नई दिल्ली, 17 फरवरी 2026: अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में सैन्य तनाव में फिर से वृद्धि देखने को मिल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे एयरक्राफ्ट कैरीयर समूह USS Gerald R. Ford को मध्य पूर्व की दिशा में तैनात करने का आदेश दिया है, जिससे USS Abraham Lincoln के साथ मिलाकर अमेरिका के पास दो शक्तिशाली विमानवाहक समूह ईरान के करीबी पानी में मौजूद रहेंगे।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम ईरान पर परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों पर ज़ोरदार दबाव डालने के उद्देश्य से उठाया गया है, क्योंकि पिछले राउंड की बातचीत में संघर्ष जारी रहा है और अमेरिका चाहता है कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिहाज़ से और प्रगतिशील बाध्यताएँ स्वीकार करे।
आईआरजीसी (ईरानी क्रांतिकारी गार्ड कोर) और ईरानी नौसेना कमांडर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि अगर तनाव बदता है तो ईरान के पास “अपने समुद्री सुरक्षा हितों की रक्षा” के लिए विकल्प मौजूद हैं। कुछ बयान में कहा गया कि तेहरान अमेरिका के युद्धपोतों की हरकतों को बारीकी से देख रहा है और उसकी नौसेना अपने क्षेत्र में किसी भी खतरे का जवाब देने को तैयार है।
तेहरान की प्रतिक्रिया को और तेज़ करते हुए ईरान के सुप्रीम नेता आयातुल्लाह अली खामेनई ने ट्रंप को एक सीधी चेतावनी जारी की, जिसमें उन्होंने कहा कि “दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना भी कभी-कभी इतनी गंभीर चोट खा सकती है कि फिर उठ नहीं पाती।” इस बयान से स्पष्ट है कि ईरान सैन्य उत्तेजना की स्थिति को गंभीरता से देख रहा है और अपनी रक्षा क्षमता को रुख सख्त रखने का संकेत दे रहा है।
यूएस नौसेना के इस बड़ी स्तर पर युद्धपोतों की तैनाती से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर बढ़ती अस्थिरता को लेकर व्याप्त चिंताएँ और गहरी हुई हैं। यह जलडमरूमध्य वर्ल्ड तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है और इस मार्ग पर किसी भी तरह की सैन्य टकराव स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तत्काल प्रभाव डाल सकती है।
कुछ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के इस कदम में केवल सैन्य दबाव नहीं बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी शामिल है — यह ईरान को यह दिखाना है कि अगर वह कड़ाई वाले प्रतिबंधों और मांगों को मानने में नाकाम रहता है, तो वह गंभीर रणनीतिक चुनौतियों का सामना करेगा।
ट्रंप ने हाल ही में यह भी कहा कि अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन — या “रिज़िम परिवर्तन” — हो जाए तो यह उसके लिए “सबसे अच्छा परिणाम” हो सकता है, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किसी विशेष व्यक्ति या समूह के बारे में वे क्या सोचते हैं।
हालाँकि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और राजनयिक बातचीत के प्रयास जारी हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनीतिक बयानबाज़ी से विश्व स्तर पर चिंता बढ़ रही है। किसी भी तरह की वास्तविक मजबूत टक्कर के परिणाम केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रह सकते; वे वैश्विक सुरक्षा, तेल और आर्थिक बाजारों पर भी असर डाल सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल स्थिति सीधे युद्ध की दिशा में नहीं गई है, लेकिन अत्यधिक बयानबाज़ी और सैन्य उत्प्रेरण के कारण किसी भी आकस्मिक घटना से तनाव और बढ़ सकता है। इसलिए दुनिया भर के नेतृत्व और कूटनीतिक चैनलों में संवाद को प्राथमिकता देने की आवाज़ बढ़ रही है, ताकि किसी बड़े टकराव की स्थिति से पार पाया जा सके।
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