Ashtavinayak Special Report:
सनातन
धर्म में भगवान गणेश की उपासना का
विशेष महत्व है। किसी भी शुभ कार्य
की शुरुआत 'प्रथम पूज्य' श्री गणेश की वंदना से
ही होती है। महाराष्ट्र में स्थित 'अष्टविनायक' (Ashtavinayak) यात्रा का स्थान सबसे
पवित्र गणेश पीठों में माना जाता है। 'अष्टविनायक' शब्द का अर्थ है
"आठ स्वयंभू गणेश"। ये आठों
मंदिर महाराष्ट्र के पुणे, अहमदनगर
और रायगढ़ जिलों में स्थित हैं।
खबर की मुख्य बातें (Key Highlights):
·
स्वयंभू
मूर्तियाँ:
इन आठों मंदिरों में स्थापित भगवान गणेश की मूर्तियाँ प्राकृतिक
(स्वयंभू) हैं, यानी इन्हें किसी मानव ने गढ़ा नहीं
है।
·
विशेष
यात्रा नियम: अष्टविनायक यात्रा की धार्मिक परंपरा
तब तक पूर्ण नहीं
मानी जाती, जब तक आप
पहले मंदिर (मोरगांव के मयूरेश्वर) से
यात्रा शुरू करके आठों मंदिरों के दर्शन के
बाद दोबारा मोरगांव लौटकर अंतिम दर्शन न कर लें।
·
पेशवाकालीन
स्थापत्य:
अधिकांश मंदिरों का पुनरुद्धार पेशवा
काल के दौरान छत्रपति
शिवाजी महाराज और पेशवा शासकों
द्वारा कराया गया था।
महाराष्ट्र
के 8 अष्टविनायक मंदिर: स्थान, नाम और पौराणिक कथा
1. श्री
मयूरेश्वर
(Mayureshwar Temple) — मोरगांव,
पुणे
·
स्थान:
पुणे जिला
·
पौराणिक
कथा: यहाँ भगवान गणेश ने 'मयूर' (मोर) पर सवार होकर
सिंधु दैत्य का वध किया
था। इसलिए इन्हें मयूरेश्वर या मोरेगांव कहा
जाता है।
·
विशेषता:
अष्टविनायक यात्रा की शुरुआत और
अंत इसी मंदिर के दर्शन से
होता है।
2. श्री
सिद्धिविनायक
(Siddhivinayak Temple) — सिद्धटेक,
अहमदनगर
·
स्थान:
अहमदनगर जिला (भीमा नदी के तट पर)
·
पौराणिक
कथा: माना जाता है कि विष्णु
जी ने मधु और
कैटभ दैत्यों का वध करने
से पूर्व इसी स्थान पर सिद्धि प्राप्त
की थी।
·
विशेषता:
अष्टविनायक में यह अकेला मंदिर
है जहाँ गणेश जी की सूंड
दाईं ओर (दाहिने हाथ की तरफ) मुड़ी
हुई है।
3. श्री
बल्लालेश्वर
(Ballaleshwar Temple) — पाली,
रायगढ़
·
स्थान:
रायगढ़ जिला
·
पौराणिक
कथा: यह मंदिर गणेश
जी के परम भक्त
बाल 'बल्लाल' के नाम पर
रखा गया है।
·
विशेषता:
यह एकमात्र अष्टविनायक मंदिर है जिसका नाम
भगवान गणेश के किसी भक्त
के नाम पर रखा गया
है।
4. श्री
वरदविनायक
(Varadavinayak Temple) — महड़,
रायगढ़
·
स्थान:
रायगढ़ जिला
·
पौराणिक
कथा: यहाँ दर्शन करने से भक्तों की
सभी मनोकामनाएँ (वरदान) पूरी होती हैं।
·
विशेषता:
इस मंदिर के गर्भगृह में
1892 से निरंतर एक अखंड दीपक
(नंदादीप) जल रहा है।
5. श्री
चिंतामणि (Chintamani
Temple) — थेूर, पुणे
·
स्थान:
पुणे जिला (मुला-मुथा नदी का संगम)
·
पौराणिक
कथा: यहाँ भगवान गणेश ने ऋषि कपिला
की चिंताओं को दूर करते
हुए 'चिंतामणि' नामक रत्न असुर गण से वापस
दिलाया था।
·
विशेषता:
मन की शांति और
चिंताओं से मुक्ति के
लिए इस धाम की
मान्यता है।
6. श्री
गिरजात्मज
(Girijatmaj Temple) — लेण्याद्री,
पुणे
·
स्थान:
पुणे जिला (जुन्नर क्षेत्र)
·
पौराणिक
कथा: माता पार्वती (गिरिजा) ने पुत्र रूप
में गणेश जी को पाने
के लिए इसी पहाड़ी पर 12 वर्षों तक कठिन तपस्या
की थी।
·
विशेषता:
यह मंदिर बौद्ध गुफाओं (लेण्याद्री पहाड़ी) के अंदर स्थित
है। मंदिर तक पहुँचने के
लिए करीब 300 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।
7. श्री
विघ्नेश्वर
(Vighneshwar Temple) — ओझर,
पुणे
·
स्थान:
पुणे जिला (कुकड़ी नदी के तट पर)
·
पौराणिक
कथा: यहाँ भगवान गणेश ने 'विघ्नासुर' नाम के दैत्य का
संहार कर दुनिया को
उसके अत्याचारों से मुक्त कराया
था।
·
विशेषता:
मंदिर का स्वर्ण शिखर
और परिसर का भव्य स्थापत्य
दर्शनीय है।
8. श्री
महागणपति
(Mahaganapati Temple) — रांजणगांव,
पुणे
·
स्थान:
पुणे जिला
·
पौराणिक
कथा: त्रिपुरासुर राक्षस का वध करने
से पूर्व स्वयं भगवान शिव ने यहाँ 'महागणपति'
की पूजा की थी।
·
विशेषता:
यह गणेश जी का अत्यंत
शक्तिशाली स्वरूप माना जाता है।
अष्टविनायक
8 मंदिरों का तुलनात्मक विवरण
एक नज़र में
|
क्र. |
मंदिर का नाम |
स्थान / जिला |
नदी / पहाड़ी |
गणेश जी की सूंड |
|
1 |
मयूरेश्वर |
मोरगांव
(पुणे) |
कऱ्हा
नदी |
बाईं
ओर |
|
2 |
सिद्धिविनायक |
सिद्धटेक
(अहमदनगर) |
भीमा
नदी |
दाईं
ओर |
|
3 |
बल्लालेश्वर |
पाली
(रायगढ़) |
सरसगढ़
पहाड़ी के
पास |
बाईं
ओर |
|
4 |
वरदविनायक |
महड़
(रायगढ़) |
— |
बाईं
ओर |
|
5 |
चिंतामणि |
थेूर
(पुणे) |
मुला-मुथा नदी
संगम |
बाईं
ओर |
|
6 |
गिरजात्मज |
लेण्याद्री
(पुणे) |
लेण्याद्री
गुफाएँ |
बाईं
ओर |
|
7 |
विघ्नेश्वर |
ओझर
(पुणे) |
कुकड़ी
नदी |
बाईं
ओर |
|
8 |
महागणपति |
रांजणगांव
(पुणे) |
— |
बाईं
ओर |
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