पाकिस्तान–अफगानिस्तान संघर्ष: खुले युद्ध जैसी स्थिति, दोनों पक्षों का दावा और वैश्विक प्रतिक्रिया

News Desk (विशेष रिपोर्ट)

पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव ने एक सीमा संघर्ष से आगे बढ़कर खुली युद्ध जैसी स्थिति ले ली है, जिसे कई अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ आउटलेट “2026 का पैक्टिकल वॉर” बता रहे हैं।

यह तनाव कई हफ्तों से बढ़ रहा था, लेकिन फरवरी 2026 के मध्य से यह तेज़ी से बढ़ा और अब दोनों देशों की सेनाओं के बीच आक्रामक सैन्य टकराव, हवाई हमले और शत्रुता के नेटवर्क की भरमार नजर आने लगी है।

पाकिस्तान का मौक़ा-बाजी हमला: “ऑपरेशन ग़ज़ब लिल-हक”

पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में एयरस्ट्राइक और क्रॉस-बॉर्डर हमले किए हैं, जिसमें उसने अफगानिस्तान के कई इलाक़ों, विशेष रूप से काबुल, कंधार और पक्तिया में सैन्य ठिकानों को लक्ष्य बताया है। पाकिस्तान का कहना है कि यह “ऑपरेशन ग़ज़ब लिल-हक” (Wrath for the Truth) आतंकवादी संगठन तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और ISIS-KHORASAN प्रांत के ठिकानों को नष्ट करने के उद्देश्य से चलाया गया है।

पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व का दावा है कि इन हमलों में 133 तालिबान अधिकारियों मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए। पाकिस्तान ने 27 पोस्ट, 80 से अधिक टैंकों और अन्य प्रकार के गोला-बारूद को नष्ट करने का भी दावा किया है।

पाकिस्तान की ओर से यह भी कहा गया है कि यह हमला बिना उकसावे वाली गोलीबारी और सीमा पार से लगातार होने वाले आतंकवादी हमलों के जवाब में किया गया। इसी सीक्वेंस में पाकिस्तान ने पहले से चल रहे आतंकवादी नेटवर्क और प्रतिशोधी हमलों को खत्म करने का औचित्य दिया है।

अफगानिस्तान की जवाबी कार्रवाई

अफगान तालिबान शासन ने पाकिस्तान के जारी हवाई हमलों और सीमा पार सैन्य अभियानों के जवाब में जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। तालिबान समर्थित सेना ने पाकिस्तान की सीमा पर कई मौकों पर वायु और जमीनी हमले किए हैं। अफगान अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने पाकिस्तान की कुछ चौकियों को तबाह किया है, 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है और कुछ ठिकानों पर कब्ज़ा किया है।

इस संघर्ष में दोनों ओर से आंकड़ों का अंतर बहुत बड़ा है — पाकिस्तान के अनुसार तालिबान को भारी नुक़सान हुआ है, जबकि अफगानिस्तान के बयान में पाकिस्तानी सेना पर ब्लिट्ज़क्रेग हमले का दावा है। दोनों पक्ष के मौत और घायल आंकड़े स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए जा सके हैं, जिससे सच्चाई में काफी अंतर दिखाई दे रहा है।

आगे की स्थिति और भी तनावपूर्ण बनी हुई है, जब अफगान सेना ने सीमा पार के इलाक़ों में टैंकों, भारी हथियारों और बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात करना शुरू कर दिया है। अफगान रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ने चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान हमले जारी रखता है तो वे और बड़े पैमाने पर जवाबी हमले कर सकते हैं।

हमले के दौरान नागरिक एवं सैन्य क्षति

कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय स्रोतों के अनुसार, हवाई हमलों और जमीनी संघर्ष के कारण सिविलियनों को भी नुकसान पहुँचा है। पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक में कम से कम 18 अफगान नागरिक, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, मारे जाने या घायल होने का दावा किया गया है।

पाकिस्तान की ओर से यह दावा भी किया गया कि उसके केवल कुछ सैनिक ही मारे गए हैं, लेकिन अफगानिस्तान का कहना है कि कई पाकिस्तानी सैनिकों की हताहत रिपोर्ट है। यह भी सामने आया कि एक पाकिस्तानी जेट विमान को अफगान लड़ाकू सेना ने मार गिराया और पायलट को पकड़ लिया।

दूरंद लाइन विवाद का पुनर्जीवन

दोनों देशों के बीच विवाद की जड़ डूरंद लाइन है, जो 2,611 किलोमीटर लंबी लाइन छह दशकों से अधिक समय से दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक असहमति का विषय रही है। अफगानिस्तान इसे मान्यता नहीं देता और इसे “थोप दी गई सीमा” बताता है। पाकिस्तान कहता है कि यह वैध बॉर्डर है और आतंकवादियों को अफगानिस्तान में पनाह देने से कॉउंटर-इंसर्जेंसी की आवश्यकता है।

वैश्विक राजनीति और प्रतिक्रिया

विश्व भर की शक्तियों ने इस संघर्ष पर प्रतिक्रिया दी है। संयुक्त राष्ट्र, रूस, चीन और यूरोपीय संघ सहित कई देशों ने संयम, बातचीत और तनाव कम करने का आह्वान किया है क्योंकि यह संघर्ष क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।

अमेरिका ने पाकिस्तान के ‘स्व-रक्षा के अधिकार’ का समर्थन किया है, हालांकि उसने तालिबान-नेतृत्व वाली अफगान सरकार को भी शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में संवाद की आवश्यकता जताई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने दोनों पक्षों से तुरंत संघर्ष विराम और चर्चा की अपील की है।

अन्य देशों ने मध्यस्थता की पेशकश की है, लेकिन फिलहाल कोई उच्च-स्तरीय शांति वार्ता नहीं हो पाई है। रूस ने संयुक्त हमलों की निंदा की है, जबकि कतर और तुर्की ने बातचीत को पुनर्जीवित करने की कोशिशें तेज की हैं।

भारत का दृष्टिकोण

भारत ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष को लगातार निगरानी में रखा है और कहा है कि वह स्थिति को नज़दीकी आंख से देख रहा है। भारत की चिंताएँ विशेष रूप से अफगानिस्तान में नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर केंद्रित हैं।

भारत ने सार्वजनिक रूप से किसी भी पक्ष को समर्थन नहीं दिया है, लेकिन उसकी नीति क्षेत्रीय शांति और लोकतांत्रिक स्थिरता को प्राथमिकता देती है।

संघर्ष की संभावित दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष जारी रहता है, तो यह केवल पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच का मामला नहीं रहेगा। यह क्षेत्रीय युद्ध के रूप में फैल सकता है, जिसमें पड़ोसी देशों के हित, आतंकवाद विरोधी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भी प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा हजारों नागरिकों के लिए शरणार्थी संकट उत्पन्न होने की संभावना है।

निष्कर्ष

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच फरवरी 2026 में अचानक बढ़ा संघर्ष सीधे सैन्य तनाव में बदल चुका है, जिसमें दोनों देशों ने खुली युद्ध-सी स्थिति का दावा किया है। पाकिस्तान ने बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक और जमीनी हमलों की घोषणा की है, जबकि अफगानिस्तान ने जवाबी कार्रवाई जारी रखी है। वैश्विक समुदाय शांति की दिशा में दबाव बना रहा है, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों का टकराव जारी है और इससे क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर खतरा है। 

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