आज की सबसे बड़ी और ताज़ा क्राइम न्यूज़ — भारत (24 फ़रवरी 2026)

क्रैकडाउन ऑपरेशन ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ में 104 साइबर अपराधियों के गिरफ़्तार

आज भारत में एक बहुत बड़ा साइबर क्राइम से जुड़ा मामला सामने आया है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल फाइनेंशियल धोखाधड़ी की चुनौती को दिखाता है। हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने “ऑपरेशन ऑक्टोपस” नाम के 10‑दिन के अभियान में 104 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो हजारों साइबर फ्रॉड मामलों में शामिल बताए जा रहे हैं। उनका नेटवर्क 16 राज्यों तक फैला हुआ था, और पुलिस ने इस पूरे गिरोह की कड़ी छानबीन के बाद गिरफ्तारियाँ और डेटा जब्त किया

क्या हुआ और क्या पकड़ा गया:
यह ऑपरेशन देश में सबसे बड़े साइबर क्राइम नेटवर्क में से एक का निशान लगा रहा है। जांच में सामने आया कि गिरफ़्तार आरोपी फर्जी निवेश और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड और फर्जी बैंक अकाउंट धोखाधड़ी में सक्रिय थे। कुल 1,055 से ज़्यादा साइबरक्राइम मामलों से यह गिरोह जुड़ा मिला। इस गिरोह के तहत 151 बैंक खातों, 86 “म्यूल” (पैसा ट्रांसफर करने वाले) अकाउंट धारकों, 17 ऐसे लोगों के पहचान विवरण और एक बैंक के बांडेड रिश्तेदार प्रबंधक भी पाए गए, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी खाते खोलने में मदद की। पुलिस ने जब्त किए गए सामान में हजारों उपकरण शामिल थे — नकद रकम, मोबाइल फोन, SIM कार्ड, बैंक पासबुक, बैक कार्ड, लैपटॉप और स्टाम्प।

पकड़े गए अभियुक्तों के खिलाफ यह आरोप है कि वे कॉउंटरफिट निवेश ऐप, नकली स्टॉक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और जालसाज़ी के डिजिटल साधनों के ज़रिये लोगों का भरोसा जीतकर उनसे पैसे ऐंठ रहे थे। कई पीड़ितों ने बताया कि उन्हें आकर्षक निवेश रिटर्न का फर्जी वादा करके फँसाया गया था और बाद में पैसा निकालना मुश्किल हो गया। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल फ्रॉड की यह रणनीति बेहद परिष्कृत थी और बड़ी संख्या में निवेशकों को निशाना बनाया गया था।

साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और अपरिचित निवेश या फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म पर ध्यान देने की अपील की है। अधिकारियों ने चेताया कि अगर कोई अनचाहे वित्तीय ऑफ़र या संदिग्ध डिजिटल लेन‑देनों का सामना करें तो तुरंत रिपोर्ट करें और साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएँ। आगे भी पुलिस और अन्य जांच एजेंसियाँ इस नेटवर्क के बाकी संभावित कनेक्शनों को ट्रैक कर रही हैं।

इस खबर से साफ़ संकेत मिलता है कि भारत में साइबर फ्रॉड अब मात्र एक व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि जालसाज़ी नेटवर्क सिस्टमेटिक और व्यवस्थित स्तर पर संचालित किया जा रहा है। डिजिटल भारत के विस्तार के साथ-साथ साइबर सुरक्षा की चुनौतियाँ भी बढ़ रही हैं, और आज की यह गिरफ़्तारी इस दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। 

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