नई दिल्ली: आयकर विभाग की एक व्यापक जांच में सरकार ने देश के रेस्टोरेंट सेक्टर में एक बेहद बड़े टैक्स चोरी के मामले का पर्दाफाश किया है, जिसका अनुमानित मूल्य लगभग 70,000 करोड़ रुपये है। इस मामले का खुलासा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स टूल्स की मदद से किया गया, जिससे हैदराबाद से शुरू हुई जांच पूरे भारत में फैले घोटाले तक पहुँच गई।
घोटाला तब उजागर हुआ जब हैदराबाद की कुछ बिरयानी रेस्टोरेंट्स की रूटीन जांच के दौरान विशेषज्ञों ने बिलिंग सॉफ्टवेयर में बड़े पैमाने पर असामान्य पैटर्न देखे। इनकम टैक्स विभाग ने लगभग 60 टेराबाइट ट्रांजेक्शन डेटा का विश्लेषण किया, जो देश भर में 1.77 लाख से अधिक रेस्टोरेंट आईडी से जुड़ा था। AI टूल्स ने यह पहचान किया कि कई रेस्टोरेंटों ने अपनी बिक्री रिपोर्टिंग में हेराफेरी कर वास्तविक टर्नओवर छिपाया और उसके आधार पर टैक्स कम भरा।
जांच के शुरुआती चरण में यह पता चला कि कुछ रेस्टोरेंट्स ने बिलिंग सिस्टम से बिक्री रसीद को बाद में हटा दिया या कम दिखाया, जिससे टैक्स चोरी को अंजाम दिया जा रहा था। अधिकारियों को यह भी पता चला कि 13,317 करोड़ रुपये की डिलीट या संशोधित बिक्री बिल के रूप में रिकॉर्ड में नहीं दिखी, जो व्यापक पैमाने पर छुपाई गई आय के संकेत हैं।
इस घोटाले की गहराई को समझने के लिए आयकर विभाग ने फील्ड टीमों को भी लगाया। करीब 40 रेस्टोरेंट्स पर फिजिकल वेरिफिकेशन किया गया, जहां वास्तविक बिक्री और डिजिटल रिकॉर्ड के बीच भारी अंतर पाया गया, जिसमें करीब 400 करोड़ रुपये की अनडिक्लेयर बिक्री सामने आई।
जांच से यह भी पता चला कि यह मामला सिर्फ हैदराबाद तक सीमित नहीं रहा। कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में भी बिलिंग डेटा में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ के संकेत मिले। कुछ रेस्टोरेंटों ने बिक्री रिकॉर्ड को पूरी तरह मिटा दिया, जबकि अन्य ने कम बिक्री दर्ज करके टैक्स बचाया।
सरकार के अधिकारियों का कहना है कि इस बड़ी जांच का यह केवल पहला चरण है। AI और अन्य डिजिटल फोरेंसिक उपकरणों की मदद से अब आगे और भी गहराई से छानबीन की जाएगी। दोषी पाए गए लोगों और इकाइयों पर सख्त कर, जुर्माना और संभवतः आपराधिक कार्रवाई भी हो सकती है। साथ ही, बिलिंग सॉफ्टवेयर कंपनियों की भूमिका की भी जांच जारी है, जिससे यह पता चले कि क्या उनके सिस्टम जानबूझकर टैक्स चोरी को आसान बना रहे थे।
विशेषज्ञों की मानें तो यह मामला यह संकेत देता है कि डिजिटल निगरानी और AI आधारित डेटा एनालिसिस अब वित्तीय अपराधों के खिलाफ एक प्रभावी हथियार बन रहा है। सरकार GST नेटवर्क और POS सिस्टम के बीच एकीकृत निगरानी के विकल्प पर भी विचार कर रही है ताकि भविष्य में टैक्स चोरी की गुंजाइश कम से कम हो।
देश भर में इस खुलासे से ईमानदार व्यवसायों को राहत मिल सकती है, क्योंकि टैक्स चोरी करने वाले कारोबारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई से प्रतिस्पर्धा संतुलित होगी। वहीं, यह घोटाला सरकार की डिजिटल निगरानी के बढ़ते दायरे को दिखाता है और यह बात भी साफ करता है कि वित्तीय विनियमों के उल्लंघन पर नजर रखने के लिए तकनीक अब अनिवार्य हथियार बन चुकी है।
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