नायगांव में ‘जादू-टोना’ विवाद: मोहल्ले की मीटिंग से पुलिस डायरी तक पहुंचा मामला

नायगांव।
चंद्रयान अंतरिक्ष में, मोबाइल पर 5G, और नायगांव में “जादू-टोना” का विवाद। तीन महिलाओं पर कथित रूप से जादू-टोना करने का आरोप लगा, और इस बार मामला सिर्फ कानाफूसी तक नहीं रहा — सीधे नायगांव पुलिस स्टेशन तक पहुंच गया।
स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्होंने इन महिलाओं को कथित तौर पर “जादू-टोना करते हुए रंगे हाथ” पकड़ लिया। मोहल्ले के कुछ लोगों के अनुसार, देर रात कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखी गईं, जिसके बाद विरोध शुरू हुआ। आरोप है कि जब लोगों ने इस पर आपत्ति जताई, तो बहस बढ़कर झगड़े में बदल गई।

हालांकि, आरोपित महिलाओं का पक्ष अलग है। उनका कहना है कि उन्हें बेवजह निशाना बनाया जा रहा है और निजी रंजिश को “अंधविश्वास” का रंग दिया जा रहा है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के खिलाफ NCR दर्ज की गई है और एहतियातन चैप्टर केस बनाया गया है। यानी कानून ने साफ संदेश दिया है — शांति भंग हुई तो अगली कार्रवाई सख्त होगी।

बताया जा रहा है कि जिन महिलाओं पर आरोप हैं, उनके खिलाफ पहले भी शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं और एक बार पहले चैप्टर की कार्रवाई भी हो चुकी है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि हर मामला अलग होता है और दोष साबित होने तक किसी को अपराधी नहीं कहा जा सकता।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह है कि 2026 में भी “जादू-टोना” जैसे आरोप एक मोहल्ले को दो गुटों में बांट सकते हैं। विज्ञान कहता है कि बीमारी और परेशानी का कारण मेडिकल या सामाजिक हो सकता है, लेकिन मोहल्ले की अदालत अक्सर पहले फैसला सुना देती है।

नायगांव पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाइश दी है और चेतावनी दी है कि भविष्य में कानून व्यवस्था बिगड़ने पर कड़ी कार्रवाई होगी। फिलहाल मामला जांच के दायरे में है।

कहानी का निष्कर्ष?
डिजिटल युग में भी अगर विवाद “रंगे हाथ जादू-टोना पकड़ने” के दावे से शुरू होकर “चैप्टर केस” पर खत्म हो रहा है, तो सवाल सिर्फ आरोपित महिलाओं पर नहीं, पूरे समाज की सोच पर उठता है।

आखिरकार, अदालत सबूत देखती है, अफवाह नहीं।
और नायगांव फिलहाल इसी फर्क को समझने की कोशिश कर रहा है।

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