नई दिल्ली, 16 मार्च 2026:
भारत में धूम्रपान से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम लगातार चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू और सिगरेट के सेवन के कारण हर साल लाखों लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। हाल के चिकित्सा अध्ययनों और स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार, स्मोकिंग से जुड़ी बीमारियों में फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और सांस से संबंधित समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्टों के अनुसार, भारत में तंबाकू सेवन के कारण हर साल लगभग 13 लाख लोगों की मौत होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों में मौजूद निकोटिन और जहरीले रसायन शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं। विशेष रूप से फेफड़े और हृदय इस आदत से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार स्मोकिंग का सबसे बड़ा असर फेफड़ों पर पड़ता है। लगातार धूम्रपान करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है और व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होने लगती है। लंबे समय तक धूम्रपान करने वालों में क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) और फेफड़ों के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा स्मोकिंग से खांसी, गले में जलन और बार-बार संक्रमण होने की समस्या भी देखने को मिलती है।
दिल की सेहत पर भी धूम्रपान का गहरा प्रभाव पड़ता है। मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि सिगरेट पीने से रक्त वाहिकाएं संकुचित हो जाती हैं, जिससे दिल तक खून पहुंचने में बाधा आती है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। खासकर युवा उम्र में धूम्रपान शुरू करने वाले लोगों में यह खतरा अधिक देखा गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि धूम्रपान का असर केवल सिगरेट पीने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। पैसिव स्मोकिंग यानी दूसरों के धुएं के संपर्क में आने वाले लोगों पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। घर या सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान होने से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
भारत सरकार और कई स्वास्थ्य संगठनों ने तंबाकू के उपयोग को कम करने के लिए विभिन्न अभियान शुरू किए हैं। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध, सिगरेट के पैकेट पर चेतावनी चित्र और जागरूकता कार्यक्रम जैसे कदम उठाए गए हैं। इसके बावजूद डॉक्टरों का कहना है कि अभी भी लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार धूम्रपान छोड़ने से स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। अगर कोई व्यक्ति सिगरेट छोड़ देता है तो कुछ ही महीनों में उसके फेफड़ों और दिल की कार्यक्षमता में सुधार होने लगता है। डॉक्टरों का कहना है कि नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर लोग तंबाकू से होने वाले जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत में धूम्रपान से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं एक गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, सख्त नियम और व्यक्तिगत स्तर पर बदलाव ही इस समस्या को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका हो सकता है।
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