तस्वीरें Viral करने की धमकी देकर दबाव? नायगांव (पालघर, महाराष्ट्र) में छोटे मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आरोप
नायगांव में निर्माण कार्यों को लेकर कथित दबाव बनाने के आरोप, लोकल मीडिया की भूमिका पर सवाल
नायगांव क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर एक संवेदनशील मुद्दा सामने आया है। स्थानीय बिल्डरों और नागरिकों का आरोप है कि कुछ छोटे समाचार पत्रों, यूट्यूब चैनलों और लोकल मीडिया से जुड़े पत्रकार, निर्माणाधीन कमरों और इमारतों की तस्वीरें लेकर उन्हें वायरल करने की बात कहकर दबाव बनाने या ब्लैकमेल करने की कोशिश करते हैं।
आरोपों के अनुसार, ये पत्रकार निर्माण स्थलों पर जाकर अनुमति, नक्शा या अन्य तकनीकी पहलुओं को मुद्दा बनाते हैं और खबर प्रकाशित या वीडियो अपलोड करने की चेतावनी देते हैं। कई मामलों में इसे लेकर पैसे या अन्य फायदे की मांग किए जाने की भी शिकायतें सामने आई हैं।
पत्रकारिता की स्वतंत्रता बनाम दुरुपयोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि पत्रकारों का सवाल उठाना और खबर दिखाना उनका अधिकार है, लेकिन अगर उसी अधिकार का इस्तेमाल डर या दबाव बनाने के लिए किया जाए, तो यह पत्रकारिता की मूल भावना के खिलाफ है। इससे ईमानदारी से काम करने वाले पत्रकारों की साख पर भी असर पड़ता है।
सरकार और प्रशासन को क्या कानूनी कदम उठाने चाहिए
कानूनी जानकारों के मुताबिक, सरकार और प्रशासन को ऐसे मामलों में स्पष्ट और निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए:
- यदि धमकी या दबाव के सबूत हों तो पुलिस द्वारा जांच
- पैसों की मांग साबित होने पर जबरन वसूली और ब्लैकमेलिंग से जुड़ी धाराओं में केस
- पत्रकार होने के बावजूद कानून से ऊपर न मानते हुए कार्रवाई
- लोकल मीडिया और यूट्यूब चैनलों के लिए आचार संहिता (Code of Conduct) को सख्ती से लागू करना
- पीड़ित पक्ष के लिए सीधी शिकायत व्यवस्था और गोपनीय जांच
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले से जुड़े कुछ तथ्यों और संवादों को सुरक्षित रूप से संकलित किया गया है, जिनमें बातचीत, मैसेज और अन्य तकनीकी इनपुट शामिल बताए जा रहे हैं। फिलहाल इन जानकारियों को किसी भी सार्वजनिक मंच पर साझा नहीं किया गया है, ताकि किसी पक्ष को बिना जांच के नुकसान न पहुंचे।
सूत्रों का कहना है कि यदि भविष्य में जांच की आवश्यकता महसूस होती है, तो उपलब्ध कराए गए तथ्य और जानकारियां Anti Corruption Bureau (ACB) या संबंधित सक्षम एजेंसियों को सौंपी जा सकती हैं, जिससे मामले की निष्पक्ष और कानूनी समीक्षा हो सके और यह स्पष्ट किया जा सके कि कहीं पत्रकारिता के दायरे से बाहर जाकर किसी तरह का अनुचित दबाव तो नहीं बनाया गया।
पत्रकारिता की स्वतंत्रता और जिम्मेदारी
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि पत्रकारों का कर्तव्य सवाल उठाना और जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाना है। लेकिन यदि खबरों की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर धमकी, दबाव या गलत तरीके की व्याख्या सामने आती है, तो वह पत्रकारिता की मूल भावना से मेल नहीं खाती। ऐसे मामलों से ईमानदारी से काम करने वाले पत्रकारों और छोटे मीडिया प्लेटफॉर्म्स की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है।
निष्पक्ष जांच की जरूरत
क्षेत्र के नागरिकों की ओर से यह मांग उठ रही है कि यदि किसी भी पक्ष की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं, तो प्रशासन द्वारा तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाए, ताकि न तो किसी व्यक्ति, पत्रकार या व्यवसायी को बेवजह दोषी ठहराया जाए, और न ही कानून या मीडिया की स्वतंत्रता का दुरुपयोग हो।
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