17 फरवरी 2026 न्यूज़
आज उत्तर प्रदेश के लखनऊ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़े पैमाने पर मनरेगा विरोधी प्रदर्शन किया, जिसे उन्होंने “मनरेगा बचाओ महासंग्राम” नाम दिया है। इस प्रदर्शन का मुख्य फोकस केंद्र सरकार द्वारा MGNREGA (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में किए जा रहे बदलावों और कथित रूप से इसे कमज़ोर बनाए जाने के खिलाफ था।
सवेरे से ही कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता लखनऊ के राज्य विधानसभा के बाहर जमा हुए और वहां “विधानसभा घेराव” (Gherao) की कार्रवाई की। भारी पुलिस तैनाती के बीच प्रदर्शनकारियों ने सरकार के MGNREGA को कमजोर करने, मजदूरों को समय पर मजदूरी न देना और कानून को बदलने की दिशा में उठाए कदमों के खिलाफ जोरदार नाराज़गी जताई।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक कानून नहीं बल्कि ग्रामीण भारत के लाखों गरीबों और मजदूरों के लिए जीवन की गारंटी रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियाँ ग्रामीण गरीबों को रोजगार का अधिकार छीन रही हैं और राज्य में बेरोज़गारी की समस्या को गहरा रही हैं। राय ने कहा कि कांग्रेस विधानसभा को घेरकर यह दिखाना चाहती है कि मनरेगा जैसे अधिकार को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
प्रदर्शन के बीच कुछ जगह पर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध भी देखने को मिला। भारी पुलिस बल ने सुरक्षा के नाम पर कई रास्तों को बंद कर दिया और कुछ कार्यकर्ताओं को रोक लिया गया। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता नारेबाज़ी करते हुए और बैनर व झंडे उठाए हुए विरोध जारी रखे।
लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं का कहना था कि MGNREGA को कमजोर करना सीधे गरीब किसान और ग्रामीण मजदूरों के साथ अन्याय है। उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा के तहत मिलने वाले 100 दिनों के रोजगार के अवसर और मजदूरी के भुगतान का अधिकार उनके आजीविका के लिए बेहद ज़रूरी है — इसे सरकार द्वारा छीनने के प्रयासों को वे लोकतंत्र और गरीब अधिकारों के खिलाफ ठहराते हैं।
इस प्रदर्शन में सिर्फ पुरुष नहीं, बल्कि महिलाओं और युवा कार्यकर्ताओं की भी बड़ी भागीदारी रही। मुरादाबाद से हुई एक महिला कांग्रेस द्वारा आयोजित रैली में महिलाओं ने कहा कि मनरेगा का भरोसेमंद और सशक्त रूप ग्रामीण परिवारों की रोज़मर्रा की जीवन जद्दोजहद में एक बड़ी मदद रहा है।
पंजाब और जम्मू-कश्मीर में भी इसी “मनरेगा बचाओ” अभियान के तहत कांग्रेस नेताओं और समर्थकों ने बड़े विरोध प्रदर्शन किए, जिनमें कुछ नेताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया। जम्मू में वरिष्ठ कांग्रेस विधायक परगट सिंह सहित कई कार्यकर्ताओं को ‘Save MGNREGA’ के नारों के साथ गिरफ्तार किया गया।
यह विरोध केवल एक दिन तक सीमित नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने पहले ही MGNREGA के नाम बदलने और ढांचे में बदलाव के विरोध में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की थी और कहा है कि वे संसद से बाहर तक इस मुद्दे पर दबाव बनाते रहेंगे।
कुल मिलाकर, आज का प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि MGNREGA पर हो रहे बदलाव ने ग्रामीण रोजगार और सामाजिक सुरक्षा को लेकर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया को जन्म दिया है। विरोधकारियों का मानना है कि अगर यह योजना कमजोर हुई, तो इसका सीधा असर करोड़ों गरीब और कृषि-आश्रित परिवारों की आजीविका पर पड़ेगा — और इसे रोकने के लिए वे सोन चिराग़ तक लड़ाई जारी रखने को तैयार नजर आ रहे हैं।
अगर चाहो, मैं इस प्रदर्शन के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक निहितार्थ का एक विश्लेषण भी दे सकता हूँ ताकि पता चले कि यह आंदोलन ग्रामीण भारत के लिए लक्ष्य सच में क्या है — उससे क्या बदल सकता है, और क्यों यह इतना बड़ा मुद्दा बन गया है।
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