
आंध्र प्रदेश: रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह
आंध्र प्रदेश ने फरवरी महीने में अब तक का सबसे अधिक नेट जीएसटी संग्रह दर्ज किया है। राज्य को कुल ₹3,061 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। अधिकारियों के अनुसार यह वृद्धि बेहतर कर अनुपालन, डिजिटल ट्रैकिंग और आर्थिक गतिविधियों में तेजी का परिणाम है। एसजीएसटी और आईजीएसटी से राज्य को मजबूत आमदनी हुई है। लगातार 11 महीनों से राज्य में साल-दर-साल वृद्धि देखी जा रही है, जो दर्शाता है कि स्थानीय उद्योग और व्यापार क्षेत्र सक्रिय बने हुए हैं। सरकार का कहना है कि कर सुधारों और सख्त निगरानी के कारण फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट पर भी नियंत्रण पाया गया है। यह उपलब्धि दक्षिण भारत के अन्य राज्यों के मुकाबले आंध्र प्रदेश को प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति में खड़ा करती है।
तेलंगाना: शिक्षा बजट पर उठे सवाल
तेलंगाना में शिक्षा पर खर्च को लेकर चिंता जताई गई है। हालिया बजट विश्लेषण के अनुसार राज्य अपने कुल बजट का लगभग 9% ही शिक्षा पर खर्च कर रहा है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम निवेश का असर स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और सीखने के स्तर पर पड़ सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ सामाजिक कल्याण योजनाओं को शिक्षा व्यय में शामिल दिखाया गया है, जिससे वास्तविक खर्च की तस्वीर स्पष्ट नहीं होती। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि उच्च शिक्षा और बुनियादी साक्षरता पर पर्याप्त निवेश नहीं बढ़ाया गया तो दीर्घकालिक विकास प्रभावित हो सकता है। राज्य सरकार ने हालांकि दावा किया है कि वह चरणबद्ध तरीके से संसाधन बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।
हरियाणा: एसजीएसटी में बड़ी बढ़ोतरी
हरियाणा में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान एसजीएसटी संग्रह में लगभग 22% की वृद्धि दर्ज की गई है। कुल संग्रह ₹44,460 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग ₹7,918 करोड़ अधिक है। यह वृद्धि राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर बताई जा रही है। राज्य के कर विभाग ने डिजिटल निगरानी, जीएसटी सुविधा केंद्रों की स्थापना और कर अनुपालन पर सख्ती को इस सफलता का कारण बताया है। अधिकारियों के अनुसार व्यापार गतिविधियों में स्थिरता और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था से राजस्व बढ़ा है। साथ ही वैट और उत्पाद शुल्क में भी सकारात्मक रुझान देखा गया है। यह संकेत देता है कि राज्य की आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और राजस्व लक्ष्य हासिल करने की दिशा में सरकार को बढ़त मिल रही है।
आंध्र प्रदेश: स्वास्थ्य योजना पर राजनीतिक बहस
आंध्र प्रदेश में प्रस्तावित यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) योजना को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस नेता वाईएस शर्मिला ने इस योजना पर सवाल उठाते हुए इसे भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि यह मौजूदा ‘आरोग्यश्री’ मॉडल को कमजोर कर सकती है, जो पहले से ही गरीब और जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई योजना में निजी बीमा कंपनियों की भूमिका बढ़ेगी और इससे सार्वजनिक धन के उपयोग पर प्रश्न खड़े हो सकते हैं। सरकार का कहना है कि नई योजना स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और अधिक लोगों को कवर करने के उद्देश्य से लाई जा रही है। इस मुद्दे पर राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था में राज्य स्तर की ये हलचलें बताती हैं कि असली बदलाव ज़मीन पर ही दिखाई देता है — आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं होते, वे नीति और प्राथमिकताओं का आईना होते हैं।
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