पीड़ित के अनुसार, 24 जुलाई 2025 से 1 अगस्त 2025 के बीच एक महिला द्वारा गैस कनेक्शन के लिए गारंटी के नाम पर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और बिजली बिल की प्रतियां ली गई थीं। आरोप है कि बाद में इन्हीं दस्तावेजों का उपयोग परिमंडल–2, वसई में दर्ज एक चैप्टर केस में जमानत/श्योरिटी के रूप में किया गया। पीड़ित का दावा है कि उन्होंने किसी भी प्रकार की जमानत के लिए सहमति नहीं दी थी और न ही किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे।
मामला यहीं समाप्त नहीं होता। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि 18 जनवरी 2026 को रात्रि लगभग 10 बजे नायगांव पुलिस स्टेशन में उनके और उनके परिवार के विरुद्ध पत्थर फेंकने की झूठी एनसीआर दर्ज कराई गई। हालांकि, पीड़ित का कहना है कि उस समय वे अपने घर पर मौजूद थे और इसकी पुष्टि के लिए उनके पास सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है।
ई-शिकायत में पीड़ित ने जमानत प्रक्रिया की जांच, संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने तथा झूठी शिकायत की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस प्रारंभिक जांच के बाद इस मामले में क्या कार्रवाई करती है।
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