क्या इंजेक्शन देकर तैयार हो रहा चिकन सेहत के लिए खतरा? पोल्ट्री फार्म्स पर उठे सवाल

न्यूज़ रिपोर्ट: 

देश में चिकन की बढ़ती मांग के बीच पोल्ट्री इंडस्ट्री एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि कई पोल्ट्री फार्म्स में मुर्गों को तेजी से बड़ा करने के लिए इंजेक्शन या दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इससे लोगों के मन में यह चिंता बढ़ रही है कि क्या ऐसा चिकन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पोल्ट्री फार्मिंग में मुर्गों की ग्रोथ तेज करने के लिए आमतौर पर हाई-प्रोटीन फीड, संतुलित पोषण और बेहतर देखभाल का इस्तेमाल किया जाता है। आधिकारिक तौर पर “ग्रोथ हार्मोन इंजेक्शन” का उपयोग भारत में प्रतिबंधित माना जाता है। ऐसे में हर फार्म पर इंजेक्शन इस्तेमाल होने का दावा पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता।

हालांकि, कुछ मामलों में एंटीबायोटिक्स या अन्य दवाओं के अत्यधिक उपयोग को लेकर चिंता जरूर जताई गई है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर मुर्गियों को जरूरत से ज्यादा दवाएं दी जाती हैं, तो उनके अवशेष मांस में रह सकते हैं, जो लंबे समय में इंसानों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं। इससे एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।

फूड सेफ्टी से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पोल्ट्री इंडस्ट्री को सख्त नियमों के तहत काम करना होता है। नियमित जांच और मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निरीक्षण भी किए जाते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन कितना हो रहा है, यह एक महत्वपूर्ण सवाल बना हुआ है।

उपभोक्ताओं के बीच भी अब जागरूकता बढ़ रही है। लोग ऑर्गेनिक और “एंटीबायोटिक-फ्री” चिकन की ओर रुख कर रहे हैं। बाजार में ऐसे प्रोडक्ट्स की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है, हालांकि उनकी कीमत आम चिकन से ज्यादा होती है।

डॉक्टरों का कहना है कि चिकन प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, लेकिन इसे भरोसेमंद स्रोत से ही खरीदना चाहिए और अच्छी तरह पकाकर ही खाना चाहिए। अधपका या अस्वच्छ चिकन स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

कुल मिलाकर, पोल्ट्री इंडस्ट्री में इंजेक्शन के इस्तेमाल को लेकर कई दावे और भ्रम मौजूद हैं। जहां एक ओर आधिकारिक तौर पर ऐसे तरीकों पर रोक है, वहीं दूसरी ओर दवाओं के गलत उपयोग को लेकर चिंता बनी हुई है। इस मुद्दे पर साफ और पारदर्शी निगरानी की जरूरत है, ताकि उपभोक्ताओं की सेहत के साथ किसी तरह का खिलवाड़ न हो सके।

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