवन
कारावास या
मृत्युदंड तक
का
प्रावधान है।
इसके
अलावा
शादी,
रोजगार
या
promotion का
झूठा
वादा
अथवा
पहचान
छिपाने
जैसे
deceitful means से
sexual intercourse से
संबंधित नया
अपराध
भी
शामिल
किया
गया
है।
क्या 'राजद्रोह' यानी Sedition खत्म हो गया?
IPC की प्रसिद्ध Section 124A, जिसे आम
तौर
पर
sedition या
राजद्रोह कहा
जाता
था,
उसी
रूप
में
BNS का
हिस्सा
नहीं
है।
BPR&D भी
sedition को
उन
IPC offences में
गिनाता
है
जो
BNS में
उसी
रूप
में
शामिल
नहीं
हैं।
लेकिन
इसका
अर्थ
यह
नहीं
कि
देश
की
संप्रभुता और
अखंडता
को
खतरे
में
डालने
वाली
सभी
गतिविधियां अपराध
नहीं
रहीं।
BNS में Section 152 भारत की
sovereignty, unity and integrity को खतरे
में
डालने
वाले
कुछ
कृत्यों से
संबंधित नया
प्रावधान है।
इसलिए
पुराने
sedition कानून
के
हटने
और
Section 152 के
आने
को
एक
ही
बात
समझना
सही
नहीं
होगा;
दोनों
के
कानूनी
शब्द
और
दायरा
अलग
हैं।
BNS
अकेले कैसे काम करेगी?
यह
सबसे
महत्वपूर्ण बात
है।
आपराधिक न्याय
व्यवस्था केवल
BNS से
नहीं
चलती।
इसे
तीन
मुख्य
नए
कानूनों के
माध्यम
से
समझा
जा
सकता
है:
BNS (Bharatiya Nyaya Sanhita) — कौन-सा काम अपराध
है
और
उसकी
सजा
क्या
है।
BNSS (Bharatiya Nagarik Suraksha
Sanhita) — FIR, जांच, गिरफ्तारी, जमानत,
ट्रायल
आदि
की
आपराधिक प्रक्रिया।
BSA (Bharatiya Sakshya Adhiniyam) — अदालत
में
कौन-सा evidence स्वीकार किया जा सकता
है
और
उसे
किस
प्रकार
देखा
जाएगा।
ये
तीनों
कानून
2023 में
बनाए
गए
और
प्रमुख
रूप
से
1 जुलाई
2024 से
लागू
हुए।
इसे
साधारण
भाषा
में
ऐसे
समझ
सकते
हैं—BNS
अपराध और सजा बताती है, BNSS पुलिस और अदालत की प्रक्रिया बताती है और BSA सबूतों से संबंधित नियम तय करती है।
पुराने मामलों का क्या होगा?
यहां
तारीख
बहुत
महत्वपूर्ण हो
जाती
है।
केवल
यह
देखकर
कि
आज
BNS लागू
है,
हर
पुराने
मामले
में
IPC की
धाराओं
को
BNS में
बदल
देना
सही
नहीं
होगा।
अपराध
कब
हुआ,
संबंधित कानूनी
प्रावधान कब
लागू
थे
और
संक्रमण संबंधी
नियम
क्या
कहते
हैं—इन बातों के
आधार
पर
कानून
लागू
होता
है।
इसी
कारण
आज
भी
पुराने
आपराधिक मामलों
और
न्यायालय के
पुराने
आदेशों
में
IPC की
धाराएं
दिखाई
देती
हैं,
जबकि
नई
घटनाओं
में
BNS की
धाराएं
दिखाई
दे
सकती
हैं।
देश की Criminal Justice System में नया अध्याय
कुल
मिलाकर
BNS भारत
के
substantive criminal law की
नई
मुख्य
संहिता
है।
यह
IPC की
विरासत
पर
आधारित
होने
के
बावजूद
केवल
धाराओं
के
नाम
बदलने
तक
सीमित
नहीं
है।
इसमें
धाराओं
का
पुनर्गठन किया
गया,
कुछ
अपराध
हटाए
या
बदले
गए,
organised crime, petty organised crime, terrorist act और snatching जैसे विषयों को
स्पष्ट
प्रावधान मिले
तथा
community service जैसी
सजा
को
शामिल
किया
गया।
इस
बदलाव
को
सबसे
आसान
तरीके
से
इस
प्रकार
याद
रखा
जा
सकता
है:
यानी
भारत
में
अपराध
की
परिभाषा से
लेकर
पुलिस
जांच,
अदालत
की
प्रक्रिया और
सबूतों
तक,
आपराधिक न्याय
व्यवस्था के
तीन
प्रमुख
कानूनों का
नया
ढांचा
लागू
हो
चुका
है।
आधिकारिक BNS कानून: India Code पर Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 का पूरा अधिनियम उपलब्ध है।
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