MSP में बढ़ोतरी, AI से खेती में क्रांति और वैश्विक सहयोग पर जोर: कृषि क्षेत्र में नीतिगत और तकनीकी बदलावों की तेज़ रफ्तार

कल कृषि क्षेत्र में नीति, तकनीक, अनुसंधान और वैश्विक सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण अपडेट सामने आए, जो किसानों, पॉलिसी मेकरों और कृषि कारोबार से जुड़े लोगों के लिए अहम हैं।

सबसे पहले भारत की कृषि नीति से जुड़ी खबरों में यह सामने आया कि सरकार ने रबी 2026 के लिए चना, सरसों और मसूर दाल की खरीद को MSP (मूल्य समर्थन योजना) के तहत मंज़ूर कर लिया है, ताकि किसानों को उनके फ़सलों का उचित मूल्य मिल सके और बाजार में निराशा न फैले। साथ ही कच्चे जूट के MSP को 2026-27 सीज़न के लिए ₹5,925 प्रति क्विंटल तक बढ़ाया गया है, जो पिछले सीज़न से ₹275 ज्यादा है। इस निर्णय का उद्देश्य रेशा सामग्री उगाने वाले कृषकों को बेहतर आय सुनिश्चित करना है और उनकी लागत से कम से कम डेढ़ गुना लाभ देना है।

इन नीतिगत निर्णयों के साथ ही कृषि क्षेत्र में तकनीक के उपयोग को भी बढ़ावा मिल रहा है। खासकर AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) आधारित तकनीकों का भारत की कृषि में तेजी से विस्तार हो रहा है, जिससे उत्पादन, संसाधन प्रबंधन और निर्णय-निर्माण में मदद मिल रही है। भारत को AI प्रतिस्पर्धा में वैश्विक स्तर पर तीसरा स्थान मिला है, और कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और लचीला बनाने के लिए AI का इस्तेमाल किया जा रहा है।

राज्य सरकारें भी कृषि के डिजिटलरण में पीछे नहीं हैं। महाराष्ट्र सरकार ने ‘Maha Agri-AI Policy 2025-29’ के अंतर्गत Findability Sciences Pvt Ltd को AI प्रोजेक्ट के लिए चुना है, जिसका उद्देश्य कृषि इकोसिस्टम में AI, जनरेटिव AI और अन्य डिजिटल तकनीकों को लागू करना है। यह पहल किसानों और कृषि व्यवसायों को डेटा-आधारित समाधान प्रदान करने में मदद करेगी और उत्पादन लागत को कम कर सकती है।

कृषि अनुसंधान और सहयोग के स्तर पर अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां भी मजबूत हो रही हैं। भारत और केन्या के बीच कृषि पर पहली संयुक्त कार्य समूह बैठक वर्चुअल मोड में आयोजित की गई, जिसमें दोनों देशों ने कृषि तकनीक, खाद्य सुरक्षा और उत्पादन सुधार विषयों पर विचार विमर्श किया। इससे दक्षिण एशिया एवं अफ्रीका के बीच कृषि सहयोग की संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा।

वैश्विक स्तर पर कृषि के भविष्य को लेकर भी दिलचस्प पहलें सामने आई हैं। नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी और PepsiCo ने रिजनरेटिव कृषि शोध को बढ़ाने के लिए पाँच नए अनुदान की घोषणा की। इस अनुसंधान का लक्ष्य मिट्टी के स्वास्थ्य को मजबूत करना, जलवायु-तीव्र क्षेत्रों में खेती के तरीकों को सुधारना, और कृषि के अधिक टिकाऊ मॉडल विकसित करना है।

कृषि और पर्यावरण के बीच तालमेल को बढ़ावा देने के लिए IUCN (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंज़र्वेशन ऑफ नेचर) और CGIAR ने एक साथ काम करने की घोषणा की, जिससे जंगल-अनुकूल, प्राकृतिक-सकारात्मक कृषि प्रणालियाँ विकसित हों और खाद्य प्रणालियों की स्थिरता सुनिश्चित हो।

सस्टेनेबिलिटी को प्रोत्साहित करने वाले अन्य अपडेट में, मुख्य कृषि रसायन कंपनी UPL को 2026 के लिए वैश्विक नेतृत्व में स्थिरता परिवर्तन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस सम्मान से यह पुष्टि होती है कि कंपनियां अब ESG (पर्यावरण, सामाजिक, शासन) मानकों को अपनाकर दीर्घकालिक टिकाऊ कृषि प्रणालियों पर काम कर रही हैं।

अंत में, स्थानीय स्तर पर कृषि मुद्दों की तरफ़ ध्यान देते हुए बताया जा रहा है कि छिंदवाड़ा के लिए धान की खरीद लक्ष्य में 3 लाख क्विंटल की वृद्धि की मांग उठाई गई है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां उत्पादन अपेक्षित से अधिक है और अनाज सुरक्षित रूप से संग्रहीत नहीं हो पा रहा है, जिससे किसान नुकसान में न रहें।

कुल मिलाकर, कल की कृषि खबरें नीति समर्थन, तकनीकी अपनत्व, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा स्थिरता-आधारित निवेश उद्धेश्य पर केंद्रित रही। इनमें कृषि के विभिन्न स्तरों पर सकारात्मक बदलाव की दिशा में प्रगति और चुनौतियों का संतुलित मिश्रण देखा गया, जिससे भारत और दुनिया भर के किसान भविष्य के लिए बेहतर तैयार हो रहे हैं।

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