सेब महंगा और अमरूद सस्ता क्यों? पोषण में अमरूद आगे, कीमत में सेब भारी

दिनांक: 13 मार्च 2026

भारत के फल बाजार में अक्सर एक दिलचस्प स्थिति देखने को मिलती है। पोषण के लिहाज से अमरूद को बेहद ताकतवर फल माना जाता है, लेकिन बाजार में उसकी कीमत सेब से काफी कम होती है। आमतौर पर लोग देखते हैं कि सेब की कीमत कई बार 150 से 250 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है, जबकि अमरूद अक्सर 30 से 60 रुपये प्रति किलो में मिल जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब अमरूद में अधिक पोषण और विटामिन होते हैं तो फिर सेब इतना महंगा क्यों होता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह उत्पादन, सप्लाई और बाजार की मांग से जुड़ी है। सेब भारत के सीमित क्षेत्रों में ही बड़े स्तर पर उगाया जाता है। मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे ठंडे इलाकों में सेब की खेती होती है। इन क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उत्पादन सीमित रहता है। इसके अलावा कई बार सेब विदेशों से भी आयात किया जाता है, जिससे उसकी कीमत और बढ़ जाती है।

इसके विपरीत अमरूद की खेती देश के कई हिस्सों में आसानी से की जा सकती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर अमरूद का उत्पादन होता है। यह फल गर्म और सामान्य मौसम में भी उग जाता है, इसलिए इसकी आपूर्ति ज्यादा होती है और बाजार में इसकी कीमत कम रहती है।

पोषण विशेषज्ञों के अनुसार अगर सेहत की बात करें तो अमरूद कई मामलों में सेब से भी अधिक फायदेमंद माना जाता है। अमरूद में विटामिन C की मात्रा बहुत अधिक होती है। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि एक मध्यम आकार के अमरूद में विटामिन C की मात्रा एक सेब की तुलना में कई गुना ज्यादा होती है। इसके अलावा अमरूद में फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि अमरूद पाचन तंत्र के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर कब्ज जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है। वहीं सेब भी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है और इसमें कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं, लेकिन पोषण की दृष्टि से अमरूद कई मामलों में आगे माना जाता है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फल की कीमत सिर्फ पोषण पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी मांग, उपलब्धता और ब्रांड छवि पर भी निर्भर करती है। सेब को लंबे समय से “प्रीमियम फल” के रूप में देखा जाता है और शहरों में इसकी मांग ज्यादा रहती है। इसके अलावा सेब को लंबे समय तक स्टोर करके रखा जा सकता है और दूर-दराज के बाजारों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है।

अमरूद के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है। यह फल जल्दी खराब हो सकता है और इसकी शेल्फ लाइफ कम होती है। इसलिए किसान और व्यापारी इसे ज्यादा समय तक स्टोर नहीं कर पाते। यही कारण है कि बाजार में इसकी कीमत अपेक्षाकृत कम रहती है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को सिर्फ कीमत देखकर फल का चुनाव नहीं करना चाहिए। हर फल के अपने पोषण लाभ होते हैं। अमरूद सस्ता होने के बावजूद बेहद पौष्टिक है और नियमित रूप से इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो सेब की ऊंची कीमत उसकी सीमित खेती, परिवहन लागत और बाजार की मांग के कारण होती है, जबकि अमरूद की अधिक उपलब्धता उसे सस्ता बनाती है। हालांकि पोषण के मामले में अमरूद किसी भी महंगे फल से कम नहीं माना जाता।

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