नई दिल्ली | सोशल और कल्चरल डेस्क दिनांक: 5 फरवरी, 2026
समाज में जैसे-जैसे रूढ़ियाँ टूट रही हैं, उसका सीधा असर हमारे पहनावे पर भी दिख रहा है। भारतीय फैशन जगत में अब 'जेंडर-न्यूट्रल' (Gender-Neutral) या 'यूनिसेक्स' फैशन एक प्रमुख ट्रेंड बनकर उभरा है। आज की नई पीढ़ी (Gen Z और Millennials) फैशन को 'स्त्री' या 'पुरुष' के खांचे में बांटकर नहीं, बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति और आराम के नजरिए से देख रही है।
क्या हैं युवाओं की पसंद?
अब फैशन स्टोर में 'मेंस' और 'विमेंस' सेक्शन के बीच की दूरी कम होती जा रही है। युवाओं के बीच कुछ खास आउटफिट्स सबसे ज्यादा लोकप्रिय हो रहे हैं:
- ओवरसाइज्ड टी-शर्ट्स और शर्ट्स: ढीले-ढाले ऊपरी पहनावे को अब हर कोई अपनी स्टाइल के अनुसार कैरी कर रहा है।
- को-ऑर्ड सेट्स (Co-ord Sets): एक जैसे रंग और पैटर्न वाले टॉप-बॉटम सेट्स जेंडर की सीमाओं को पीछे छोड़ रहे हैं।
- बैगी पैंट्स और डंगरी: फिटिंग के बजाय कंफर्ट पर जोर देने वाले ये कपड़े अब जेंडर-न्यूट्रल फैशन की पहचान बन चुके हैं।
- एक्सेसरीज और मेकअप: नेल पेंट, पर्ल नेकलेस और हैंडबैग्स अब केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहे।
बदलते सामाजिक नजरिए का प्रतिबिंब
फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि जेंडर-न्यूट्रल फैशन केवल एक स्टाइल नहीं, बल्कि एक वैचारिक क्रांति है। यह इस बात का प्रतीक है कि आज का युवा समाज द्वारा थोपे गए नियमों के बजाय अपनी पहचान खुद तय करना चाहता है।
कपड़ों का कोई जेंडर नहीं होता। फैशन का असली मकसद इंसान को आत्मविश्वासी महसूस कराना है। यदि एक पुरुष को फ्लोरल प्रिंट पसंद है या एक महिला को सूट-पैंट, तो यह उनकी पसंद है, न कि उनके जेंडर का पैमाना। - एक प्रसिद्ध लाइफस्टाइल कोच
डिजाइनर्स और ब्रांड्स की नई पहल
बाजार की मांग को देखते हुए अब कई बड़े भारतीय ब्रांड्स ने अलग से 'यूनिसेक्स' कलेक्शन लॉन्च करना शुरू कर दिया है। विज्ञापनों में भी अब ऐसे मॉडल्स को दिखाया जा रहा है जो जेंडर की पारंपरिक परिभाषाओं को चुनौती देते हैं। इससे ब्रांड्स को एक बड़ा और विविध ग्राहक वर्ग मिल रहा है।
निष्कर्ष
जेंडर-न्यूट्रल फैशन की यह बढ़ती मांग इस बात का प्रमाण है कि भविष्य का भारत अधिक समावेशी और खुले विचारों वाला होने वाला है। जहाँ फैशन का पैमाना 'वह क्या पहनेगा/पहनेगी' से बदलकर 'मुझे क्या पसंद है' पर टिक गया है।
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