एआई समिट 2026 में कांग्रेस का विरोध बना राष्ट्रीय सियासत का बड़ा मुद्दा

 

नई दिल्ली, 21 फ़रवरी 2026: एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान कांग्रेस पार्टी की भूमिका और उसकी राजनीति आज राजनीतिक कलह का मुख्य विषय बनी हुई है। भारत मंडपम में आयोजित इस वैश्विक कार्यक्रम के बीच भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन ने देश भर में राजनीतिक बहस को तेज़ कर दिया है। कांग्रेस के इस कदम को लेकर विपक्षी राजनीतिक दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जबकि कांग्रेस नेतृत्व ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग बताया है।

शुक्रवार को युवा कांग्रेस के सदस्यों ने एआई समिट के एक प्रदर्शनी हॉल में बिना शर्ट पहनकर विरोध प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाए। पुलिस ने इस प्रदर्शन के दौरान कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और उनके ख़िलाफ़ सुरक्षा व्यवस्था तोड़ने तथा नियमों का उल्लंघन करने के आरोप दर्ज किए हैं। दिल्ली पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन के समय कुछ कार्यकर्ताओं ने परिसर की सुरक्षा को भंग किया और बिना वैध पास या क्यूआर कोड के प्रवेश करने की कोशिश की, जिससे अधिकारियों ने उन्हें रोकने के लिए हस्तक्षेप किया।

कांग्रेस का पक्ष:
कांग्रेस पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग बताया है और कहा है कि यह कार्रवाई “एक समझौता-प्राप्त प्रधानमंत्री” के खिलाफ आवाज उठाने का तरीका था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी की कि समिट का आयोजन एक असंगठित पीआर तमाशा में बदल गया है, जिसमें भारतीय डेटा, भविष्य की तकनीकों और सुरक्षा चिंताओं को पर्याप्त गंभीरता नहीं दी गई। कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे ने समिट का आयोजन व्यवस्थापन की कमी और भ्रांतियों से भरा बताया, साथ ही यह भी कहा कि प्रतिभागियों को मूलभूत सुविधाओं जैसे भोजन और पानी तक पर्याप्त व्यवस्था प्रदान नहीं की गई थी। कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने केंद्रीय मंत्री और आयोजन के संचालन पर सवाल उठाए और इसे प्रशासनिक अक्षमता का प्रमाण बताया।

विपक्ष की प्रतिक्रिया और भाजपा का आरोप:
बड़ी राजनीतिक प्रतिक्रिया में भाजपा ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीव्र टिप्पणी की है। भाजपा ने इसे राष्ट्रीय हित के खिलाफ बताया और कहा कि कांग्रेस देश का अपमान कर रही है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुदंशु त्रिवेदी ने तो प्रदर्शन को देशद्रोह तक करार दिया है, यह कहते हुए कि कांग्रेस ने भारत की छवि को वैश्विक अतिथियों के सामने खराब करने की कोशिश की। भाजपा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के समर्थक ‘लश्कर-ए-राहुल’ के नाम से देश की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। दूसरी ओर अन्य विपक्षी दलों जैसे बसपा, सपा नेताओं ने भी युवा कांग्रेस के क़दम की आलोचना की है, इसे अनुचित और समय-अनुकूल नहीं बताया है।

सोशल मीडिया और सार्वजनिक बहस:
सोशल मीडिया पर विरोध प्रदर्शन को लेकर तीखी बहस चल रही है। कुछ लोग इसे राजनीतिक नाटक मान रहे हैं, जबकि समर्थक इसे लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कह रहे हैं। यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन की ख़बर सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर वायरल हो रही है, और जनता के बीच इसे लेकर मतभेद स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहे हैं। कई वीडियो प्लेटफ़ॉर्मों पर प्रदर्शन के लाइव फुटेज वायरल हो रहे हैं, जिनमें विरोध के दौरान लगाए गए नारे साफ़ दिखाई दे रहे हैं।

राजनीतिक प्रभाव:
कांग्रेस का यह कदम केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं रहा, बल्कि इसने राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा इसे राष्ट्रीय हित के खिलाफ बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे नागरिक अधिकारों की आवाज़ कह रही है। दोनों पक्षों के बीच यह बहस अब चुनाव-पूर्व राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनती दिख रही है, जिससे समिट के वैश्विक तकनीकी एजेंडे पर भी प्रभाव पड़ रहा है।

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