बलूचिस्तान में 'ऑपरेशन हेरोफ' का खूनी तांडव: BLA का भीषण हमला और 'फिदायीन' महिलाओं का उदय

 

क्वेटा/इस्लामाबाद: पाकिस्तान का दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान एक बार फिर भीषण रक्तपात और अराजकता की आग में झुलस रहा है। 31 जनवरी से 1 फरवरी 2026 के बीच, प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने अपनी अब तक की सबसे समन्वित और घातक सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसे उन्होंने “Operation Herof” (हेरोफ अभियान) का दूसरा चरण नाम दिया है।

इस 24 घंटे के हिंसक चक्रवात ने केवल पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि युद्ध के मैदान में महिला आत्मघाती हमलावरों (Fidayeens) के बढ़ते इस्तेमाल ने अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों को भी चौंका दिया है।

1. हमले का पैमाना: 14 जिलों में एक साथ कोहराम

BLA के लड़ाकों ने बलूचिस्तान के 14 से अधिक जिलों में एक साथ हमला बोलकर राज्य मशीनरी को पंगु बना दिया। प्रमुख निशाना बने:

  • क्वेटा और ग्वादर: रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन शहरों में सैन्य ठिकानों और सरकारी इमारतों को निशाना बनाया गया।
  • मस्तुंग और नोश्की: यहाँ सुरक्षा बलों के काफिलों पर घात लगाकर हमले किए गए।
  • परिवहन और संचार: विद्रोहियों ने कई राजमार्गों पर कब्जा कर लिया, रेल की पटरियों को उड़ा दिया और मोबाइल टावरों को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे प्रांत का संपर्क शेष देश से कट गया।

2. महिला फिदायीन: आसिफा मेंगल और हवा बलोच का चेहरा

इस हमले की सबसे विचलित करने वाली बात BLA द्वारा दो महिला आत्मघाती हमलावरों की तस्वीरों और पहचान को सार्वजनिक करना है।

  • आसिफा मेंगल (23 वर्ष): रिपोर्टों के अनुसार, आसिफा ने एक महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान पर आत्मघाती हमले को अंजाम दिया। वह उच्च शिक्षित पृष्ठभूमि से आती थी, जो यह दर्शाता है कि उग्रवाद अब केवल अशिक्षित वर्गों तक सीमित नहीं है।
  • हवा बलोच (24 वर्ष): हवा बलोच ने भी इस ऑपरेशन में सक्रिय भूमिका निभाई। BLA के प्रचार तंत्र ने इन्हें 'मजीद ब्रिगेड' के प्रतीक के रूप में पेश किया है।

विशेषज्ञों की राय: महिलाओं का आत्मघाती दस्ते में शामिल होना यह संकेत देता है कि बलूच विद्रोह अब एक गहरा सामाजिक और वैचारिक मोड़ ले चुका है, जहाँ परिवार के सदस्य भी कट्टरपंथ की राह पर हैं।

3. हताहतों के आंकड़े और विरोधाभासी दावे

ग्राउंड जीरो से रही रिपोर्टें विरोधाभासों से भरी हैं, लेकिन नुकसान का पैमाना बहुत बड़ा है:

विवरण

आधिकारिक/मीडिया रिपोर्ट

BLA के दावे

नागरिक मौतें

31

-

सुरक्षा बल मौतें

17

80+

मारे गए उग्रवादी

177

-

बंधक सैनिक

पुष्टि नहीं

18

पाकिस्तान की सेना (ISPR) ने दावा किया है कि उन्होंने जवाबी कार्रवाई में 177 उग्रवादियों को ढेर कर दिया है, जो हाल के वर्षों में उग्रवाद विरोधी अभियान की सबसे बड़ी सफलता बताई जा रही है।

4. ऑपरेशन हेरोफ: रणनीति में बड़ा बदलाव

यह हमला केवल 'हिट एंड रन' की घटना नहीं थी। विश्लेषकों के अनुसार, BLA ने अपनी रणनीति बदल ली है:

  1. समन्वय: एक ही समय पर कई शहरों में हमले करना पाकिस्तानी सेना की प्रतिक्रिया को धीमा करने की रणनीति थी।
  2. क्षेत्रीय नियंत्रण: राजमार्गों को अवरुद्ध करना और पुलों को उड़ाना यह दिखाने का प्रयास था कि बलूचिस्तान पर सरकार का नियंत्रण कमजोर है।
  3. मनोवैज्ञानिक युद्ध: फिदायीन हमलावरों की तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करना युवाओं को अपनी ओर खींचने और सेना का मनोबल गिराने की कोशिश है।

5. पाकिस्तान का आरोप और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

पाकिस्तान सरकार ने इस हिंसा के लिए सीधे तौर पर "विदेशी ताकतों" (खासकर भारत) को जिम्मेदार ठहराया है। पाकिस्तानी नेतृत्व का कहना है कि यह हमला चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को अस्थिर करने की एक साजिश है।

दूसरी ओर, भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पाकिस्तान की अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलता और बलूच लोगों के मानवाधिकारों के दमन का परिणाम बताया है।

6. हिंसा बढ़ने के गहरे कारण

बलूचिस्तान में हिंसा की आग ठंडी क्यों नहीं हो रही? इसके पीछे तीन मुख्य स्तंभ हैं:

  • संसाधनों का दोहन: स्थानीय लोगों का मानना है कि उनके सोने, तांबे और गैस के भंडार से पाकिस्तान और चीन मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि स्थानीय आबादी गरीबी में जी रही है।
  • जबरन गायब होना (Missing Persons): मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि हजारों बलूच कार्यकर्ताओं को सुरक्षा बलों ने अवैध रूप से हिरासत में लिया है, जिससे परिवारों में प्रतिशोध की भावना प्रबल हुई है।
  • अफगान सीमा: सीमा पार से हथियारों और उग्रवादियों की आवाजाही ने भी इस आग में घी का काम किया है।

7. निष्कर्ष: एक अनिश्चित भविष्य

'ऑपरेशन हेरोफ' ने साबित कर दिया है कि बलूचिस्तान का मुद्दा अब केवल बातचीत से सुलझने वाला नहीं दिखता। यदि पाकिस्तान सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया और केवल सैन्य बल का प्रयोग जारी रखा, तो आने वाले समय में गृह युद्ध जैसी स्थिति और गहरा सकती है।

आसिफा और हवा जैसे चेहरे यह याद दिलाते हैं कि यह संघर्ष अब अगली पीढ़ी के खून में शामिल हो चुका है। दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए यह एक अलार्म बेल है। 

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