मुंबई डेस्क:
मुंबई में अवैध रूप से रह रहे कथित बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े फर्जी दस्तावेज़ों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। नगर प्रशासन की जांच में 237 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र (बर्थ सर्टिफिकेट) बरामद होने के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की ओर से सख्त रुख अपनाया गया है। इस मामले को लेकर मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिन डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने कथित रूप से ये फर्जी प्रमाणपत्र जारी किए हैं, उनके खिलाफ एक महीने के भीतर आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं।
सूत्रों के अनुसार, प्राथमिक जांच में सामने आया है कि इन फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल पहचान स्थापित करने और अन्य सरकारी दस्तावेज़ हासिल करने के लिए किया जा सकता था। प्रशासन को आशंका है कि इस तरह के प्रमाणपत्रों के माध्यम से अवैध रूप से रहने वाले व्यक्तियों ने नागरिकता और निवास संबंधी दस्तावेज़ तैयार करवाने की कोशिश की होगी। हालांकि पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीम अभी विस्तृत जांच में जुटी हुई है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि रिकॉर्ड की नियमित समीक्षा के दौरान दस्तावेज़ों में अनियमितता सामने आई। इसके बाद विशेष जांच दल गठित किया गया। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि संबंधित प्रमाणपत्रों में जन्म की तारीख, अस्पताल के विवरण और जारी करने की प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियां थीं। कुछ मामलों में अस्पताल के रिकॉर्ड और प्रमाणपत्र के विवरण में मेल नहीं पाया गया।
मेयर रितु तावड़े ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि “दस्तावेज़ों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या जालसाजी राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए खतरा है।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि एक महीने के भीतर दोषी पाए जाने वाले संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएं। साथ ही बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग में जारी होने वाले प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया की भी व्यापक समीक्षा की जाएगी।
पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दस्तावेज़ों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है और जिन लोगों के नाम इन प्रमाणपत्रों में दर्ज हैं, उनकी पहचान की पुष्टि की जा रही है। यदि अवैध दस्तावेज़ों के जरिए नागरिकता या अन्य सरकारी लाभ लेने का प्रयास पाया गया, तो संबंधित धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार और नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर फर्जी प्रमाणपत्र जारी हुए हैं, तो यह प्रशासनिक निगरानी में गंभीर चूक को दर्शाता है। वहीं, सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि जांच शुरू कर दोषियों पर कार्रवाई करना ही जिम्मेदार प्रशासन की पहचान है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जन्म प्रमाणपत्र जैसे मूल दस्तावेज़ों की सत्यता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही दस्तावेज़ आगे चलकर आधार, पासपोर्ट और अन्य पहचान पत्रों के लिए आधार बनते हैं।
फिलहाल, जांच जारी है और अगले कुछ हफ्तों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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