अमेरिका–इजरायल और ईरान: व्यापक सैन्य संघर्ष, वैश्विक प्रतिक्रिया बढ़ी

 News Desk | 

आज मध्य पूर्व में तनाव एक बड़े सैन्य संघर्ष में बदल गया है, जहाँ संयुक्त रूप से अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई और समुद्री हमले शुरू कर दिए हैं। यह तब हुआ जब परमाणु वार्ता और कूटनीतिक दबाव के बावजूद बातचीत टूट गई और दोनों पक्षों ने अपनी सेनाओं को पीछे नहीं हटने का संदेश दिया।

हमले की शुरुआत शनिवार सुबह हुई, जब संयुक्त अमेरिकी और इज़राइली सेनाओं ने ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में मिसाइल और वायु हमले किए। विस्फोटों की आवाज़ राजधानी में सुनी गई और धुंए के गुबार कई इलाकों में देखे गए। इज़राइली रक्षा मंत्री ने पुष्टि की कि यह एक प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक (पूर्वघातक हमला) है और इसका लक्ष्य ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को रोकना है।

इस अभियान को संयुक्त रूप से “ऑपरेशन इपिक फ्यूरी” नाम दिया गया है, जिसमें बताया गया है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करना प्राथमिक उद्देश्य है। संयुक्त बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई “आतंकवाद और खतरे को नष्ट” करने के लिए आवश्यक थी। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इसे “अस्तित्व के खतरे” को समाप्त करने वाला कदम बताया।

कई रिपोर्टों में यह बताया गया कि ईरान पर किए गए हमलों ने तेहरान, इस्फहान, कराज और करमानशाह जैसे शहरों में धमाके किए, लेकिन क्षति और हताहतों का विस्तृत आंकड़ा अभी तक अलग-अलग स्रोतों में अनुमानित है। वहीं ईरान की ओर से कहा गया है कि इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।

ईरान का पलटवार और मिसाइल हमले

हमले के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने प्रतिक्रिया स्वरूप मिडिल ईस्ट में अमेरिकी और इज़राइली ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। ईरानी सेना के बयान के अनुसार यह ऑपरेशन “Truthful Promise 4” का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने कतर, कुवैत, यूएई और बहरीन सहित कई देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी।

कुछ अरब देशों, जैसे यूएई और बहरीन ने भी मिसाइलें इंटरसेप्ट कीं, लेकिन अबू धाबी में एक व्यक्ति के मारे जाने की पुष्टि हुई है। साथ ही ईरान ने जॉर्डन और सऊदी अरब पर भी मिसाइल हमले दागे, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। कई देशों ने हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है और नागरिक उड्डयन सेवाओं को रोका जा रहा है।

खामेनेई का बयान और सामाजिक प्रभाव

ईरानी सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल पर आक्रामक सैन्य कार्रवाई के लिए न केवल कड़ी आलोचना की है बल्कि जनता को तैयार रहने के लिए भी कहा है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सुरक्षा परिषद ने नागरिकों को राजधानी तेहरान छोड़ने की सलाह दी है क्योंकि स्थिति काफी अस्थिर है।

ईरान की तरफ़ से यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में कई सैन्य अधिकारी और कमांडर मारे गए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो पाई है।

वैश्विक प्रतिक्रियाएँ और कूटनीतिक दबाव

इस व्यापक संघर्ष ने वैश्विक राजनीति को भी झकझोर दिया है। रूस के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे “अनायास और बिना उकसावे वाला सैन्य आक्रमण” बताया है और कहा है कि इससे मानवता, आर्थिक और परमाणु जोखिम पैदा हो सकते हैं। रूस ने तत्काल युद्ध को रोकने और कूटनीतिक समाधान की मांग की है।

इसके अलावा कई देशों ने तुरंत युद्ध विराम और वार्ता की जरूरत पर जोर दिया है। इंडोनेशिया ने भी मध्यस्थता प्रस्तावित किया है ताकि अमेरिका-ईरान और इजरायल के बीच बातचीत शुरू हो सके।

कई पश्चिमी और गैर-पश्चिमी देशों ने अपने नागरिकों को चेतावनी जारी की है कि वे संभावित सैन्य भड़काऊ के दौरान मिडिल ईस्ट से दूर रहें और सुरक्षा अपडेट का पालन करें। अनेक एयरलाइनों ने भी इस क्षेत्र में उड़ानों को रद्द या प्रभावित किया है।

भारत की स्थिति और सुरक्षा एडवाइजरी

इस गंभीर विवाद के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है कि वे मिडिल ईस्ट यात्रा को स्थगित करें और यदि वहां हैं तो सुरक्षित स्थानों पर रहें। भारत ने यह भी कहा है कि वह स्थिति पर नज़दीकी निगरानी रख रहा है और ज़रूरत पड़ने पर अपने नागरिकों को सहायता प्रदान करेगा।

क्या अगले चरण की उम्मीद?

विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि इस संघर्ष से एक पूर्ण-पैमाने पर युद्ध फैल सकता है, विशेषकर अगर दोनों पक्ष परमाणु या बड़े सैन्य हथियारों का इस्तेमाल करते हैं। अब तक यह संघर्ष सीमित हवाई और मिसाइल हमलों तक है, लेकिन यह तेजी से विस्तारित हो सकता है जिससे समूचा मध्य पूर्व क्षेत्र प्रभावित हो — और वैश्विक ऊर्जा मार्केट, यात्रा, और आर्थिक सुरक्षा पर भी इसका बड़ा असर पड़े।

निष्कर्ष

आज का दिन मध्य पूर्व के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है, जहाँ अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमले शुरू किए हैं, और ईरान ने जवाबी मिसाइल प्रहार किया है। इस विवाद के चलते सैकड़ों मिसाइल और हवाई हमले दर्ज किए गए, कई देशों के हवाई क्षेत्र बंद किए गए, और वैश्विक कूटनीतिक दबाव बढ़ गया है। तनाव अभी भी चरम पर है और इसके परिणामों का असर आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। 

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