नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत और पाकिस्तान के
बीच जारी सीमाई तनाव और हालिया आतंकवादी
घटनाओं के बीच, प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई
टेलीफोनिक बातचीत ने वैश्विक कूटनीति
में नई हलचल पैदा
कर दी है। इस
संवाद में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के
उस चिरस्थायी सिद्धांत को दोहराया है
जिसमें द्विपक्षीय मुद्दों पर किसी भी
'तीसरे पक्ष
की मध्यस्थता' (Third-party
Mediation) के लिए कोई स्थान नहीं है।
1. ट्रंप-मोदी कॉल: मध्यस्थता के दावों पर
विराम
हालिया
बातचीत के दौरान, पीएम
मोदी ने स्पष्ट रूप
से कहा कि भारत और
पाकिस्तान के बीच जो
भी युद्धविराम (Ceasefire) या सैन्य स्तर
की समझ बनी है, वह दोनों देशों
के सैन्य नेतृत्व (DGMO स्तर) की सीधी बातचीत
का परिणाम है।
·
भारत
का स्टैंड: मोदी ने ट्रंप को
स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद
के खिलाफ अपनी "Zero Tolerance" नीति से कोई समझौता
नहीं करेगा।
·
मध्यस्थता
पर ना: हालांकि ट्रंप प्रशासन ने अतीत में
मध्यस्थता की इच्छा जताई
थी, लेकिन भारत ने विनम्रतापूर्वक यह
संदेश दिया है कि यह
पूरी तरह से द्विपक्षीय मामला
है।
2. आतंकवाद
के खिलाफ वैश्विक मोर्चा: 'दिल्ली डिक्लेरेशन'
आतंकवाद
के मुद्दे पर भारत केवल
अमेरिका ही नहीं, बल्कि
अरब जगत के साथ भी
अपने संबंधों को मजबूत कर
रहा है। हाल ही में संपन्न
हुए भारत-अरब विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में 'दिल्ली डिक्लेरेशन' को अपनाया गया।
·
इस
सम्मेलन में अरब देशों ने भारत की
आतंकवाद विरोधी मुहिम का पुरजोर समर्थन
किया।
·
विदेश
मंत्रियों ने सामूहिक रूप
से सीमा पार आतंकवाद और आतंकी वित्तपोषण
(Terror Financing) को
रोकने के लिए समन्वित
प्रयासों पर बल दिया।
3. ट्रंप
का समर्थन और 'The Resistance Front' पर प्रहार
डोनाल्ड
ट्रंप ने हमेशा से
भारत को आतंकवाद के
पीड़ित और एक मजबूत
सहयोगी के रूप में
देखा है।
·
TRF को
आतंकी संगठन घोषित करना: एक बड़े रणनीतिक
कदम के तहत, अमेरिका
ने 'The Resistance Front' (TRF)
को एक विदेशी आतंकवादी
संगठन के रूप में
नामित किया है। भारत लंबे समय से यह कहता
रहा है कि TRF असल
में लश्कर-ए-तैयबा का
ही एक छद्म (Proxy) संगठन
है।
·
साझा
संवेदनाएं:
ट्रंप ने पहलगाम और
मुंबई हमलों की बरसी पर
भारत के साथ एकजुटता
प्रकट करते हुए कहा कि, "अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई
में भारत के साथ मजबूती
से खड़ा है।"
4. रणनीतिक
विश्लेषण: भारत के लिए इसके
क्या मायने हैं?
भारत
की कूटनीति इस समय दोहरे
स्तर पर काम कर
रही है:
1.
रक्षात्मक स्वायत्तता: अमेरिका जैसे शक्तिशाली मित्र होने के बावजूद, भारत
अपनी संप्रभुता और पाकिस्तान से
जुड़े मुद्दों पर स्वतंत्र निर्णय
लेने की क्षमता को
बरकरार रखे हुए है।
2.
वैश्विक घेराबंदी: TRF जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगवाकर
भारत ने पाकिस्तान प्रायोजित
आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय मंच
पर बेनकाब करने में सफलता हासिल की है।
5. निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की यह बातचीत स्पष्ट करती है कि भारत-अमेरिका संबंध अब केवल 'खरीद-बिक्री' तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक गहरी सुरक्षा साझेदारी में बदल चुके हैं। हालांकि, भारत ने यह रेखा भी खींच दी है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी लड़ाई 'द्विपक्षीय' है और इसमें किसी भी बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
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