RSS: इतिहास, विचारधारा और राजनीति के बीच उसका प्रभाव / RSS: Its impact across history, ideology and politics

 

1. परिचय

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भारत का एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, जिसकी स्थापना 1925 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय समाज को संगठित करना, सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना और राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ाना है। RSS खुद को एक गैर-राजनीतिक संगठन कहता है, लेकिन इसका प्रभाव भारतीय राजनीति, खासकर दक्षिणपंथी विचारधारा पर काफी गहरा रहा है।

2. स्थापना और इतिहास

RSS की स्थापना केशव बलिराम हेडगेवार ने 27 सितंबर 1925 को नागपुर में की थी।

हेडगेवार का मानना था कि भारत की कमजोरी का कारण समाज की असंगठित स्थिति है। इसलिए उन्होंने एक ऐसा संगठन बनाने का सोचा जो लोगों को अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और एकता सिखाए।

प्रमुख ऐतिहासिक चरण:

  • 1925–1947 (स्वतंत्रता से पहले):  RSS का मुख्य फोकस संगठन बनाना और शाखाओं के माध्यम से युवाओं को जोड़ना था।
  • 1947–1975 (स्वतंत्रता के बाद):  महात्मा गांधी की हत्या (1948) के बाद RSS पर प्रतिबंध लगा, लेकिन बाद में हटा लिया गया।
  • 1975–77 (आपातकाल):  इमरजेंसी के दौरान RSS पर फिर से प्रतिबंध लगा, लेकिन इस समय संगठन और मजबूत होकर उभरा।
  • 1990 के बाद:  राम मंदिर आंदोलन के दौरान RSS का प्रभाव तेजी से बढ़ा।

3. RSS कैसे काम करता है

RSS का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है इसकी “शाखा” प्रणाली

शाखा क्या होती है?

शाखा एक दैनिक/साप्ताहिक बैठक होती है जहां स्वयंसेवक (volunteers) इकट्ठा होते हैं।

शाखा में क्या होता है:

  • शारीरिक व्यायाम
  • खेल और ड्रिल
  • देशभक्ति गीत
  • बौद्धिक चर्चा (Boudhik)
  • अनुशासन और नेतृत्व की ट्रेनिंग

संगठन की संरचना:

  • सरसंघचालक (Chief) – सबसे उच्च पद
  • प्रांत, जिला, और शाखा स्तर
  • हर स्तर पर स्वयंसेवक काम करते हैं

RSS में कोई औपचारिक सदस्यता नहीं होती, जो भी शाखा में आता है, वही स्वयंसेवक बन जाता है।

4. विचारधारा (Ideology)

RSS की विचारधारा को “हिंदुत्व” कहा जाता है।

इसके मुख्य बिंदु:

  • भारत को “हिंदू राष्ट्र” मानना
  • सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
  • भारतीय परंपराओं और मूल्यों को बढ़ावा देना
  • सामाजिक एकता (जाति, वर्ग से ऊपर उठकर)

RSS के अनुसार “हिंदू” शब्द केवल धर्म नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पहचान है।

5. RSS के प्रमुख संगठन (Sangh Parivar)

RSS अकेले काम नहीं करता, इसके कई सहयोगी संगठन हैं:

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP) – राजनीतिक संगठन
  • विश्व हिंदू परिषद (VHP) – धार्मिक और सांस्कृतिक कार्य
  • अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) – छात्र संगठन
  • भारतीय मजदूर संघ – मजदूर संगठन

इन सभी को मिलाकर “संघ परिवार” कहा जाता है।

6. RSS और राजनीति

RSS खुद को गैर-राजनीतिक बताता है, लेकिन इसका राजनीति पर प्रभाव काफी मजबूत है।

कैसे जुड़ा है राजनीति से?

  • RSS के कई स्वयंसेवक बाद में BJP में जाते हैं
  • नीतियों और विचारधारा में RSS का असर दिखता है
  • चुनावों के समय स्वयंसेवक ground-level पर काम करते हैं

उदाहरण:

  • कई बड़े नेता RSS से जुड़े रहे हैं
  • संगठन और पार्टी के बीच विचारधारात्मक तालमेल रहता है

7. RSS को मिलने वाला “राजनीतिक संरक्षण”

अब असली सवाल यही है — क्या RSS को राजनीतिक संरक्षण मिलता है?

1. अप्रत्यक्ष समर्थन

  • क्योंकि BJP और RSS की विचारधारा मिलती-जुलती है, इसलिए जब BJP सत्ता में होती है, RSS को एक तरह का अनुकूल माहौल मिलता है
  • सरकारी नीतियों में RSS के विचारों की झलक दिखाई देती है

2. संस्थागत प्रभाव

  • शिक्षा, संस्कृति, और इतिहास लेखन में RSS से जुड़े लोगों का प्रभाव बढ़ा है
  • कई सरकारी संस्थानों में RSS विचारधारा के लोग नियुक्त होते हैं (आलोचकों का दावा)

3. आलोचना क्या कहती है?

  • विपक्ष और कुछ बुद्धिजीवी कहते हैं कि RSS को “extra power” मिलती है
  • आरोप लगता है कि यह संगठन बिना चुनाव लड़े भी नीतियों को प्रभावित करता है

4. RSS का पक्ष:

  • RSS कहता है कि वह सिर्फ समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का काम करता है
  • वह खुद को “राजनीतिक संगठन” नहीं मानता

8. सामाजिक कार्य और योगदान

RSS केवल राजनीति से नहीं जुड़ा है, यह कई सामाजिक कार्य भी करता है:

  • आपदा राहत (बाढ़, भूकंप)
  • शिक्षा (स्कूल, गुरुकुल)
  • ग्रामीण विकास
  • स्वास्थ्य सेवाएं

इसके लिए “सेवा भारती” जैसे संगठन काम करते हैं।

9. विवाद और आलोचना

RSS हमेशा विवादों में भी रहा है।

प्रमुख आलोचनाएं:

  • इसे “हिंदू राष्ट्रवाद” के कारण सांप्रदायिक कहा जाता है
  • अल्पसंख्यकों के प्रति इसके रुख पर सवाल उठते हैं
  • गांधी हत्या के समय इसके नाम पर आरोप लगे (हालांकि कोर्ट में दोष सिद्ध नहीं हुआ)

समर्थकों का नजरिया:

  • RSS को राष्ट्र

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