कृषि में बड़ा बदलाव: बजट, एआई तकनीक और वैश्विक समझौतों के बीच नया दौर शुरू

मुंबई/नई दिल्ली डेस्क:

भारत का कृषि क्षेत्र आज कई बड़े बदलाव और बहसों के बीच नया दौर देख रहा है। 2026 के बजट, अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और तकनीकी नवाचारों ने कृषि को सिर्फ परंपरागत खेती से बढ़कर एक बहुआयामी आर्थिक गतिविधि बना दिया है। इस रिपोर्ट में हम भारत में कृषि की ताज़ा स्थिति, बड़े मुद्दों, सरकारी नीतियों और किसानों की चुनौतियों को विस्तार से समझेंगे।

सबसे बड़ी खबर यह है कि भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौता (India–US Interim Trade Deal) पर समझौता हुआ है, लेकिन इससे किसानों में फैसला विवादित रूप से देखा जा रहा है। कई किसान संगठनों का कहना है कि यह समझौता व्यापक कृषि वस्तुओं पर असर डाल सकता है, खासकर जब टैरिफ कम किए जाएंगे और कृषि बाजार में अमेरिकी उत्पादों के प्रवेश के लिए रास्ता खुल सकता है—जिससे घरेलू किसानों को नुकसान हो सकता है। हालांकि सरकार का दावा है कि किसान और घरेलू उत्पादकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस समझौते पर कहा है कि डेयरी और पोल्ट्री जैसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को खुला नहीं किया गया है, ताकि भारतीय किसानों की सुरक्षा बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि से जुड़े हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। इसके बावजूद किसानों और विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर अलग-अलग आवाज़ उठाई हैं।

वहीं, कांग्रेस पार्टियों के सांसदों ने हरियाणा के किसानों पर बढ़ते कर्ज़ और कृषि संकट को लेकर केंद्र सरकार की नीति पर कड़ी आलोचना की है। उनके अनुसार इन कर्ज़ों और लागत के बढ़ने से किसान परिवारों पर दबाव बढ़ा है और इस पर जल्द राहत योजना की मांग की जा रही है।

राज्य सरकारें भी कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए बड़े कदम उठा रही हैं। आंध्र प्रदेश ने 2026–27 के अपने बजट में ₹1,223 करोड़ का प्रावधान किया है, जिससे राज्य में बागवानी (horticulture) को बढ़ावा मिलेगा। यह बजट योजना हाइब्रिड और उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाने के लिए है, ताकि किसानों की आमदनी बढ़े। इसमें तेल पाम, माइक्रो इरिगेशन सिस्टम और फसल विविधीकरण कार्यक्रम जैसी पहलें शामिल हैं।

तकनीकी और कृषि नवाचार भी तेजी से कृषि में जगह बना रहे हैं। केंद्र सरकार और तकनीकी कंपनियों के बीच Bharat-VISTAAR नामक एक ऐसा एआई-संचालित उपकरण लॉन्च होने वाला है, जिसे खास तौर पर किसानों को उनके अपने भाषा में मौसम, फसल योजना, बाजार डेटा, पेस्ट सूचना और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए तैयार किया गया है। यह पहल खेती को डिजिटल और जानकारी-आधारित बनाने का एक बड़ा कदम है।

ऐसी ही एक और पहल India AI Impact Summit के दौरान कृषि सेक्टर को एआई समाधानों से जोड़ने की रही है, जिसमें मशीन लर्निंग और डेटा विश्लेषण से किसानों को उत्पादन, रोग नियंत्रण और खेती की रणनीतियों में मदद मिलेगी।

इसके अलावा कृषि विभाग ने “साथी पोर्टल” जैसे डिजिटल कदमों का ऐलान किया है, जो अप्रैल 2026 से लागू होगा। इस पोर्टल के ज़रिए किसान अब बीजों की गुणवत्ता, प्रमाणन और स्रोत जानकारी आसानी से ट्रेस कर पाएंगे और नकली बीजों से खुद को बचा पाएंगे। लगभग 70% बीज विक्रेता पहले ही पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं।

भारत में किसानों को उपलब्ध आधारभूत नीतियों और बजट आवंटन की भी समीक्षा की गई है। 2026–27 के कृषि बजट में लगभग ₹1.32 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें शोध, कृषि शिक्षा और उन्नत कृषि तकनीकों के लिए संसाधन शामिल हैं। यह बजट किसानों की आमदनी बढ़ाने, उत्पादन लागत कम करने और बेहतर कृषि प्रबंधन के लिए तैयार किया गया है।

इन सबके बीच, किसानों की आम स्थितियों, आंदोलन और कृषि कर्ज़ के मुद्दों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। किसान संगठनों का कहना है कि मौसम, लागत और बाजार के अस्थिर दामों ने खेती को जोखिम भरा बना दिया है। कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि स्थानीय स्तर पर कृषि बाजार आँकड़ों, फसल बीमा और बाजार समर्थन प्रणालियों को अधिक सुदृढ़ करना आवश्यक है, ताकि खेती एक स्थिर और मुनाफ़े वाला व्यवसाय बनी रहे।

निष्कर्ष:
भारत की कृषि एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ पारंपरिक खेती, डिजिटल तकनीक और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते—तीनों का संगम हो रहा है। नीतियां, बजट, तकनीक और किसान आंदोलन सभी मिलकर देश के कृषि भविष्य को आकार दे रहे हैं। यह स्पष्ट है कि कृषि अभी सिर्फ खेती नहीं बल्कि भारत की आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी प्रगति का भी बड़ा हिस्सा है। 

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