ओटावा / टोरंटो। पिछले कुछ वर्षों में कनाडा दुनिया के सबसे लोकप्रिय देशों में रहा है जहाँ लाखों विदेशी छात्र पढ़ाई के लिए जाते हैं। खासकर भारत से बड़ी संख्या में छात्र हर साल कनाडा की यूनिवर्सिटियों और कॉलेजों में दाखिला लेते हैं। लेकिन 2025 और 2026 के दौरान कनाडा की सरकार ने पढ़ाई, वीज़ा और नौकरियों से जुड़े कई नियमों में बदलाव किए हैं। इन बदलावों का असर अंतरराष्ट्रीय छात्रों, विशेष रूप से भारतीय छात्रों पर साफ दिखाई दे रहा है।
सबसे बड़ा बदलाव स्टडी परमिट (Student Visa) की संख्या को लेकर किया गया है। कनाडा सरकार ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए एक नया कैप यानी सीमा तय की है। 2026 के लिए लगभग 4,08,000 स्टडी परमिट जारी करने का लक्ष्य रखा गया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में कम है।
सरकार का कहना है कि यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि पिछले कुछ सालों में छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ गई थी और इससे देश में हाउसिंग, हेल्थकेयर और सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव बढ़ने लगा था। इसलिए अब सरकार चाहती है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या को संतुलित रखा जाए और केवल गंभीर व योग्य छात्रों को ही प्रवेश मिले।
इन सख्त नियमों का असर पहले ही दिखाई देने लगा है। 2025 में कनाडा आने वाले नए अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में करीब 60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को भी इससे आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ा क्योंकि विदेशी छात्रों से मिलने वाली फीस उनकी आय का बड़ा हिस्सा होती है।
हालांकि कुछ छात्रों के लिए अच्छी खबर भी है। कनाडा सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि कुछ विशेष श्रेणियों, जैसे मास्टर्स और पीएचडी के छात्रों, को स्टडी परमिट कैप से आंशिक छूट दी जा सकती है। इससे शोध और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।
कनाडा में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए पार्ट-टाइम काम करने के नियम भी महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय छात्र पढ़ाई के दौरान प्रति सप्ताह लगभग 24 घंटे तक पार्ट-टाइम काम कर सकते हैं। इससे छात्रों को अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने और काम का अनुभव हासिल करने में मदद मिलती है।
लेकिन नौकरी के क्षेत्र में कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। हाल की रिपोर्टों के अनुसार कनाडा में अस्थायी विदेशी कर्मचारियों की संख्या को सीमित करने के लिए सरकार नए नियम लागू कर रही है। इसके कारण कई कंपनियों को कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि कुछ विदेशी कामगारों को अपने वर्क परमिट खत्म होने के बाद देश छोड़ना पड़ सकता है।
इसी बीच कनाडा सरकार ने कुशल कामगारों के लिए एक नई पहल भी शुरू की है। इस योजना के तहत लगभग 33,000 विदेशी कामगारों को स्थायी निवास (PR) देने की प्रक्रिया शुरू की गई है, ताकि उन लोगों को स्थायी दर्जा मिल सके जो लंबे समय से देश में काम कर रहे हैं और जिनकी जरूरत कनाडा की अर्थव्यवस्था को है।
भारत के लिए भी कनाडा महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। कई नई छात्रवृत्तियाँ, टेक्नोलॉजी सेक्टर में नौकरियां और विश्वविद्यालय साझेदारियाँ शुरू की गई हैं ताकि भारतीय छात्रों और पेशेवरों को बेहतर अवसर मिल सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा अभी भी भारत को प्रतिभाशाली छात्रों और कुशल कामगारों का एक प्रमुख स्रोत मानता है।
हालांकि वीज़ा अस्वीकृति दर में भी वृद्धि देखी गई है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार 2025 में भारतीय छात्रों के स्टडी परमिट आवेदन की अस्वीकृति दर लगभग 74 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। इससे कई छात्रों को अन्य देशों में पढ़ाई के विकल्प तलाशने पड़े।
इन सब बदलावों के बावजूद कनाडा अभी भी दुनिया के सबसे आकर्षक अध्ययन स्थलों में से एक बना हुआ है। अच्छी शिक्षा व्यवस्था, सुरक्षित वातावरण, बहुसांस्कृतिक समाज और स्थायी निवास के अवसरों के कारण हर साल लाखों छात्र कनाडा जाने का सपना देखते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में कनाडा की नीति अधिक कुशल और मांग वाले क्षेत्रों जैसे टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और इंजीनियरिंग पर केंद्रित होगी। इसका मतलब यह है कि भविष्य में वही छात्र और कामगार ज्यादा सफल होंगे जिनके पास इन क्षेत्रों से जुड़े कौशल और डिग्री होगी।
कुल मिलाकर देखा जाए तो कनाडा में पढ़ाई और नौकरी के अवसर पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, लेकिन नियम पहले की तुलना में काफी सख्त हो गए हैं। इसलिए विदेश में पढ़ाई की योजना बना रहे छात्रों के लिए यह जरूरी है कि वे सही कोर्स चुनें, वित्तीय तैयारी मजबूत रखें और नई इमिग्रेशन नीतियों की पूरी जानकारी लेकर ही आवेदन करें।
यही सावधानी भविष्य में कनाडा में पढ़ाई और करियर बनाने का रास्ता आसान बना सकती है।
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