हालांकि, आरोपित महिलाओं का पक्ष अलग है। उनका कहना है कि उन्हें बेवजह निशाना बनाया जा रहा है और निजी रंजिश को “अंधविश्वास” का रंग दिया जा रहा है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के खिलाफ NCR दर्ज की गई है और एहतियातन चैप्टर केस बनाया गया है। यानी कानून ने साफ संदेश दिया है — शांति भंग हुई तो अगली कार्रवाई सख्त होगी।
बताया जा रहा है कि जिन महिलाओं पर आरोप हैं, उनके खिलाफ पहले भी शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं और एक बार पहले चैप्टर की कार्रवाई भी हो चुकी है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि हर मामला अलग होता है और दोष साबित होने तक किसी को अपराधी नहीं कहा जा सकता।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह है कि 2026 में भी “जादू-टोना” जैसे आरोप एक मोहल्ले को दो गुटों में बांट सकते हैं। विज्ञान कहता है कि बीमारी और परेशानी का कारण मेडिकल या सामाजिक हो सकता है, लेकिन मोहल्ले की अदालत अक्सर पहले फैसला सुना देती है।
नायगांव पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाइश दी है और चेतावनी दी है कि भविष्य में कानून व्यवस्था बिगड़ने पर कड़ी कार्रवाई होगी। फिलहाल मामला जांच के दायरे में है।
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