नई दिल्ली: देश में डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का विस्तार कर रही है। आधार, पैन, पासपोर्ट और कई सरकारी योजनाओं की प्रक्रियाएं अब इंटरनेट के माध्यम से पूरी करने की सुविधा दी जा रही है। हालांकि, जमीनी स्तर पर कई बार इन वेबसाइटों के ठीक से काम न करने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। हाल ही में आधार की आधिकारिक वेबसाइट पर अपॉइंटमेंट बुकिंग सुविधा को लेकर भी ऐसी ही समस्या देखने को मिली है।
कई उपयोगकर्ताओं का कहना है कि आधार की वेबसाइट पर “बुक अपॉइंटमेंट” विकल्प मौजूद होने के बावजूद यह सुविधा सही तरीके से काम नहीं करती। उपयोगकर्ता जब अपॉइंटमेंट सेक्शन पर क्लिक करते हैं, तो कई बार पेज खुलता ही नहीं या फिर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती। ऐसे में लोग बार-बार प्रयास करने के बावजूद अपॉइंटमेंट बुक नहीं कर पाते।
दिलचस्प बात यह है कि जब इस समस्या को लेकर आधार के कस्टमर केयर से संपर्क किया जाता है, तो कई बार उन्हें यह बताया जाता है कि अपॉइंटमेंट लेना अनिवार्य नहीं है और वे सीधे आधार केंद्र जाकर अपना काम करवा सकते हैं। इससे लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि यदि अपॉइंटमेंट की आवश्यकता नहीं है, तो वेबसाइट पर यह विकल्प क्यों दिया गया है। वहीं यदि यह सुविधा उपलब्ध है, तो उसका सही तरीके से काम करना भी जरूरी है।
डिजिटल सेवाओं के इस दौर में नागरिकों का मानना है कि सरकारी वेबसाइटों को भी उतनी ही गंभीरता से संचालित किया जाना चाहिए जितनी निजी कंपनियों की सेवाओं में दिखाई देती है। निजी वेबसाइट या ऐप में अगर तकनीकी समस्या आ जाए, तो कंपनियां तुरंत उसे ठीक करने की कोशिश करती हैं और उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट जानकारी भी देती हैं।
इसके विपरीत, कई सरकारी वेबसाइटों में तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायतें लंबे समय तक बनी रहती हैं। सर्वर की समस्या, धीमी वेबसाइट, या लिंक का काम न करना जैसी दिक्कतें लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पर मजबूर कर देती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य नागरिकों की सुविधा बढ़ाना है। इसके लिए जरूरी है कि सरकारी वेबसाइटों की तकनीकी निगरानी और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाए। नियमित अपडेट, बेहतर सर्वर क्षमता और उपयोगकर्ता अनुभव को सुधारने के प्रयास इस दिशा में अहम कदम हो सकते हैं।
फिलहाल, आधार वेबसाइट की अपॉइंटमेंट सेवा से जुड़ी समस्या ने एक बार फिर यह बहस शुरू कर दी है कि डिजिटल इंडिया की पहल को सफल बनाने के लिए केवल ऑनलाइन सेवाएं शुरू करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि वे सेवाएं आम नागरिकों के लिए सुचारू रूप से काम करें।
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